मेगा ब्लॉक लेकर मरम्मत: 74 ट्रेनें कैंसिल…150 प्रभावित, सिर्फ 12 अतिरिक्त बसों का सहारा, यात्री परेशान
Kanpur News: ब्रिटिश काल के रेल गंगा पुल पर गुरुवार सुबह आठ बजे से मेगा ब्लॉक लेकर एचबीम टाइप चैनल स्लीपर बदलने का काम शुरू हुआ। तय समय में कार्य को पूरा करने के लिए कर्मचारी व अधिकारी मिलाकर 250 लोगों को लगाया गया है।
विस्तार
गंगा रेलवे पुल की अप लाइन पर गुरुवार से 42 दिन का मेगा ब्लॉक लेकर मरम्मत कार्य शुरू हो गया है। इसके चलते करीब 150 ट्रेनों के संचालन पर असर पड़ा है। इनमें से कई ट्रेनें निरस्त कर दी गई हैं तो कई बदले मार्ग से चलेंगी। इनमें करीब 75 ट्रेनें कानपुर-लखनऊ रूट से जुड़ी हैं। मरम्मत की अवधि में कानपुर-लखनऊ के बीच रोजाना यात्रा करने वाले करीब 50 हजार यात्री प्रभावित होंगे। ट्रेनों का यात्री लोड बसों पर आ गया है। इसके चलते कानपुर-लखनऊ रूट पर 12 बसें बढ़ाई गई हैं। अब इस रूट पर कुल 162 बसें हो गई हैं। लखनऊ जाने वाले लगभग 50 हजार यात्री 162 बसों पर निर्भर हो गए हैं। हालांकि गुरुवार को गंगा मेला की वजह से लखनऊ जाने वाले यात्रियों की संख्या कम रही। शुक्रवार को यात्रियों को ज्यादा परेशानी होगी।
मेगा ब्लॉक से पहले
कानपुर-सेंट्रल से लखनऊ के लिए तीन इंटरसिटी और पांच मेमू संचालित हो रही थीं। मेगा ब्लॉक के दौरान तीनों इंटरसिटी व इतनी ही मेमू रद्द कर दी गईं। फिलहाल दो मेमू का संचालन किया जा रहा है। इससे रोजाना लखनऊ आवागमन करने वाले 35 से 50 हजार यात्रियों ने बसों की ओर रुख किया। पूर्व में लखनऊ रूट पर कानपुर मंडल से 150 बसें संचालित थीं। मेगा ब्लॉक को देखते हुए 12 और बढ़ा दी गईं। एक रोडवेज बस में करीब 40 से 50 सवारियां आती हैं तो इस हिसाब से बढ़ाई गई बसों की संख्या काफी कम है। प्रतिदिन करीब 6500 यात्री ही इन बसों से सफर कर सकेंगे। एक बस प्रतिदिन करीब चार फेरे लगा लेती है। इस हिसाब से देखें तो करीब 30 हजार यात्री प्रतिदिन लखनऊ आ-जा सकेंगे। अन्य यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ेगी।
मरम्मत में शामिल हैं 250 कर्मचारी-अधिकारी
ब्रिटिश काल के रेल गंगा पुल पर गुरुवार सुबह आठ बजे से मेगा ब्लॉक लेकर एचबीम टाइप चैनल स्लीपर बदलने का काम शुरू हुआ। तय समय में कार्य को पूरा करने के लिए कर्मचारी व अधिकारी मिलाकर 250 लोगों को लगाया गया है। लखनऊ मंडल के डीआरएम एसएम शर्मा ने पूजन कर कार्य का शुभारंभ किया। डीआरएम ने रेल अधिकारियों को सुरक्षा से जुड़े सीटी, झंडी, हूटर, लाल झंडे के अलावा मेडिकल व्यवस्था के इंतजाम निर्माण स्थल पर करने के निर्देश दिए। कार्य के दौरान डाउन लाइन की ट्रेनों के संचालन के दौरान दुर्घटना से बचने के लिए कानपुर छोर पर एक हूटर लगाया गया है। ट्रेन को अप लाइन से गुजारते समय एक कर्मचारी हूटर बजा देता है, जिससे कार्य कर रहे कर्मचारी समझ जाते हैं कि कोई ट्रेन अप लाइन से आ रही है। निर्माण के दौरान सीनियर डीईएन ऑपरेशन रजनीश श्रीवास्तव, सीडीडब्लू एम राकेश कुमार, वरिष्ठ मंडल समन्वयक अधिकारी विकास गोयल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
