मनीष हत्याकांड: शासन से ओएसडी पद की नौकरी की स्वीकृति, मीनाक्षी जल्द संभालेंगी कार्यभार
गोरखपुर के एक होटल में पुलिस की दबिश के बाद मनीष की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। सरकार ने मृतक की पत्नी मीनाक्षी को केडीए (कानपुर विकास प्राधिकरण) में ओएसडी पद पर नौकरी और चालीस लाख रुपये की मदद की है।
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मीनाक्षी को भी पत्र भेजा गया है। अब जल्द ही नियुक्ति पत्र मीनाक्षी को मिल जाएगा। जिसके बाद वह केडीए में पदभार संभालेंगी। बुधवार को संयुक्त सचिव डॉ. ध्रुव पाल ने जिलाधिकारी कानपुर और मीनाक्षी गुप्ता को संस्तुति की प्रतिलिपि भेज दी है। मीनाक्षी का कहना है कि सरकार ने उनकी तीन मांगों को पूरा कर दिया है। अब सीबीआई जांच और हत्यारोपियों को सजा दिलाने की मांग शेष बची है।
परिजन गोरखपुर से लौटे
एसआईटी के साथ मनीष के ममेरे भाई आशीष और बहनोई रोहित गुप्ता भी गए थे। पांच दिनों तक वह टीम के साथ रहकर पूरी तफ्तीश में शामिल रहे। गुरुवार को वह पुलिस के साथ शहर लौटे। पुलिस ने लिखापढ़ी कर दोनों को उनके परिजनों के सुपुर्द किया। आशीष व रोहित का कहना है कि वह एसआईटी की जांच से संतुष्ट हैं। एक-एक पहलू पर गहनता से अफसर जांच कर रहे हैं। उम्मीद है कि हत्यारोपियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
क्या है पूरा मामला
सोमवार-मंगलवार की रात को गोरखपुर के एक होटल में पुलिस की दबिश के बाद मनीष की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। मनीष के साथ होटल में रुके उनके दोस्त गुरुग्राम के रहने वाले अरविंद सिंह ने बताया कि वे होटल कृष्णा पैलेस के अपने रूम नंबर 512 में सो रहे थे।
अरविंद ने बताया कि देर रात पुलिसवालों ने दरवाजा खुलवाया और आईडी चेक करने लगे। मनीष ने देर रात की जांच पर सवाल उठाए तो पुलिसवाले आक्रोशित हो गए और उन्होंने पीटना शुरु कर दिया।अरविंद का आरोप है कि पुलिसवाले शराब के नशे में भी थे, देर रात में की जा रही चेकिंग को लेकर सवाल पूछने पर उन्होंने मनीष को इतना पीटा कि उसकी जान चली गई थी।
होटल में रुके मनीष गुप्ता की मौत बर्बर पिटाई के कारण हुई थी। जिसका आरोप पुलिसवालों पर लगा। इस मामले में हत्या का केस दर्ज किया गया, जिसमें 3 पुलिसवालों और 3 अज्ञात लोगों पर केस दर्ज हुआ। पुलिसवालों द्वारा होटल में में घुसकर मारपीट की गई, बाद में जब मनीष की हालत बिगड़ी तो अस्पताल में मनीष गुप्ता को मृत घोषित किया गया था।