Kanpur: मुख्तार बाबा का रेस्टोरेंट सील, कई खाद्य उत्पादों का लिया सैंपल, पांच दुकानें पहले हो चुकी हैं सील
मुख्तार बाबा के रेस्टोरेंट समेत पांच संपत्तियां सील की गई हैं। शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने कार्रवाई की है। बता दें कि सीलिंग से पहले खाद्य विभाग ने रेस्टोरेंट से कई खाद्य उत्पादों का सैंपल भी लिया।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कानपुर में जून 2022 में हुई हिंसा के मुख्य आरोपी व फाइनेंसर मुख्तार बाबा पर प्रशासन ने शिकंजा कस दिया है। गुरुवार को भारी पुलिस फोर्स की मौजूदगी में मुख्तार बाबा के सबसे पुराने रेस्टोरेंट बाबा बिरयानी को प्रशासन ने सील कर दिया।
बाबा ने रामजानकी मंदिर ट्रस्ट की करीब 500 वर्ग गज जमीन को कब्जा कर रेस्टोरेंट बना दिया था। इस बीच शत्रु संपत्ति के अभिरक्षक कार्यालय की जांच में पता चला कि वह शत्रु संपत्ति है। जांच के बाद ही अभिरक्षक कार्यालय ने चार जनवरी को इसे अपने कब्जे में लेने और नगर निगम के दस्तावेजों में शत्रु संपत्ति दर्ज करने के निर्देश दिए।
इसके बाद जिला प्रशासन ने सीलिंग कर संपत्ति को अपने कब्जे में ले लिया। बता दें, जांच के बाद चार और संपत्तियां सामने आईं, जो शत्रु संपत्ति निकलीं। इन सभी संपत्तियों को भी सील करने की कार्रवाई की जा रही है। इसके बाद आगे की कार्रवाई निर्धारित होगी।
खाद्य सुरक्षा विभाग ने लिए सैंपल
सीलिंग की कार्रवाई के बीच खाद्य सुरक्षा विभाग ने बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट से नौ खाद्य उत्पादों के सैंपल लिए हैं। इनमें दही, घी, खोया, सोहन पापड़ी, चॉकलेट पेस्ट्री, बेसन, काजू पिस्ता, बिस्किट और चांदी वर्क युक्त मिठाई का सैंपल शामिल है। सैंपल गड़बड़ मिले तो मुख्तार बाबा पर जुर्माना लग सकता है।
पहले से बंद हैं छह रेस्टोरेंट
कानपुर हिंसा के बाद मुखतार बाबा के बाबा बिरयानी नाम से चल रहे 6 रेस्टोरेंट सील किए जा चुके हैं। इन सभी से खाद्य सुरक्षा विभाग ने सैंपल भरा था और सैंपल असुरक्षित पाए जाने के बाद सीलिंग की कार्रवाई की गई थी। इसके बाद से अब तक बेकनगंज स्थित बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट ही बचा था।
मुख्तार ने जमीन कब्जा करने का रचा कुचक्र
शत्रु संपत्ति होने की शिकायत के बाद शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय ने जांच शुरू की। जिसमें सामने आया कि वर्ष 1963 से 1968 तक ये जमीन आबिद रहमान के नाम पर दर्ज थी। चूंकि आबिद रहमान पाक नागरिक हो गया था ऐसे में जमीन कब्जाने के लिए मुख्तार बाबा ने कुचक्र रचा और मंदिर की जमीन को कब्जा लिया।
ये संपत्तियां की गईं सील
- भवन संख्या 88/21, दारूल मौला (पूर्ण भाग) स्थित नाला रोड, चमनगंज कानपुर नगर।
- भवन संख्या 88/21A, दारूल गौला (पूर्ण भाग) स्थित नाला रोड, चमनगंज कानपुर नगर।
- भवन संख्या 88/2113, दारूल भौला (पूर्ण भाग) स्थित नाला रोड, चमनगंज कानपुर नगर।
- भवन संख्या 88/21C दारुल गौला (पूर्ण भाग) स्थित नाला रोड, चमनगंज कानपुर नगर।
- भवन संख्या 99/14A राम जानकी मंदिर (पूर्ण भाग) स्थित डॉ. बेरी चौहारा, बेकनगंज।
कभी रामजानकी मंदिर था, अब शत्रु संपत्ति कहलाएगा
बेकनगंज में स्थित जिस 99/14 ए को शत्रु संपत्ति के तौर पर जिला प्रशासन ने सील कर अपने कब्जे में लिया है वहां बाबा बिरयानी के खुलने से पहले राम जानकी मंदिर हुआ करता था। 1963 तक वह नगर निगम के दस्तावेजों में ट्रस्ट के रूप में दर्ज था। नगर निगम की पंचशाला 1963-68 के बीच आबिद रहमान का नाम चढ़ा और संपत्ति दो हिस्सों में बंट गई। यहीं से इस संपत्ति पर मुख्तार बाबा ने कब्जा जमाया और बाबा बिरयानी रेस्टोरेंट तान दिया।
दारूल मौला के निवासियों से वसूला जाएगा किराया
चमनगंज के नालारोड स्थित दारूल मौला की चारों संपत्तियों को भी शत्रु संपत्ति घोषित किया गया है। इसके बाद प्रशासन ने यहां नोटिस चस्पा कर उसे अपने प्रबंधन में लेने की सूचना वहां के रहने वालों को दे दी। फिलहाल उन लोगों से संपत्ति खाली नहीं कराई जाएगी, लेकिन सर्किल रेट के अनुसार किराया वसूला जाएगा। इन संपत्तियों में करीब 50 परिवार रहते हैं, जिनमें मुख्तार की बेटी व दामाद शामिल हैं।