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कानपुर: गंगा में अधजली लाशें देख बछेंद्री द्रवित हो उठीं
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 17 Oct 2018 12:11 PM IST
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बछेन्द्री पाल
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एवरेस्ट फतेह करने वाली देश की पहली महिला पर्वतारोही और केंद्र सरकार के गंगा स्वच्छता अभियान की ब्रांड अंबेसडर बछेन्द्री पाल ने अधजली लाशों को भी गंगा प्रदूषण का बड़ा कारण बताया। कानपुर फजलगंज स्थित अमर उजाला कार्यालय में मंगलवार को पहुंचीं बछेन्द्री पाल ने कहा कि दाह संस्कार का जो पारंपरिक तरीका है, उसमें शव पूरी तरह से जल नहीं पाते। इसके बाद ये अधजले शव गंगा में ही बहा दिए जाते हैं। इस पारंपरिक तरीके को छोड़कर विद्युत शवदाह गृहों का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे गंगा प्रदूषण को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
बछेन्द्री पाल हरिद्वार से पटना तक 1500 किलोमीटर की जागरुकता यात्रा (राफ्टिंग) पर निकलीं हैं। 40 लोगों की टीम है। इसमें आईआईटीयंस, रेडियो जॉकी, पर्वतारोही, मल्टीनेशनल कंपनियों में जॉब करने वाले, एथलीट भी हैं। यह टीम जगह-जगह रुककर लोगों को गंगा सफाई के प्रति जागरूक कर रही है। टीम इस समय कानपुर में है। बछेन्द्री पाल ने बताया कि हरिद्वार से कानपुर के बीच उन्होंने गंगा के किनारे कई ऐसे घाट देखे जहां शवों को जलाया जा रहा था। लोगों से बातचीत भी की। इसमें पता चला कि लकड़ी से शव जलाने में पूरी तरह से जल नहीं पाते। बाद में इन्हें गंगा में ही बहा दिया जाता है।
बछेन्द्री पाल ने कहा कि उन्होंने पहली बार कानपुर में ही देखा कि नाले सीधे गंगा में गिर और घुल रहे हैं। यह देखकर उनका मन द्रवित हो गया। इस पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के इंजीनियर घनश्याम द्विवेदी ने बताया कि परमट में जो नाला गंगा में गिर रहा है, उसकी टैपिंग हो चुकी है। सीवर सफाई का काम चलने की वजह से नाले का कुछ पानी अभी गंगा में गिर रहा है। जल्द इसे बंद कर दिया जाएगा।
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बछेन्द्री पाल हरिद्वार से पटना तक 1500 किलोमीटर की जागरुकता यात्रा (राफ्टिंग) पर निकलीं हैं। 40 लोगों की टीम है। इसमें आईआईटीयंस, रेडियो जॉकी, पर्वतारोही, मल्टीनेशनल कंपनियों में जॉब करने वाले, एथलीट भी हैं। यह टीम जगह-जगह रुककर लोगों को गंगा सफाई के प्रति जागरूक कर रही है। टीम इस समय कानपुर में है। बछेन्द्री पाल ने बताया कि हरिद्वार से कानपुर के बीच उन्होंने गंगा के किनारे कई ऐसे घाट देखे जहां शवों को जलाया जा रहा था। लोगों से बातचीत भी की। इसमें पता चला कि लकड़ी से शव जलाने में पूरी तरह से जल नहीं पाते। बाद में इन्हें गंगा में ही बहा दिया जाता है।
