{"_id":"572a57834f1c1b02395ccf54","slug":"medical-students-disappear-from-the-face-of-the-cbi","type":"story","status":"publish","title_hn":"सीबीआई के डर से मेडिकल स्टूडेंट गायब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सीबीआई के डर से मेडिकल स्टूडेंट गायब
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 05 May 2016 01:41 AM IST
विज्ञापन
व्यापम घोटाले के मोस्ट वांटेड रमेश को बुधवार को कोर्ट में पेश किया गया।
- फोटो : amarujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कानपुर। मध्य प्रदेश में हुए व्यापम घोटाले की जांच कर रही सीबीआई भोपाल के नोटिस देने के बाद जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज का एमबीबीएस फाइनल ईयर (2012 बैच) का स्टूडेंट अरविंद पुरी गायब हो गया है। दो अप्रैल को सीबीआई का नोटिस मिलने के बाद अरविंद हॉस्टल से गायब है। कॉलेज प्रशासन को उसके बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। अरविंद महोबा का रहने वाला है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि व्यापम घोटाले में गिरफ्त में आए पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष के पति रमेश शिवहरे के साथ अरविंद के संबंधों की भी जांच होगी। सीबीआई की भोपाल शाखा ने अरविंद को पूछताछ के लिए भोपाल आने के लिए दो अप्रैल को कॉलेज प्रशासन को नोटिस भेजा था। उसी दिन कॉलेज प्रशासन ने अरविंद को नोटिस रिसीव करा दिया था लेकिन अरविंद ने अब तक कॉलेज प्रशासन को जानकारी नहीं दी। इस संबंध में प्रिंसिपल प्रो. नवनीत कुमार को फोन किया गया लेकिन उन्होंने न कॉल रिसीव की न ही मेसेज का जवाब दिया। वहीं सूत्रों का कहना है कि अरविंद ने 2012 में मध्य प्रदेश के व्यापम में एग्जाम दिया था। उसकी फोटो सीबीआई के पास है। सीबीआई को शक है कि अरविंद को व्यापम के बारे में जानकारी है। इसी आधार पर उसे पूछताछ के लिए बुलाया गया था।
रेलवे और बैंक एग्जाम था निशाने पर
कानपुर। व्यापम घोटाले में मंगलवार को पकड़े गए रमेश शिवहरे ने रेलवे भर्ती बोर्ड एग्जाम, बैंक और बीडीओ एग्जाम में भी सेटिंग करनी शुरू कर दी थी। उसने कई अभ्यर्थियों सदस-दस लाख रुपये वसूल भी लिए थे। इसका खुलासा सीबीआई और एसटीएफ की पूछताछ में हुआ है। टीम को रमेश के पास से 94 हजार रुपये नगद, चार मोबाइल फोन, कई बैंकों की पास बुक व चेक बुक और कई एग्जाम से संबंधित अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं। एसटीएफ का कहना है कि 2005 में एचबीटीआई से लेदर टेक्नोलॉजी में बीटेक करने के बाद रमेश ने काकादेव में पैराडाइज कोचिंग के नाम से सेंटर शुरू किया था। उसी समय उसकी मुलाकात जबलपुर के संतोष गुप्ता से हुई और उसने व्यापम में सेंध लगा दी। रमेश ने स्वीकार किया कि उसने सॉल्वर और अभ्यर्थी की जगह दूसरे को बैठाकर एग्जाम पास कराए हैं। एसटीएफ के एडिशनल एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि पत्नी अंशू शिवहरे के जिला पंचायत अध्यक्ष होने के कारण सभी रमेश को अध्यक्ष जी नाम से बुलाते थे। रमेश के आगरा, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई जिलों के गैंगों से संपर्क हैं। उसने कानपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा आदि जगहों पर अपने नेटवर्क बना लिए थे।
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की चर्चा
चर्चा है कि अरविंद पुरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। वह सीबीआई का नोटिस मिलने के बाद से ही मध्य प्रदेश चला गया था। वहां निचली अदालत से अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद अरविंद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। चर्चा है कि अरविंद दो दिन पहले कॉलेज वापस आया है लेकिन उसने कॉलेज प्रशासन को जानकारी नहीं दी है।
विज्ञापन
