सांसद साक्षी महाराज बोले: 'चुनाव हारने में गिनीज बुक में दर्ज हो राहुल का नाम'; अखिलेश यादव के लिए कही ये बात
सांसद ने कहा कि जिन लोगों ने कुंभ का विरोध किया, उन्हें सद्बुद्धि मिले। विपक्षी दल के नेताओं को ऐसा आयोजन करना था तो उन्हें सत्ता में रहते हुए यह करना चाहिए था।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद बुधवार को सांसद साक्षी महाराज ने राहुल गांधी पर तीखा व्यंग किया। कहा कि हार के मामले में राहुल गांधी का सम्मान किया जाना चाहिए। गिनीज बुक में उनका नाम भी दर्ज होना चाहिए। वह जो भी चुनाव लड़ते हैं, हारते हैं। भगवान उनको सलामत रखें, हमारे सामने खड़े रहें। वह ऐसे ही चुनाव हारते रहें और हम जीतते रहें।
अपने कार्यालय में साक्षी महाराज ने कहा कि पिछले 65 साल से देश की राजनीति में बदलाव होता रहा। संविधान में संशोधन होते रहे, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 10 सालों में भारत को एक नई दिशा मिली है। सांसद ने कहा कि जिन लोगों ने कुंभ का विरोध किया, उन्हें सद्बुद्धि मिले। विपक्षी दल के नेताओं को ऐसा आयोजन करना था तो उन्हें सत्ता में रहते हुए यह करना चाहिए था। 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का काम करेंगे। दिल्ली चुनाव पर कहा कि दिल्ली की जनता ने आरोपियों और पापियों को भी हटा दिया।
जिनके पास बुद्धि नहीं, वह कुंभ के लिए करते हैं अनर्गल प्रलाप
सांसद ने कहा कि जिनके पास बुद्धि नहीं है वह कुंभ के लिए अनर्गल प्रलाप करते हैं। उसमें अखिलेश यादव भी हैं। उनको कुंभ नहीं दिखाई दे रहा है। कुंभ में 2027 दिखाई दे रहा है। कुंभ ने 2027 का परिणाम सुनिश्चित कर दिया। वह कुछ और ही सपने देख रहे थे। 65 साल तक तुष्टिकरण की राजनीति होती रही। मुसलमान को डराया धमकाया जाता और भयभीत किया जाता रहा। वहीं, प्रधानमंत्री ने सबके साथ सबके विकास के महामंत्र के साथ जो सारे देश में विकास किया उससे प्रेम का सौहार्द और वातावरण बना। यह कुंभ सोने पर सुहागा है।
अखिलेश को सद्बुद्धि प्रदान करें गंगा मैया
कुंभ का जिन लोगों ने विरोध किया, वह विरोध आगे भी करेंगे। उन्हें गंगा मैया और सद्बुद्धि प्रदान करें। अखिलेश यादव के लिए कुछ कहना ठीक नहीं है। क्योंकि कहते हैं नाच ना आवे, आंगन टेढ़ा। जब वह सत्ता में थे तब वह इतना बड़ा आयोजन कर सकते थे किसने रोका था, आज इतना बड़ा आयोजन मोदी और योगी की कृपा से हो गया है। इस आयोजन से एकता का बड़ा संदेश दिया गया है। इससे विभिन्न विरोधी दलों व राजनीतिक पार्टी की जमीन खिसक गई है। इसलिए ऊल जलूल बातें कर रहे हैं, जिसका कोई तर्क नहीं है।