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एक शिलान्यास पर फूटे दो नारियल
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Mon, 12 Jan 2015 03:08 AM IST
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निर्माण के शिलान्यास को लेकर रविवार को क्षेत्रीय पार्षद पति जेपी पाल और विधायक सत्यदेव पचौरी में झड़प हो गई। जनता के सामने दोनों नाला निर्माण कराने में अपना-अपना दावा पेश कर रहे थे।
दोनों के समर्थकों ने शिलान्यास करने को लेकर जमकर हंगामा किया। पार्षद पति और विधायक के बीच तू-तू.. मैं-मैं होता देख दोनों के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। अंत में विधायक ने पहले शिलान्यास कर दिया और बाद में पार्षद पति ने भी नारियल फोड़ा।
हालांकि लोगों ने कहा कि जनता ने पार्षद की पत्नी की वोट देकर जिताया है तो राजनीति और विकास कार्य में उन्हीं को सामने आना चाहिए। वोट पत्नी को दें और शिलान्यास पति करे यह बात ठीक नहीं।
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वार्ड 52 के नौरैय्या खेड़ा में प्राइमरी पाठशाला से सरोज टेक्सटाइल्स तक 203 मीटर लंबा नाला निर्माण के लिए अवस्थापना निधि 24 लाख 32 हजार रुपए रुपए स्वीकृत हुए हैं। रविवार को नाला निर्माण कार्य का शिलान्यास होना था।
शिलान्यास करने के लिए गोविंद नगर विधायक सत्यदेव पचौरी और क्षेत्रीय पार्षद के पति जेपी पाल अपने-अपने समर्थकों संग पहुंच गए। दोनों नाला निर्माण कार्य की स्वीकृति के लिए अपना-अपना दावा पेश करते हुए शिलान्यास की बात करने लगे।
जेपी पाल दावा करते हुए कहने लगे कि नाला निर्माण के लिए मैंने संघर्ष करके अवस्थापना निधि से बजट पास कराया है। वहीं विधायक ने भी दावा ठोकते हुए कहा कि नाले के लिए विधानसभा सत्र में आवाज उठाई थी। इसके बाद से नाला निर्माण का बजट स्वीकृत हुआ है।
दोनों ही शिलान्यास करने पर अड़ गए। दोनों के समर्थकों में धक्का-मुक्की होने लगी। विवाद बढ़ता देख क्षेत्रीय जनता ने दोनों को माला पहनाकर शांत कराने का प्रयास किया लेकिन बात प्रतिष्ठा की फंस गई थी।
पार्षद ने कहा मैं इलाके के किसी बुजुर्ग से शिलान्यास करा दूंगा, लेकिन विधायक को नहीं करने दूंगा। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद विधायक ने अपने समर्थकों संग शिलान्यास कर दिया। बाद में पार्षद ने भी समर्थकों संग नारियल फोड़ दिया।
शिलान्यास के विवाद से कांग्रेस और भाजपा के बीच एक बार फिर राजनीति गर्म हो गई क्योंकि पार्षद के पति कांग्रेस विधायक के समर्थक हैं।
नाला निर्माण के लिए विधानसभा सत्र में प्रश्न उठाया था। अथक प्रयासों के बाद ही नाला निर्माण को स्वीकृति मिली है। काम को स्वीकृत कराने के लिए फाइल में मेरी चिट्ठी भी लगी है। इसके अलावा पार्षद के पति को तो शिलान्यास करने का भी हक नहीं है। पार्षद तो महिला हैं तो फिर उनके पति कैसे जनप्रतिनिधि बन गए।
- सत्यदेव पचौरी, गोविंद नगर विधायक
पिछले एक साल से नाल निर्माण की फाइल स्वीकृत कराने के लिये प्रयासरत था। अब काम स्वीकृत हो गया तो विधायक जी श्रेय लेना चाहते हैं। इसी बात का विरोध किया गया था।
जेपी पाल, पार्षद पति (वार्ड-52)
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दोनों के समर्थकों ने शिलान्यास करने को लेकर जमकर हंगामा किया। पार्षद पति और विधायक के बीच तू-तू.. मैं-मैं होता देख दोनों के समर्थकों के बीच धक्का-मुक्की शुरू हो गई। अंत में विधायक ने पहले शिलान्यास कर दिया और बाद में पार्षद पति ने भी नारियल फोड़ा।
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हालांकि लोगों ने कहा कि जनता ने पार्षद की पत्नी की वोट देकर जिताया है तो राजनीति और विकास कार्य में उन्हीं को सामने आना चाहिए। वोट पत्नी को दें और शिलान्यास पति करे यह बात ठीक नहीं।
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वार्ड 52 के नौरैय्या खेड़ा में प्राइमरी पाठशाला से सरोज टेक्सटाइल्स तक 203 मीटर लंबा नाला निर्माण के लिए अवस्थापना निधि 24 लाख 32 हजार रुपए रुपए स्वीकृत हुए हैं। रविवार को नाला निर्माण कार्य का शिलान्यास होना था।
शिलान्यास करने के लिए गोविंद नगर विधायक सत्यदेव पचौरी और क्षेत्रीय पार्षद के पति जेपी पाल अपने-अपने समर्थकों संग पहुंच गए। दोनों नाला निर्माण कार्य की स्वीकृति के लिए अपना-अपना दावा पेश करते हुए शिलान्यास की बात करने लगे।
जेपी पाल दावा करते हुए कहने लगे कि नाला निर्माण के लिए मैंने संघर्ष करके अवस्थापना निधि से बजट पास कराया है। वहीं विधायक ने भी दावा ठोकते हुए कहा कि नाले के लिए विधानसभा सत्र में आवाज उठाई थी। इसके बाद से नाला निर्माण का बजट स्वीकृत हुआ है।
दोनों ही शिलान्यास करने पर अड़ गए। दोनों के समर्थकों में धक्का-मुक्की होने लगी। विवाद बढ़ता देख क्षेत्रीय जनता ने दोनों को माला पहनाकर शांत कराने का प्रयास किया लेकिन बात प्रतिष्ठा की फंस गई थी।
पार्षद ने कहा मैं इलाके के किसी बुजुर्ग से शिलान्यास करा दूंगा, लेकिन विधायक को नहीं करने दूंगा। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद विधायक ने अपने समर्थकों संग शिलान्यास कर दिया। बाद में पार्षद ने भी समर्थकों संग नारियल फोड़ दिया।
शिलान्यास के विवाद से कांग्रेस और भाजपा के बीच एक बार फिर राजनीति गर्म हो गई क्योंकि पार्षद के पति कांग्रेस विधायक के समर्थक हैं।
नाला निर्माण के लिए विधानसभा सत्र में प्रश्न उठाया था। अथक प्रयासों के बाद ही नाला निर्माण को स्वीकृति मिली है। काम को स्वीकृत कराने के लिए फाइल में मेरी चिट्ठी भी लगी है। इसके अलावा पार्षद के पति को तो शिलान्यास करने का भी हक नहीं है। पार्षद तो महिला हैं तो फिर उनके पति कैसे जनप्रतिनिधि बन गए।
- सत्यदेव पचौरी, गोविंद नगर विधायक
पिछले एक साल से नाल निर्माण की फाइल स्वीकृत कराने के लिये प्रयासरत था। अब काम स्वीकृत हो गया तो विधायक जी श्रेय लेना चाहते हैं। इसी बात का विरोध किया गया था।
जेपी पाल, पार्षद पति (वार्ड-52)