रमेश शिवहरे का ट्रांजिट रिमांड मंजूरकानपुर। व्यापम घोटाले के मोस्ट वांटेड रमेश शिवहरे का ट्रांजिट रिमांड चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) ने मंजूर कर लिया। इससे पहले एसीएमएम की कोर्ट ने विवेचक के मौजूद न होने पर रिमांड अर्जी नामंजूर कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि विवेचक ही अभियुक्त का ट्रांजिट रिमांड ले सकता है। भोपाल की सीबीआई और यूपी एसटीएफ की संयुक्त टीम ने महोबा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अंशू शिवहरे के पति रमेश शिवहरे को देर शाम कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। बुधवार को सीबीआई ने ट्रांजिट रिमांड के लिए रमेश शिवहरे को एसीएमएम की कोर्ट में पेश किया। रमेश शिवहरे के अधिवक्ता विजय अरोड़ा ने बताया कि विवेचक के मौजूद न होने के तर्क पर कोर्ट ने रिमांड अर्जी नामंजूर कर दी गई। फिर सीबीआई ने सीएमएम कोर्ट में रिमांड के लिए अर्जी दी। सीएमएम कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड देते हुए सीबीआई से अभियुक्त को सात मई तक जबलपुर कोर्ट में पेश करने को कहा है।
ये होता है ट्रांजिट रिमांड
अधिवक्ता विजय बख्शी के मुताबिक गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर अभियुक्त को कोर्ट में पेश करना होता है। दूसरे जिले या राज्य के मामले में 24 घंटे के अंदर संबंधित कोर्ट में अभियुक्त को पेश करना संभव नहीं होता है। ऐसे में पुलिस स्थानीय कोर्ट में पेश कर एक तय समय का रिमांड मांगती है। इसे ट्रांजिट रिमांड कहते हैं।
सीबीआई के निशाने पर एचबीटीआई
कानपुर। व्यापम घोटाले में सीबीआई की गिरफ्त में आए रमेश शिवहरे की वजह से एचबीटीआई सीबीआई के निशाने पर है। एक साल पहले रमेश के महोबा स्थित आवास पर छापे के बाद एमपी की एसआईटी ने एचबीटीआई के तकरीबन दो हजार स्टूडेंटों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया था। बाद में एसआईटी ने सभी स्टूडेंटों की डिटेल सीबीआई को सौंप दी थी। महोबा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष (बसपा) और वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य (सपा) अंशू शिवहरे के पति रमेश शिवहरे ने एचबीटीआई से बीटेक करने के बाद काकादेव में कोचिंग सेंटर खोला था। 2014 में जब मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले का पर्दाफाश हुआ तो जांच के दायरे में रमेश भी आया। मध्य प्रदेश के छह जिलों में रमेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई और जबलपुर पुलिस ने उसे पांच हजार का इनामी घोषित किया। एमपी एसआईटी ने पिछले साल एचबीटीआई प्रशासन से रमेश का रिकॉर्ड तलब किया था। पुख्ता सबूतों के बाद रमेश के आवास पर छापा मारा गया लेकिन वह बच निकला। इसके बाद एसआईटी ने एचबीटीआई के स्टूडेंटों का रिकॉर्ड तलब किया था। सीबीआई आरोपी स्टूडेंटों के बैंक खाते भी खंगाल रही है। साथ ही आरोपियों के परिवार की संपन्नता की भी जांच की जा रही है।
विज्ञापन
रेलवे और बैंक एग्जाम था निशाने पर
कानपुर। व्यापम घोटाले में मंगलवार को पकड़े गए रमेश शिवहरे ने रेलवे भर्ती बोर्ड एग्जाम, बैंक और बीडीओ एग्जाम में भी सेटिंग करनी शुरू कर दी थी। उसने कई अभ्यर्थियों सदस-दस लाख रुपये वसूल भी लिए थे। इसका खुलासा सीबीआई और एसटीएफ की पूछताछ में हुआ है। टीम को रमेश के पास से 94 हजार रुपये नगद, चार मोबाइल फोन, कई बैंकों की पास बुक व चेक बुक और कई एग्जाम से संबंधित अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड मिले हैं। एसटीएफ का कहना है कि 2005 में एचबीटीआई से लेदर टेक्नोलॉजी में बीटेक करने के बाद रमेश ने काकादेव में पैराडाइज कोचिंग के नाम से सेंटर शुरू किया था। उसी समय उसकी मुलाकात जबलपुर के संतोष गुप्ता से हुई और उसने व्यापम में सेंध लगा दी। रमेश ने स्वीकार किया कि उसने सॉल्वर और अभ्यर्थी की जगह दूसरे को बैठाकर एग्जाम पास कराए हैं। एसटीएफ के एडिशनल एसपी डॉ. अरविंद चतुर्वेदी ने कहा कि पत्नी अंशू शिवहरे के जिला पंचायत अध्यक्ष होने के कारण सभी रमेश को अध्यक्ष जी नाम से बुलाते थे। रमेश के आगरा, गाजियाबाद, नोएडा समेत कई जिलों के गैंगों से संपर्क हैं। उसने कानपुर, हमीरपुर, महोबा, बांदा, लखनऊ, इलाहाबाद, आगरा आदि जगहों पर अपने नेटवर्क बना लिए थे।
