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बड़ी लापरवाही: मेट्रो ने 1408 पेड़ काटने के बदले दिए थे 4.5 करोड़ रुपये, वन विभाग ने एक पौधा भी नहीं लगाया

Thu, 11 Jul 2024 11:44 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Thu, 11 Jul 2024 11:44 AM IST
सार

Kanpur News: यूपीएमआरसी ने वर्ष 2019 से आईआईटी के सामने से ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया है। 1408 विशालकाय हरे पेड़ मेट्रो के निर्माण में बाधा बन रहे थे। वन विभाग की सशर्त अनुमति के बाद यूपीएमआरसी ने इन हरे पेड़ों को काट दिया था।

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Metro gave Rs 4.5 crore for cutting 1408 trees, forest department did not plant even a single sapling
कानपुर मेट्रो (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कानपुर में पौधरोपण कराने और हरियाली बढ़ाने के जिम्मेदार वन विभाग की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मेट्रो निर्माण के चलते उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कारपोरेशन (यूपीएमआरसी) 2019 से अब तक काटे गए 1408 पेड़ों के बदले वन विभाग को साढ़े चार करोड़ रुपये दे चुका है, लेकिन पांच साल बाद भी वन विभाग न तो जगह चिह्नित कर पाया है और न ही एक पौधा लगा पाया है।

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करीब ढाई साल से आईआईटी से मोतीझील के बीच मेट्रो भी दौड़ रही है। हरियाली बढ़ाने के लिए 20 जुलाई को जिले में 42.87 लाख पौधे लगाए जाएंगे। यूपीएमआरसी ने वर्ष 2019 से आईआईटी के सामने से ट्रैक बिछाने का काम शुरू किया है। 1408 विशालकाय हरे पेड़ मेट्रो के निर्माण में बाधा बन रहे थे। वन विभाग की सशर्त अनुमति के बाद यूपीएमआरसी ने इन हरे पेड़ों को काट दिया था।
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वन विभाग ने शर्त रखी थी कि काटे गए इन 1408 पेड़ों के बदले यूपीएमआरसी 10 गुना यानी 14080 पौधे लगाएगा और पांच साल तक अनुरक्षण का जिम्मा उठाए या क्षतिपूरक वृक्षारोपण मद में धनराशि दे। इसके बाद यूपीएमआरसी ने अलग-अलग चरणों में करीब 4.5 करोड़ की धनराशि वन विभाग के पास जमा करा दी, लेकिन वन विभाग ने काटे गए पेड़ों के बदले पौधरोपण नहीं कराया।

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पनकी की ग्रीनबेल्ट में लगने को आए पौधे रखे-रखे सूख गए
पनकी औद्योगिक क्षेत्र में एलएमएल चौराहे से शुरू होने वाली ग्रीनबेल्ट में लगाए जाने के लिए एक साल पहले आए पौधे रखे-रखे सूख गए। नगर निगम ने ठेका देने के बाद दोबारा इस तरफ देखा तक नहीं। यह ग्रीनबेल्ट करीब चार किलोमीटर लंबी है। हर साल इस ग्रीनबेल्ट में पौधे रोपे जाते हैं। इसके लिए नगर निगम की ओर से ठेका दिया गया है। साथ ही माली की व्यवस्था भी की गई है। बुधवार को मौके पर जाकर देखा गया, तो पौधे काली पॉलिथीन में रखे-रखे सूख गए थे।

केमिकल युक्त पानी आता है
माली कंचन से जब पौधे सूखने के संबंध में पूछा गया, तो उसने बताया कि यह औद्योगिक क्षेत्र है। इसलिए बोरिंग से केमिकलयुक्त पानी आता है, जिससे पौधे सूख जाते हैं। उसने बताया कि इस साल भी यहां बीस हजार पौधे रोपने हैं। तीन दिन पहले भी एक ट्रक से यहां पौधे भेजे गए हैं। केयरटेकर शिवांशू तिवारी ने बताया कि जो पौधे गर्मी में आए थे, वो सूख गए। उन्हें हटा दिया जाएगा।

यह है नियम
एक हरे पेड़ को काटने पर उसके बदले दस पौधे लगाने होते हैं और पांच साल तक उनके संरक्षण की जिम्मेदारी उठानी होती है।

वन विभाग ने इस वित्तीय वर्ष में कार्ययोजना का प्रस्ताव बनाया है, जिससे पौधे लगाए और बचाए जाएंगे। मेट्रो से 1408 पेड़ों को काटने की क्षतिपूर्ति में मिले 4.5 करोड़ रुपये का इस्तेमाल पौधरोपण कराने और उनके संरक्षण के लिए सीमेंटेड ट्री गार्ड में किया जाएगा।  -अनिल कुमार द्विवेदी, प्रभारी डीएफओ

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