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बछेन्द्री पाल ने कहा कि उन्होंने पहली बार कानपुर में ही देखा कि नाले सीधे गंगा में गिर और घुल रहे हैं। यह देखकर उनका मन द्रवित हो गया। इस पर गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के इंजीनियर घनश्याम द्विवेदी ने बताया कि परमट में जो नाला गंगा में गिर रहा है, उसकी टैपिंग हो चुकी है। सीवर सफाई का काम चलने की वजह से नाले का कुछ पानी अभी गंगा में गिर रहा है। जल्द इसे बंद कर दिया जाएगा।
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बछेन्द्री पाल
24 साल बाद यात्रा पर, अब आया है बदलाव
बछेन्द्री पाल ने बताया कि उन्होंने महिलाओं की टीम के साथ 1994 में हरिद्वार से कोलकाता (2500 किलोमीटर) का सफर नाव से तय किया था। उस समय भी उन्होंने कई जगहों पर रुककर सफाई की थी। तब लोग पूछते थे कि आपको सफाई करने का कितना पैसा मिलता है। करीब 24 साल बाद मिशन गंगे को लेकर फिर से निकली हूं। अब यह फर्क देखने को मिला कि जहां सफाई करती हूं और भी लोग साथ आ जाते हैं। यही जागरुकता सभी लोगों में लानी है। गंगा पवित्र है, हमारी माता है, जीवनदायिनी है जब तक लोग इस भावना से नहीं जुटेंगे, तब तक मिशन सफल नहीं होगा। बछेन्द्री पाल के साथ आए पनकी महंत जितेंद्र दास ने कहा कि जनता को जागरूक होने के साथ ही प्रदेश सरकार को भी शहर में विद्युत शव दाह गृह बढ़ाने होंगे। पंडित रामजी त्रिपाठी ने कहा कि काली नदी और रामगंगा नदी भी गंगा में मिलकर इसे और प्रदूषित कर रही हैं।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट से जुड़े लोगोें को कोई दिक्कत तो बताएं
अमर उजाला कार्यालय आए उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार आदित्य विद्या सागर ने कहा कि गंगा को स्वच्छ निर्मल और अविरल बनाने को लेकर लंबे समय से काम चल रहा है। हालांकि आउटपुट बहुत कम है। इसके पीछे यह भी कारण है कि कई अधिकारी काम नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा ऐसे लोग उन्हें बता दें वे खुद ही उन्हें नमामि गंगे प्रोजेक्ट से हटा देंगे। या किसी तरह की दिक्कत है तो भी बताएं।
समाज सेवी संस्थाओं द्वारा गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों की शिकायत पर उन्होंने कहा कि गंगा को साफ करना कोई काम नहीं है। यह हमारी परंपरा है जिसे हमें जिंदा रखना है। इस दौरान सिद्धनाथ तिवारी, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, श्री कृष्ण दीक्षित बड़े जी, राकेश शर्मा, सुबोध पांडेय, विनीत जायसवाल, संजीव गुप्ता, मनोज कुमार शुक्ला, शिवम द्विवेदी, निखिल मिश्रा, अनुभव पांडेय, अजय तिवारी, अनुज, प्रदीप द्विवेदी, सुधांशु मिश्रा आदि मौजूद रहे।
बछेन्द्री पाल ने बताया कि उन्होंने महिलाओं की टीम के साथ 1994 में हरिद्वार से कोलकाता (2500 किलोमीटर) का सफर नाव से तय किया था। उस समय भी उन्होंने कई जगहों पर रुककर सफाई की थी। तब लोग पूछते थे कि आपको सफाई करने का कितना पैसा मिलता है। करीब 24 साल बाद मिशन गंगे को लेकर फिर से निकली हूं। अब यह फर्क देखने को मिला कि जहां सफाई करती हूं और भी लोग साथ आ जाते हैं। यही जागरुकता सभी लोगों में लानी है। गंगा पवित्र है, हमारी माता है, जीवनदायिनी है जब तक लोग इस भावना से नहीं जुटेंगे, तब तक मिशन सफल नहीं होगा। बछेन्द्री पाल के साथ आए पनकी महंत जितेंद्र दास ने कहा कि जनता को जागरूक होने के साथ ही प्रदेश सरकार को भी शहर में विद्युत शव दाह गृह बढ़ाने होंगे। पंडित रामजी त्रिपाठी ने कहा कि काली नदी और रामगंगा नदी भी गंगा में मिलकर इसे और प्रदूषित कर रही हैं।