विज्ञापन
हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत की चर्चा
चर्चा है कि अरविंद पुरी को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई है। वह सीबीआई का नोटिस मिलने के बाद से ही मध्य प्रदेश चला गया था। वहां निचली अदालत से अग्रिम जमानत की याचिका खारिज होने के बाद अरविंद ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। चर्चा है कि अरविंद दो दिन पहले कॉलेज वापस आया है लेकिन उसने कॉलेज प्रशासन को जानकारी नहीं दी है।
विज्ञापन
रमेश शिवहरे का ट्रांजिट रिमांड मंजूरकानपुर। व्यापम घोटाले के मोस्ट वांटेड रमेश शिवहरे का ट्रांजिट रिमांड चीफ मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट (सीएमएम) ने मंजूर कर लिया। इससे पहले एसीएमएम की कोर्ट ने विवेचक के मौजूद न होने पर रिमांड अर्जी नामंजूर कर दी थी। कोर्ट का कहना था कि विवेचक ही अभियुक्त का ट्रांजिट रिमांड ले सकता है। भोपाल की सीबीआई और यूपी एसटीएफ की संयुक्त टीम ने महोबा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष अंशू शिवहरे के पति रमेश शिवहरे को देर शाम कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। बुधवार को सीबीआई ने ट्रांजिट रिमांड के लिए रमेश शिवहरे को एसीएमएम की कोर्ट में पेश किया। रमेश शिवहरे के अधिवक्ता विजय अरोड़ा ने बताया कि विवेचक के मौजूद न होने के तर्क पर कोर्ट ने रिमांड अर्जी नामंजूर कर दी गई। फिर सीबीआई ने सीएमएम कोर्ट में रिमांड के लिए अर्जी दी। सीएमएम कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड देते हुए सीबीआई से अभियुक्त को सात मई तक जबलपुर कोर्ट में पेश करने को कहा है।
ये होता है ट्रांजिट रिमांड
अधिवक्ता विजय बख्शी के मुताबिक गिरफ्तारी के 24 घंटे के अंदर अभियुक्त को कोर्ट में पेश करना होता है। दूसरे जिले या राज्य के मामले में 24 घंटे के अंदर संबंधित कोर्ट में अभियुक्त को पेश करना संभव नहीं होता है। ऐसे में पुलिस स्थानीय कोर्ट में पेश कर एक तय समय का रिमांड मांगती है। इसे ट्रांजिट रिमांड कहते हैं।
सीबीआई के निशाने पर एचबीटीआई
कानपुर। व्यापम घोटाले में सीबीआई की गिरफ्त में आए रमेश शिवहरे की वजह से एचबीटीआई सीबीआई के निशाने पर है। एक साल पहले रमेश के महोबा स्थित आवास पर छापे के बाद एमपी की एसआईटी ने एचबीटीआई के तकरीबन दो हजार स्टूडेंटों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया था। बाद में एसआईटी ने सभी स्टूडेंटों की डिटेल सीबीआई को सौंप दी थी। महोबा के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष (बसपा) और वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य (सपा) अंशू शिवहरे के पति रमेश शिवहरे ने एचबीटीआई से बीटेक करने के बाद काकादेव में कोचिंग सेंटर खोला था। 2014 में जब मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले का पर्दाफाश हुआ तो जांच के दायरे में रमेश भी आया। मध्य प्रदेश के छह जिलों में रमेश के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई और जबलपुर पुलिस ने उसे पांच हजार का इनामी घोषित किया। एमपी एसआईटी ने पिछले साल एचबीटीआई प्रशासन से रमेश का रिकॉर्ड तलब किया था। पुख्ता सबूतों के बाद रमेश के आवास पर छापा मारा गया लेकिन वह बच निकला। इसके बाद एसआईटी ने एचबीटीआई के स्टूडेंटों का रिकॉर्ड तलब किया था। सीबीआई आरोपी स्टूडेंटों के बैंक खाते भी खंगाल रही है। साथ ही आरोपियों के परिवार की संपन्नता की भी जांच की जा रही है।