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Monkeypox: मंकी पॉक्स प्रभावित देशों से आए लोगों की जांच होगी, नजरअंदाज न करें इन संकेतों को

Wed, 27 Jul 2022 10:58 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Wed, 27 Jul 2022 10:58 AM IST
सार

शासन की गाइडलाइन के साथ रोगियों के सैंपल के साथ भरे जाने वाले प्रपत्र का नमूना भी जारी किया गया है। सैंपल की जांच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में की जाएगी। इसके साथ ही होम आइसोलेशन में रहने वाले संदिग्ध और संक्रमित व्यक्तियों के लिए भी प्रावधान गाइडलाइन बताए गए हैं।

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Monkeypox: People coming from Monkey Pox affected countries will be investigated
मंकीपॉक्स संक्रमण - फोटो : istock

विस्तार

मंकी पॉक्स प्रभावित देशों से लौट रहे लोगों की जांच की जाएगी। अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति होगा तो उसकी सैंपलिंग करके इलाज किया जाएगा। इसके अलावा अस्पतालों और क्लीनिकों की ओपीडी में आने वाले रोगियों को लेकर सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। शासन की गाइडलाइन के साथ रोगियों के सैंपल के साथ भरे जाने वाले प्रपत्र का नमूना भी जारी किया गया है।

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सैंपल की जांच नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में की जाएगी। इसके साथ ही होम आइसोलेशन में रहने वाले संदिग्ध और संक्रमित व्यक्तियों के लिए भी प्रावधान गाइडलाइन बताए गए हैं। रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ के लिए भी गाइडलाइन जारी की गई।
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मंगलवार को जारी मंकी पॉक्स की गाइडलाइन स्वास्थ्य विभाग ने सभी सीएचसी, पीएचसी और अस्पतालों तथा हेल्क वर्करों को पहुंचा दी। इस गाइडलाइन में संक्रमण फैलाने के माध्यम भी बताए गए। कहा गया कि संक्रमण मानव से मानव में तो फैलता है। इसके अलावा छोटे स्तनधारी जैसे चूहे, गिलहरी, बंदर के काटने और खरोंचने से भी संक्रमण हो सकता है।

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झाड़ियों में पाए जाने वाले जीव अगर संक्रमित हैं, तो उनके मांस से भी मंकी पॉक्स हो सकता है। डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टाफ से कहा गया है कि पीपीई किट पहनकर रोगी का इलाज करें। इसके साथ ही रोगियों की कॉंटैक्ट ट्रेसिंग करके संक्रमण के दायरे की पहचान कर लें।

त्वचा रोग क्लीनिक, एसटीडी क्लीनिक, मेडिसिन, बालरोग की ओपीडी का सर्वेलांस बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। यह रोग बच्चों में अधिक पाया जाता है। बच्चों में मृत्यु दर भी अधिक होती। वर्तमान में इस रोग की मृत्यु दर तीन से छह प्रतिशत है। गाइड लाइन में रोग के लक्षणों के संबंध में भी बताया गया है।

छोटे बच्चों को डे केयर नर्सरी और भीड़ वाले स्थानों पर जाने से रोक ने के लिए कहा गया है। जो लोग संदिग्ध हैं लेकिन उनमें कोई लक्षण नहीं है, उन्हें हिदायत दी गई है कि निगरानी के दौरान रक्तदान न करें। संदिग्धों की निगरानी 21 दिनों तक किए जाने की अवधि तय की गई है।

लक्षण
- तेज बुखार 
- मांसपेशियों में दर्द, जकड़न, कमजोरी महसूस होती है
- लिम्फ नोड्स (लसीका ग्रंथियों) में सूजन आने लगती है
- संक्रमण के पांच दिनों के अंदर  चेचक जैसे निशान आ जाते हैं
- रोगी को ठंड लगती है

जटिलताएं
सेकेंडरी संक्रमण, निमोनिया, सेप्सिस, इंसेफ्लाइटिस, कार्निया का संक्रमण

ऐसे फैलता है
- संक्रमित के घावों को छू ले और हाथ साफ न करे
- संक्रमित के बिस्तर पर लेट जाए 
- संक्रमित से यौन संबंध बनाए
- झींक से निकले थूक कण शरीर पर पड़ें और साफ न करें

बचाव
- संक्रमित व्यक्ति को अलग कमरे में रखें
- संक्रमित के संपर्क में आने पर हाथ अच्छी तरह साबुन से धोएं
- संक्रमित की इस्तेमाल की हुई सामग्री को न छुएं
- मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग के प्रावधान का पालन करें 
- भीड़भाड़ वाले स्थानों पर बेवजह न जाएं
- तेज बुखार, चकत्ते आने पर तुरंत अस्पताल जाएं।   
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