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'बुढ़वा मंगल' पर पनकी में उमड़ा जनसैलाब
डिजिटल टीम/अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 14 Sep 2016 01:23 AM IST
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- फोटो : कानपुर,अमर उजाला
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कानपुर के नजदीक पनकी मंदिर में 'बुढ़वा मंगल' के विशेष मौके पर लगभग 5 लाख लोग भगवान हनुमान के दर्शन को पहुंचे। रात तक श्रृद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। मंदिर परिसर के नजदीक ही एक भव्य मेला भी सजाया गया था जिसमें तरह-तरह के खिलौने बेचने वाली दुकानों के बाहर भीड़ लगी रही।
बता दें, प्रत्येक वर्ष इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसके पीछे एक विशेष पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के पश्चात पांडवों में अंहकार उमड़ आया था। इस अंहकार को तोड़ने के लिए भगवान हनुमान ने बीड़ा उठाया। एक रोज हनुमान एक बूढ़े के वेश में भीम की राह में अपने लंबी पूंछ फैला कर बैठ गए।
भीम ने गुस्से भरे स्वर से उन्हें पूंछ हटाने को कहा। इस पर बूढ़े के वेश में हनुमान ने कहा तुम खुद यह पूंछ हटा लो... इसके बाद भीम का क्रोध और बढ़ गया और वह हनुमान को पूंछ को पकड़ कर उसे रास्ते से हटा फेंकने की कोशिश में जुट गए।
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लेकिन फेंकना तो दूर की बात है भीम पूंछ को हिला तक नहीं पाए। इस घटना पर भीम का सारा अहम चकनाचूर हो गया। बाद में भीम के अनुरोध पर बूढे व्यक्ति के वेश से बाहर आकर हनुमान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। इसके बाद से लोगों ने यह दिन बूढ़वा मंगल के बतौर मनाना शुरू कर दिया। इसी उपलक्ष में पनकी में बुढ़वा मंगल का आयोजन होता है।
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बता दें, प्रत्येक वर्ष इस भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसके पीछे एक विशेष पौराणिक मान्यता है। कहा जाता है कि महाभारत युद्ध में विजय प्राप्ति के पश्चात पांडवों में अंहकार उमड़ आया था। इस अंहकार को तोड़ने के लिए भगवान हनुमान ने बीड़ा उठाया। एक रोज हनुमान एक बूढ़े के वेश में भीम की राह में अपने लंबी पूंछ फैला कर बैठ गए।
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भीम ने गुस्से भरे स्वर से उन्हें पूंछ हटाने को कहा। इस पर बूढ़े के वेश में हनुमान ने कहा तुम खुद यह पूंछ हटा लो... इसके बाद भीम का क्रोध और बढ़ गया और वह हनुमान को पूंछ को पकड़ कर उसे रास्ते से हटा फेंकने की कोशिश में जुट गए।
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लेकिन फेंकना तो दूर की बात है भीम पूंछ को हिला तक नहीं पाए। इस घटना पर भीम का सारा अहम चकनाचूर हो गया। बाद में भीम के अनुरोध पर बूढे व्यक्ति के वेश से बाहर आकर हनुमान ने उन्हें साक्षात दर्शन दिए। इसके बाद से लोगों ने यह दिन बूढ़वा मंगल के बतौर मनाना शुरू कर दिया। इसी उपलक्ष में पनकी में बुढ़वा मंगल का आयोजन होता है।