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दरिंदगी की हदें पार: दरिंदों को फांसी पर लटकाते तो मिलती कलेजे को ठंडक, जैसे बेटी संग हैवानियत की; कम से कम...
Sun, 17 Dec 2023 01:46 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात
अमर उजाला नेटवर्क, कानपुर देहात
Published by: शाहरुख खान
Updated Sun, 17 Dec 2023 01:46 PM IST
सार
कानपुर देहात के घाटमपुर में संतान की चाहत में मासूम की हत्या कर कलेजा खाने वाले दंपती समेत चार को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। 14 नवंबर 2020 को दीपावली की रात वारदात को अंजाम दिया गया था। दिवाली की रात पटाखों के शोर में बच्ची की चीखें दब गईं थीं।
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kanpur dehat news
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कानपुर देहात के घाटमपुर के एक गांव में 14 नवंबर 2020 को दीपावली की रात सात साल की मासूम बच्ची की हत्या कर उसका कलेजा खाने के मामले में चार दोषियों को सजा सुना दी गई है। तीन साल तक चली सुनवाई के बाद शनिवार को अपर जिला जज 13 पॉक्सो एक्ट की अदालत ने आरोपी दंपती परशुराम व सुनैना को आजीवन कारावास और 20-20 हजार अर्थदंड की सजा सुनाई है।
वहीं दंपती के भतीजे अंकुल और उसके साथी वीरेन को पूरे जीवनकाल का कारावास और 45-45 हजार अर्थदंड का लगाया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता राम रक्षित शर्मा, प्रदीप पांडेय प्रथम व अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसकी सात वर्षीय पुत्री 14 नवंबर 2020 को घर के बाहर खेलते समय गायब हो गई थी।
अगले दिन उसका क्षत-विक्षत शव गांव के बाहर खेत में मिला था। पुलिस ने पिता की तहरीर पर गांव के अंकुल, वंशलाल, कमलराम, बाबूराम और सुरेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला था कि संतान की चाहत में एक तांत्रिक के कहने पर दंपती परशुराम व सुनैना ने बच्ची का कलेजा खाया था।
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मासूम की हत्या के मामले में शनिवार दोपहर 12 बजे से सुनवाई शुरू हुई। डेढ़ घंटे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की एडीजे-13 बकार शमीम रिजवी ने दलील सुनी। इस समय तक दोषियों के चेहरे पर किए का पछतावा नहीं था।
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वहीं दंपती के भतीजे अंकुल और उसके साथी वीरेन को पूरे जीवनकाल का कारावास और 45-45 हजार अर्थदंड का लगाया है। सहायक शासकीय अधिवक्ता राम रक्षित शर्मा, प्रदीप पांडेय प्रथम व अजय कुमार त्रिपाठी ने बताया कि एक गांव निवासी एक व्यक्ति ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि उसकी सात वर्षीय पुत्री 14 नवंबर 2020 को घर के बाहर खेलते समय गायब हो गई थी।
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अगले दिन उसका क्षत-विक्षत शव गांव के बाहर खेत में मिला था। पुलिस ने पिता की तहरीर पर गांव के अंकुल, वंशलाल, कमलराम, बाबूराम और सुरेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू की थी। विवेचना के दौरान पुलिस को पता चला था कि संतान की चाहत में एक तांत्रिक के कहने पर दंपती परशुराम व सुनैना ने बच्ची का कलेजा खाया था।
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मासूम की हत्या के मामले में शनिवार दोपहर 12 बजे से सुनवाई शुरू हुई। डेढ़ घंटे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की एडीजे-13 बकार शमीम रिजवी ने दलील सुनी। इस समय तक दोषियों के चेहरे पर किए का पछतावा नहीं था।
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दोपहर साढ़े तीन बजे जैसे ही फैसला सुनाया गया, तो सुनैना, परशुराम, अंकुल व उसका साथी वीरेन फफक कर रोने लगे। वहीं मृतका की मां व पिता ने कहा कि दरिंदों को फांसी पर लटकाते तो कलेजे को ठंडक मिलती। कहा कि जिस तरह उनकी बेटी की साथ दरिंदगी की गई, एसके लिए फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए।
फांसी होती तो कलेजे को ठंडक मिलती: माता-पिता