पहले दिन 50 एचबीम स्लीपर लगाए
गुरुवार सुबह कानपुर छोर से ट्रैक पर पड़ी गिट्टियों को हटाने व पुराने टर्फ, स्लीपर को हटाने का कार्य युद्धस्तर से शुरू कर दिया गया। शाम पांच बजे तक करीब 50 एचबीम स्लीपर डालने का काम किया गया। प्रत्येक 500 एमएम की दूरी पर एचबीम स्लीपर लगाए जाएंगे। कानपुर से शुक्लागंज की ओर काम हो रहा है। शाम करीब सवा पांच बजे के बाद मेगा ब्लॉक समाप्त हुआ। इसके बाद 05:40 बजे मालगाड़ी को डेड स्टॉप के साथ रवाना किया गया। इसके बाद निर्धारित ट्रेनें भी डेड स्टॉप से गुजारी गईं।
लखनऊ रूट की ये ट्रेनें हैं प्रभावित
मुंबई, पुणे व गोरखपुर रूट की 74 ट्रेनें प्रभावित हैं। इनमें नीलांचल व शताब्दी एक्सप्रेस जैसी प्रमुख ट्रेनें भी हैं। वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-लखनऊ इंटरसिटी, लखनऊ-कासगंज मेल व कानपुर सेंट्रल-लखनऊ मेमू समेत कई ट्रेनें निरस्त हैं। गोरखपुर-आनंदविहार, मऊ-आनंदविहार और दरभंगा-आनंदविहार लखनऊ से मुरादाबाद के रास्ते चल रही हैं। ट्रेन नंबर 11109 वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-लखनऊ इंटरसिटी 19 मार्च से 30 अप्रैल तक, 11110 लखनऊ वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी इंटरसिटी 20 मार्च से एक मई तक, 51813 झांसी-लखनऊ, 51814 लखनऊ-झांसी पैसेंजर, 55345 लखनऊ-कासगंज मेल रद्द हैं। ट्रेन संख्या 55346 कासगंज-लखनऊ पैसेंजर, 64203 लखनऊ-कानपुर सेंट्रल मेमू, 64204 कानपुर सेंट्रल-लखनऊ मेमू 20 मार्च से एक मई तक निरस्त हैं। इसके अलावा 12571 गोरखपुर-आनंदविहार, 12595 गोरखपुर-आनंदविहार, 22539 मऊ- आनंदविहार, 15557 दरभंगा-आनंदविहार, 15705 कटिहार-दिल्ली सहित अन्य ट्रेनें अब लखनऊ से मुरादाबाद के रास्ते चल रही हैं।
ये बोले यात्री
- अपनी ससुराल लखनऊ अक्सर आना-जाना होता है। ट्रेन से ही सफर करते थे, लेकिन जब सुबह स्टेशन पहुंचे तो पता चला कि मेमू निरस्त है। अब बस से जा रहे हैं। -रामजी, भन्नानापुरवा
- कंपनी के काम से अक्सर हफ्ते में दो से तीन बार लखनऊ जाना पड़ता है। पहले मेमू से चले जाते थे, लेकिन अब बस से ही जाना पड़ रहा है। किराया भी ज्यादा लग रहा है। -अंकित मिश्रा, ब्रह्मनगर
- घर जाने के लिए निकले थे। रेलवे स्टेशन पर ट्रेन नहीं मिली तो जानकारी की। इसके बाद झकरकटी आए और बस से लखनऊ के लिए निकलना पड़ा। -अमित कुमार, सीतापुर
गंगा मेला की वजह से लखनऊ रूट पर लोड नहीं रहा। हालांकि, उन्नाव डिपो की 12 बसें बढ़ाई गई हैं। अगर यात्रियों की भीड़ बढ़ती है, तो बसें भी बढ़ाई जाएंगी। कोई दिक्कत नहीं होने दी जाएगी। साथ ही दिल्ली-कानपुर रूट पर भी 22 बसें बढ़ाई गई हैं। -अनिल कुमार, आरएम, रोडवेज