माफिया के मददगार बने खनन अफसर: तहसील की रिपोर्ट पर नहीं की कार्रवाई, आईजीआरएस पोर्टल पर भी लगा दी झूठी रिपोर्ट
मगर खनन अधिकारी और कर्मचारी इस रिपोर्ट को दबा गए। तहसीलदार, एसडीएम, एडीएम में से किसी ने भी पलटकर खनन अधिकारी से नहीं पूछा कि क्या कार्रवाई हुई? नतीजा ये हुआ कि खनन माफिया के हौसले बुलंद रहे और पीड़ित दर-दर भटकता रहा। बताते हैं कि ऐसे मामलों में कार्रवाई न करने के एवज में खनन अधिकारी के कार्यालय को हर महीने मोटी रकम पहुंचती है।
खनन माफिया की सूची तक नहीं बनी
हैरत की बात देखिए कि खनन अधिकारी के कार्यालय में खनन माफिया की कोई सूची तक नहीं। यानी अधिकारियों और कर्मचारियों ने कभी खनन माफिया चिह्नित ही नहीं किए। जबकि खनन इंस्पेक्टरों ने अलग-अलग व्यक्तियों के डंपर, ट्रैैक्टर और जेसीबी को कई बार पकड़ा है। मगर जुर्माना और रिश्वत के दम पर हर बार छूट जाते हैं। बार बार पकड़े जाने वालों के वाहनों की जब्ती नहीं हुई।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए इस पर नजर है। देख रहे हैं कि अवैध खनन रोक न पाने में किसकी भूमिका है। इस पर जल्द ही किसी नतीजे पर पहुंचेंगे।
विशाख जी. डीएम