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आयुर्वेद, होम्योपैथी भी पढ़ेंगे एमबीबीएस छात्र, योग, म्यूजिक भी रहेगा कोर्स
Thu, 28 Mar 2019 05:08 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Thu, 28 Mar 2019 05:08 PM IST
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एमबीबीएस के छात्रों को अब आयुर्वेद और होम्योपैथी के बारे में भी पढ़ना पड़ेगा। भारतीय चिकित्सा परिषद (एमसीआई) ने एमबीबीएस के लिए जो नया पाठ्यक्रम तैयार किया है, उसमें वैकल्पिक चिकित्सा पद्धतियों का भी कुछ अंश रखा गया है।
इससे एलोपैथी के डाक्टर होम्योपैथी और आयुर्वेद से भी लाभ ले सकेंगे। अभी तक वैकिल्पक चिकित्सा पद्धति के संबंध में एमबीबीएस छात्रों को कोई जानकारी नहीं रहती रही। बुधवार को कानपुर स्थित मेडिकल कालेज में आयोजित पाठ्यक्रम कार्यशाला में मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों को इस संबंध में जानकारी दी गई।
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इससे एलोपैथी के डाक्टर होम्योपैथी और आयुर्वेद से भी लाभ ले सकेंगे। अभी तक वैकिल्पक चिकित्सा पद्धति के संबंध में एमबीबीएस छात्रों को कोई जानकारी नहीं रहती रही। बुधवार को कानपुर स्थित मेडिकल कालेज में आयोजित पाठ्यक्रम कार्यशाला में मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षकों को इस संबंध में जानकारी दी गई।
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कार्यशाला का आयोजन प्राचार्य कमेटी सभागार में किया गया। वैकिल्पक चिकित्सा पद्धतियों के अलावा योग और म्यूजिक के संबंध में भी छात्रों को पढ़ाया जाएगा। रोगियों का मर्ज ठीक करने में डाक्टर योग और म्यूजिक थेरेपी की भूमिका के संबंध में भी जान सकेंगे।
मेडिक ल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि कालेज के चिकित्सा शिक्षक ही नए पद्धतियों के संबंध में पढ़ाएंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि लाइफ स्टाइल बिगड़ने से हो रहे रोगों के संबंध में छात्र एमबीबीएस प्रथम वर्ष से ही जान सकेंगे।
इसके अलावा छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर खास जोर रहेगा जिससे वे खुद स्ट्रेस में न आएं। उन्हें स्ट्रेस प्रबंधन के तरीके बताए जाएंगे। नए पाठ्यक्रम के संबंध में स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने विस्तार से जानकारी दी।
मेडिक ल कालेज की प्राचार्य डॉ. आरती लालचंदानी ने बताया कि कालेज के चिकित्सा शिक्षक ही नए पद्धतियों के संबंध में पढ़ाएंगे। इसके लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि लाइफ स्टाइल बिगड़ने से हो रहे रोगों के संबंध में छात्र एमबीबीएस प्रथम वर्ष से ही जान सकेंगे।
इसके अलावा छात्रों के व्यक्तित्व विकास पर खास जोर रहेगा जिससे वे खुद स्ट्रेस में न आएं। उन्हें स्ट्रेस प्रबंधन के तरीके बताए जाएंगे। नए पाठ्यक्रम के संबंध में स्त्री रोग विभागाध्यक्ष डॉ. किरन पांडेय ने विस्तार से जानकारी दी।