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मेडिकल कॉलेज : स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल, रेफर कर छुड़ा रहे जान

Thu, 24 Apr 2025 12:40 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर Updated Thu, 24 Apr 2025 12:40 AM IST
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Medical College: Health services are in a bad state, people are risking their lives by referring
कानपुर देहात। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए मेडिकल कॉलेज में कई सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। मगर इन सुविधाओं का लाभ बीमार मरीजों को मिलता नजर नहीं आ रहा है। इमरजेंसी में आने वाले गंभीर मरीजों को आज भी रेफर किया जा रहा है। यही वजह है कि नौ अप्रैल को चालू हुआ आईसीयू खाली पड़ा है। बुधवार को यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला।
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जिला अस्पताल अब मेडिकल कॉलेज से संबद्ध है। यहां डॉक्टर व स्वास्थ्य कर्मी भी बढ़ा दिए गए। इसमें 33 प्रोफेसर, 16 सीनियर रेजीडेंट, 41 जेआर और 11 विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। डॉक्टरों व स्टॉफ की पर्याप्त उपलब्धता होने पर नौ अप्रैल को जिलाधिकारी से ट्रामासेंटर भवन में चार बेड के आईसीयू का शुभारंभ कराया गया। इसके चालू होने से लोगों में उम्मीद जगी थी कि गंभीर मरीज रेफर नहीं हो सकेंगे। मगर यह व्यवस्था कुछ दिन बाद ही कागजी दिखावा साबित होती नजर आ रही है।
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बुधवार को यहां एक भी मरीज भर्ती नहीं मिला। एक कर्मचारी ने बताया कि 13 दिन में कुल एक मरीज भर्ती हुआ है। अब कर्मचारियों को आईसीयू के लिए प्रशिक्षण दिलाकर प्रशिक्षित कराए जाने की बात जिम्मेदार कह रहे हैं। इधर इमरजेंसी के आंकड़ों की बात करें तो 10 अप्रैल से 23 अप्रैल की दोपहर तक करीब 540 मरीज इमरजेंसी में पहुंचे। इनमें से 80 मार्ग दुर्घटना में घायल होकर पहुंचे थे। इनमें से कई गंभीर मरीज थे, जिन्हें हालत नाजुक बता कर कानपुर रेफर कर दिया गया। मगर उन्हें आईसीयू में भर्ती करने की जरूरत नहीं समझी गई।
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वर्जन...
आईसीयू के लिए जो ट्रामा सेंटर का स्टॉफ है अभी वही भर्ती मरीजों को देखभाल करेगा। आईसीयू के लिए अभी स्टॉफ नहीं मिला है। बैठक की गई है, हमारे पास जिन-जिन सामान की कमी है, उसको मंगाया जा रहा है। फीजीशियन, बेहोशी, सर्जन डॉक्टर का रोस्टर बना लिया गया है। अगले सप्ताह ट्रामा सेंटर के स्टॉफ की आईसीयू का प्रशिक्षण भी दिलाया जाना है। जो मरीज आईसीयू में भर्ती होने की स्थिति में है उनको भर्ती किया जा रहा है। - डॉ. वंदना सिंह, सीएमएस
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किसी को स्ट्रेचर नहीं मिला तो किसी के लिए तीमारदार बने सहारा
कानपुर देहात। मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी में बीमार व गंभीर घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों के मददगार उनके तीमारदार ही साबित हो रहे हैं। यहां पर मरीजों का सहयोग व उनकी मदद के लिए पांच से छह कर्मचारी तैनात रहते हैं। कर्मचारियों के होने के बाद भी उन्हें न तो कोई स्ट्रेचर मुहैया कराता है न कोई उनकी मदद के लिए आगे आता है।
बुधवार को इमरजेंसी में भर्ती पिता सुघर सिंह की जांच कराने के लिए झींझक निवासी मिथलेश काफी देर तक भटकती रहीं। उन्होंने इमरजेंसी जाकर स्ट्रेचर मांगा तो एक कर्मचारी ने व्हीलचेयर लेकर जाने की बात कही। मिथलेश ने बताया कि पिता उठकर बैठ नहीं पा रहे थे। उन्हें पैथालॉजी में जांच के लिए सैंंपल देने जाना था। एक घंटे बाद एक स्टॉफ नर्स ने कमरे से स्ट्रेचर लाकर दिया तब वह जांच कराने के लिए गईं।
वहीं ड्रेसिंग कराने के लिए हथूमा डेरापुर से आए विनोद ने बताया कि वह किसी तरह ऑटो से आए थे। वह काफी देर तक इमरजेंसी के बाहर बैठे रहे। जब उनको किसी ने स्ट्रेचर नहीं दिया तो वह घिसटते हुए इमरजेंसी तक पहुंचे और यहां आकर ड्रेसिंग कराई। इसी तरह अकबरपुर के कमल अपनी बीमार मां की छुट्टी कराकर घर जा रहे थे। उन्हें स्ट्रेचर तो मिला मगर किसी कर्मचारी ने उनकी मदद नहीं की। बताया कि भर्ती मां के इलाज में आराम न मिलने पर डॉक्टर ने उन्हें रेफर कर दिया था।
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इमरजेंसी वार्ड का हाल : एक बेड पर भर्ती दो मरीज, कई बेड पर नहीं थी चादर
कानपुर देहात। मौसम में हुए बदलाव और पड़ रही गर्मी को लेकर उल्टी, दस्त, वायरल के मरीज बढ़े हैं। इन दिनों ओपीडी के अलावा इमरजेंसी में मरीज अधिक पहुंच रहे हैं। जिन्हें भर्ती कर इलाज किया जा रहा है। मगर उनके स्वास्थ्य को लेकर जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।
वार्ड में बुधवार को दो बेड पर दो-दो मरीज लेटे मिले। इनमें बच्चे भी शामिल थे। इनमें से किसी को बुखार की समस्या थी तो किसी को उल्टी दस्त की समस्या थी। ऐसे में उन्हें ठीक होने से ज्यादा एक दूसरे मरीज के संक्रमण को लेकर चिंता बनी हुई थी। कई तीमारदारों ने इसका विरोध भी किया। मगर किसी की बात नहीं सुनी गई। वार्ड में भर्ती मरीज के तीमारदार अशोक ने बताया कि उनके बच्चे को देर रात से उल्टी-दस्त आने शुरू हुए थे। यहां पर लाने पर उसे भर्ती कर दिया गया। कुछ देर बाद एक अन्य बच्चे को उसके बेड में स्टॉफ नर्स ने लिटाकर ड्रिप लगा दी। इमरजेंसी में जाकर जानकारी दी गई।

इधर जानकारी होने पर दोपहर बाद ईएमओ डॉ. निशांत पाठक ने कुछ मरीजों को इमरजेंसी वार्ड से प्रथम तल पर बने जनरल वार्ड में भर्ती किया। ईएमओ डॉ. निशांत पाठक ने बताया कि सुबह के समय मरीज अधिक आ गए थे। जिन्हें कुछ देर बाद ऊपर वार्ड में शिफ्ट करा दिया गया। सीएमएस वंदना सिंह का कहना है कि इमरजेंसी वार्ड सुबह शिफ्ट किया गया है। वार्ड में 16 बेड हैं, किसी भी तरह की कोई समस्या नहीं है। यदि कुछ समस्या बताई जाएगी तो उसे दूर कराया जाएगा।
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