मासूम की हत्या के मामले में शनिवार दोपहर 12 बजे से सुनवाई शुरू हुई। डेढ़ घंटे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की एडीजे-13 बकार शमीम रिजवी ने दलील सुनी। इस समय तक दोषियों के चेहरे पर किए का पछतावा नहीं था। दोपहर साढ़े तीन बजे जैसे ही फैसला सुनाया गया, तो सुनैना, परशुराम, अंकुल व उसका साथी वीरेन फफक कर रोने लगे। वहीं मृतका की मां व पिता ने कहा कि दरिंदों को फांसी पर लटकाते तो कलेजे को ठंडक मिलती। कहा कि जिस तरह उनकी बेटी की साथ दरिंदगी की गई, इसके लिए फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए।
मासूम की हत्या के मामले में शनिवार दोपहर 12 बजे से सुनवाई शुरू हुई। डेढ़ घंटे दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की एडीजे-13 बकार शमीम रिजवी ने दलील सुनी। इस समय तक दोषियों के चेहरे पर किए का पछतावा नहीं था। दोपहर साढ़े तीन बजे जैसे ही फैसला सुनाया गया, तो सुनैना, परशुराम, अंकुल व उसका साथी वीरेन फफक कर रोने लगे। वहीं मृतका की मां व पिता ने कहा कि दरिंदों को फांसी पर लटकाते तो कलेजे को ठंडक मिलती। कहा कि जिस तरह उनकी बेटी की साथ दरिंदगी की गई, इसके लिए फांसी से कम सजा नहीं होनी चाहिए।
पीड़ित के माता-पिता ने कहा कि गांव में हुए एक विवाद में अंकुल ने उसके परिवार को धमकी दी थी। इसके बाद ही उनकी बेटी के साथ ऐसी घटना घटित हुई। दिवाली का त्योहार था और पूरा परिवार तैयारी में लगा था। इसी खुशी के बीच अचानक से मातम छा गया। तब से लेकर आज तक हमारे कलेजे को ठंडक नहीं मिली। हम दोनों अपने आंखों के सामने दरिंदों को उसी तरह तड़पना देखना चाहते थे, जिस तरह हमारी बेटी तड़पी।
कोर्ट के बाहर टकटकी लगाए थे पीड़ित माता-पिता
पीड़ित माता-पिता बस से माती कचहरी दोपहर 11 बजे आ पहुंचे थे। उन्हें उनके वकील ने बताया था कि दोपहर 12 बजे बेटी को न्याय मिलेगा। कोर्ट नंबर-13 के बाहर दोनों पति-पत्नी अपनी दो साल की मासूम बेटी को गोद में लिए बैठे रहे। वह बार-बार चल रही सुनवाई पर टकटकी लगाए थे। उन्हें इंतजार था दरिंदों को सजाए सुनाए जाने का।
पीड़ित माता-पिता बस से माती कचहरी दोपहर 11 बजे आ पहुंचे थे। उन्हें उनके वकील ने बताया था कि दोपहर 12 बजे बेटी को न्याय मिलेगा। कोर्ट नंबर-13 के बाहर दोनों पति-पत्नी अपनी दो साल की मासूम बेटी को गोद में लिए बैठे रहे। वह बार-बार चल रही सुनवाई पर टकटकी लगाए थे। उन्हें इंतजार था दरिंदों को सजाए सुनाए जाने का।
फैसला आने के बाद बिलख पड़े पीड़ित
दोपहर तीन बजे के करीब कोर्ट से एक वकील ने आकर पीड़ित माता, पिता को बताया कि उनकी बेटी को न्याय मिल गया। चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह सुनते ही कोर्ट के बाहर एक हाल में खड़े पति-पत्नी बिलखने लगे। उनके साथ मौजूद परिजन भी रोते बिलखते नजर आए। मृतका की मां ने ईश्वर को याद करते हुए कहा कि हे भगवान आज तू ने मेरी सुन ली..।
दोपहर तीन बजे के करीब कोर्ट से एक वकील ने आकर पीड़ित माता, पिता को बताया कि उनकी बेटी को न्याय मिल गया। चारों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। यह सुनते ही कोर्ट के बाहर एक हाल में खड़े पति-पत्नी बिलखने लगे। उनके साथ मौजूद परिजन भी रोते बिलखते नजर आए। मृतका की मां ने ईश्वर को याद करते हुए कहा कि हे भगवान आज तू ने मेरी सुन ली..।
नजर नहीं आए दोषियों के घर वाले
अदालत परिसर में दोषियों के परिजन नहीं थे। इसको लेकर चर्चा रही कि चारों ने ऐसी दरिंदगी दिखाई कि आज उनके साथ उनके तक नहीं है। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रही। वहीं जिसे भी पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी हुई वह यही कहता रहा कि चारों को कम से फांसी होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट के फैसले से सभी खुश दिखे।
अदालत परिसर में दोषियों के परिजन नहीं थे। इसको लेकर चर्चा रही कि चारों ने ऐसी दरिंदगी दिखाई कि आज उनके साथ उनके तक नहीं है। इसको लेकर तरह-तरह की चर्चाएं रही। वहीं जिसे भी पूरे घटनाक्रम के बारे में जानकारी हुई वह यही कहता रहा कि चारों को कम से फांसी होनी चाहिए। हालांकि कोर्ट के फैसले से सभी खुश दिखे।
कोर्ट के बाहर तैनात रही पुलिस
सजा सुनाए जाने के बाद परशुराम, उसकी पत्नी सुनैना, भतीजे अंकुल व वीरेन को जेल ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कोर्ट परिसर के बाहर आठ से 10 सिपाही सुरक्षा में तैनात रहे। सजा सुनाए जाने के बाद सभी कार्यवाही पूरी होने के बाद शाम चार बजे के करीब उन्हें कोर्ट से बाहर निकाल कर कड़ी सुरक्षा में जेल भेजा गया। इस दौरान सुनैना दहाड़े मार - मार कर रोती नजर आई।
