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विक्रम कोठारी, उदय देसाई और एमपी अग्रवाल जैसे कई घपलेबाज बैंकों के 20 हजार करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं

Fri, 13 Aug 2021 05:59 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 13 Aug 2021 05:59 PM IST
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Many scammers like Vikram Kothari, Uday Desai and MP Agarwal faud with banks with 20 thousand crore rupees
विक्रम कोठारी, उदय देसाई - फोटो : अमर उजाला
कानपुर के कारोबारी विक्रम कोठारी, उदय देसाई और श्री लक्ष्मी कॉटसिन के मालिक डॉ. एमपी अग्रवाल के अलावा भी ऐसे सैकड़ों शहरी हैं जो बैंकों के  19900 करोड़ रुपये दबाए बैठे हैं। यह खुलासा बैंकों की एनपीए (नॉन परफार्मिंग एसेट्स) रिपोर्ट में हुआ है। 30 जून 2021 तक की जारी रिपोर्ट के अनुसार 900 करोड़ रुपये पोटेंशियल एनपीए के भी हैं।
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मतलब इस रकम की रिकवरी होने की गुंजाइश है। सूत्रों के अनुसार जल्द ही शहर की प्रतिरक्षा उत्पाद निर्यात करने वाली एक और प्रतिष्ठित कंपनी में बैंक की कार्रवाई शुरू हो सकती है। इस कंपनी ने भी विस्तार के नाम पर बड़े पैमाने पर लोन ले रखा है और खाते भी एनपीए होने शुरू हो गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले छह साल से खाते ज्यादा एनपीए होने शुरू हुए हैं।
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इनकी दर 10-15 फीसदी है। एक बैंक के कानपुर रीजन में 833 करोड़ के खाते एनपीए हो चुके हैं। इसमें 935 खाते ऐसे हैं, जिसमें 10 लाख का बकाया है। सौ ऐसे खाते हैं, जिसमें लोन की रकम एक करोड़ से अधिक है। 20 करोड़ से ज्यादा रकम वाले 25 से अधिक खाते हैं। सूत्रों के अनुसार दो साल से कोरोना का प्रभाव पड़ा है। इस वजह से भी खाते एनपीए हुए हैं।
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पिछले साल एनपीए की रकम 17500 करोड़ थी। इस बार यह बढ़कर 19 हजार करोड़ के पार हो गई। यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के मंत्री रजनीश गुप्ता ने बताया कि कंपनी के निदेशकों पर व्यक्तिगत कार्रवाई न होने से बैंकों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। एनसीएलटी (नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल), डीआरटी (डेप्थ्स रिकवरी ट्रिब्यूनल), बाइफर में कंपनी के मामले ले जाकर खुद को सुरक्षित कर लेते हैं और बैंकों की रकम डूब जाती है।

नेशनल कन्फेडरेशन ऑफ बैंक इंप्लाइज के सचिव राजेंद्र अवस्थी का कहना है बैंकों का मुख्य कार्य लोन देने का है, लेकिन लोग रकम नहीं लौटा रहे हैं। बता दें शहर में एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक, सिंडीकेट बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र, पंजाब एंड सिंध बैक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, यूनियन बैंक, इंडियन ओवरसीज बैंक की 600 से ज्यादा शाखाएं हैं।

बैंकों के बड़े बकायेदार
विक्रम कोठारी : 3500 करोड़ रुपये
उदय देसाई : 2000 करोड़ रुपये
डॉ. एमपी अग्रवाल : 6833 करोड़
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