नमामि गंगे प्रोजेक्ट से जुड़े लोगोें को कोई दिक्कत तो बताएं
अमर उजाला कार्यालय आए उत्तर प्रदेश सरकार के सलाहकार आदित्य विद्या सागर ने कहा कि गंगा को स्वच्छ निर्मल और अविरल बनाने को लेकर लंबे समय से काम चल रहा है। हालांकि आउटपुट बहुत कम है। इसके पीछे यह भी कारण है कि कई अधिकारी काम नहीं करना चाहते हैं। उन्होंने कहा ऐसे लोग उन्हें बता दें वे खुद ही उन्हें नमामि गंगे प्रोजेक्ट से हटा देंगे। या किसी तरह की दिक्कत है तो भी बताएं।
समाज सेवी संस्थाओं द्वारा गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के अधिकारियों की शिकायत पर उन्होंने कहा कि गंगा को साफ करना कोई काम नहीं है। यह हमारी परंपरा है जिसे हमें जिंदा रखना है। इस दौरान सिद्धनाथ तिवारी, प्रमोद कुमार श्रीवास्तव, श्री कृष्ण दीक्षित बड़े जी, राकेश शर्मा, सुबोध पांडेय, विनीत जायसवाल, संजीव गुप्ता, मनोज कुमार शुक्ला, शिवम द्विवेदी, निखिल मिश्रा, अनुभव पांडेय, अजय तिवारी, अनुज, प्रदीप द्विवेदी, सुधांशु मिश्रा आदि मौजूद रहे।
बछेन्द्री पाल
कानपुर के सोनेलाल पटेल सीनियर सेकेंड्री स्कूल जूही - हमीरपुर रोडमें मंगलवार को पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने बच्चों को गंगा स्वच्छता अभियान को आगे बढ़ाने पर जोर दिया। यहां बच्चों और शिक्षकों ने पर्वतारोही और साथ आई टीम का माला पहनाकर स्वागत किया। यहां अंधविश्वास पर सोच बदलने के लिए प्रेरित किया गया।
पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने कहा कि गंगा को मैली करना अपराध की श्रेणी में आता है। जब एक बच्चा अपने घर की सोच बदलता है तो समाज जागरूक होता है, जिससे देश विकसित होता है। बच्चें अंधविश्वास को खत्म करने के लिए घरवालों की सोच बदले, तो गंगामैया अभियान सफल हो जाएगा। हर बच्चे को लीडरशिप की शपथ लेनी होगी। हमने तो ले ली और गंगा स्वच्छता का अभियान भी चल पड़ा है। लेकिन इस आगे आप ही लोग लेकर जाओगे और गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाओगे। लेकिन यह तभी संभव है जब हम इस आस्था को साथ अंदर से महसूस करें। इस दौरान बछेंद्री पाल ने गंगा स्वच्छता का एक शपथ पत्र पढ़कर छात्र-छात्राओं को सुनाकर जोश भरा।
पर्वतारोही बछेंद्री पाल ने कहा कि गंगा को मैली करना अपराध की श्रेणी में आता है। जब एक बच्चा अपने घर की सोच बदलता है तो समाज जागरूक होता है, जिससे देश विकसित होता है। बच्चें अंधविश्वास को खत्म करने के लिए घरवालों की सोच बदले, तो गंगामैया अभियान सफल हो जाएगा। हर बच्चे को लीडरशिप की शपथ लेनी होगी। हमने तो ले ली और गंगा स्वच्छता का अभियान भी चल पड़ा है। लेकिन इस आगे आप ही लोग लेकर जाओगे और गंगा को स्वच्छ और निर्मल बनाओगे। लेकिन यह तभी संभव है जब हम इस आस्था को साथ अंदर से महसूस करें। इस दौरान बछेंद्री पाल ने गंगा स्वच्छता का एक शपथ पत्र पढ़कर छात्र-छात्राओं को सुनाकर जोश भरा।