सजा सुनाए जाने के बाद परशुराम, उसकी पत्नी सुनैना, भतीजे अंकुल व वीरेन को जेल ले जाने के लिए कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। कोर्ट परिसर के बाहर आठ से 10 सिपाही सुरक्षा में तैनात रहे। सजा सुनाए जाने के बाद सभी कार्यवाही पूरी होने के बाद शाम चार बजे के करीब उन्हें कोर्ट से बाहर निकाल कर कड़ी सुरक्षा में जेल भेजा गया। इस दौरान सुनैना दहाड़े मार - मार कर रोती नजर आई।
10 गवाह और 21 साक्ष्य बने सजा का आधार
विशेष लोक अभियोजक राम रक्षित शर्मा ने बताया कि मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 10 गवाहों को पेश किया गया। इन्होंने घटना से संबंधित 21 प्रलेखीय साक्ष्यों को अदालत में साबित किया, जो सजा का मुख्य आधार बने।
विशेष लोक अभियोजक राम रक्षित शर्मा ने बताया कि मामले में सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 10 गवाहों को पेश किया गया। इन्होंने घटना से संबंधित 21 प्रलेखीय साक्ष्यों को अदालत में साबित किया, जो सजा का मुख्य आधार बने।
मासूम बच्ची की सहेली की गवाही रही अहम
राम रक्षित शर्मा ने बताया कि अभियोजन की ओर से कराई गई बाल साक्षी की गवाही बेहद अहम रही। बाल साक्षी ने अदालत में अपने बयानों में बताया था कि घटना वाले दिन वह अपनी सहेली (जिस बच्ची की हत्या हुई) के साथ खेल रही थी, उसी दौरान अंकुल बच्ची को अपने साथ ले गया था।वहीं मामले में एक अन्य गवाह ने भी अदालत में अपने दिए बयानों में मृतक मासूम को घटना वाली रात अंकुल और वीरेन के साथ देखने की बात कही थी।
राम रक्षित शर्मा ने बताया कि अभियोजन की ओर से कराई गई बाल साक्षी की गवाही बेहद अहम रही। बाल साक्षी ने अदालत में अपने बयानों में बताया था कि घटना वाले दिन वह अपनी सहेली (जिस बच्ची की हत्या हुई) के साथ खेल रही थी, उसी दौरान अंकुल बच्ची को अपने साथ ले गया था।वहीं मामले में एक अन्य गवाह ने भी अदालत में अपने दिए बयानों में मृतक मासूम को घटना वाली रात अंकुल और वीरेन के साथ देखने की बात कही थी।
अभियोजन ने मांगी थी फांसी
विशेष लोक अभियोजक राम रक्षित शर्मा, प्रदीप पांडे व अजय कुमार त्रिपाठी ने सजा पर बहस के दौरान चारों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। तर्क रखा था कि अंकुल व वीरन सात साल की बच्ची को साथ ले गए, सामूहिक दुष्कर्म किया, हत्या कर शव को खेत में फेंक दिया, जबकि परशुराम व सुनैना ने मृतका के कलेजे की पूजा कर उसे खाया। समाज विरोधी इस अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी में रखकर अभियुक्तों को फांसी दी जानी चाहिए।
विशेष लोक अभियोजक राम रक्षित शर्मा, प्रदीप पांडे व अजय कुमार त्रिपाठी ने सजा पर बहस के दौरान चारों को फांसी की सजा देने की मांग की थी। तर्क रखा था कि अंकुल व वीरन सात साल की बच्ची को साथ ले गए, सामूहिक दुष्कर्म किया, हत्या कर शव को खेत में फेंक दिया, जबकि परशुराम व सुनैना ने मृतका के कलेजे की पूजा कर उसे खाया। समाज विरोधी इस अपराध को विरल से विरलतम श्रेणी में रखकर अभियुक्तों को फांसी दी जानी चाहिए।
उम्रकैद व जीवलकाल तक कारावास में अंतर
आजीवन कारावास में दोषी द्वारा 20 साल की सजा काटने के बाद उसकी वृद्धावस्था व अच्छे चाल-चलन के आधार पर सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल या राष्ट्रपति की स्वीकृति पर रिहाई दी जा सकती है। अगर कोर्ट ने जीवनकाल के कारावास की सजा सुनाई है तो दोषी को शासन से यह लाभ नहीं मिल सकता। उसे आखिरी सांस तक जेल में ही रहना होगा। - राजेश्वर तिवारी, पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता
आजीवन कारावास में दोषी द्वारा 20 साल की सजा काटने के बाद उसकी वृद्धावस्था व अच्छे चाल-चलन के आधार पर सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल या राष्ट्रपति की स्वीकृति पर रिहाई दी जा सकती है। अगर कोर्ट ने जीवनकाल के कारावास की सजा सुनाई है तो दोषी को शासन से यह लाभ नहीं मिल सकता। उसे आखिरी सांस तक जेल में ही रहना होगा। - राजेश्वर तिवारी, पूर्व सहायक शासकीय अधिवक्ता