फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Make a project with Thermocol, then put it in a pot, it will become compost, Chaitanya has made biodegradable

UP: Thermocol से प्रोजेक्ट बनाओ, फिर गमले में डालो...बन जाएगा खाद, चैतन्य ने बनाया है बॉयोडिग्रेडेबल थर्माकोल

Sun, 10 Mar 2024 02:18 PM IST
हिमांशु अवस्थी शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर
शैली भल्ला, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 10 Mar 2024 02:18 PM IST
सार

Kanpur News: काकादेव के चैतन्य ने पराली और मशरूम का उपयोग कर बॉयोडिग्रेडेबल थर्माकोल बनाया है। साथ ही, आईआईटी के इंक्यूबेटेड सेंटर से अपनी कंपनी को इंक्यूबेट कराया है।

विज्ञापन
Make a project with Thermocol, then put it in a pot, it will become compost, Chaitanya has made biodegradable
आईआईटी कानपुर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कभी स्कूल में प्रोजेक्ट तो बड़ी कंपनियों में पैकेजिंग के रूप में इस्तेमाल होने वाला थर्माकोल अब खाद के रूप में भी इस्तेमाल हो सकेगा। यह पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाएगा। यह संभव कर दिखाया है शहर के चैतन्य दुबे ने। चैतन्य ने मशरूम और पराली का उपयोग करके थर्माकोल बनाया है, जो बॉयोडिग्रेडेबल है। यह आम थर्माकोल से अधिक मजबूत भी है।

विज्ञापन

काकादेव के रहने वाले चैतन्य ने अपनी 12वीं की पढ़ाई सर पदमपत सिंहानिया एजुकेशन सेंटर से और बंगलुरू से इन्फॉरमेशन साइंस में स्नातक किया है। चैतन्य कहते हैं कि इसके बाद उनका कैंपस प्लेसमेंट 12 लाख रुपये के सालाना के पैकेज पर एक निजी कंपनी में हो गया था। वह बताते हैं कि मन में कुछ अलग करने का जुनून था। पर्यावरण सुधार के लिए स्टार्टअप करना चाहते थे।

विज्ञापन

ऐसे में कई रिसर्च के बाद उनको मशरूम के कई फायदों के बारे में पता चला। तब उन्होंने थर्माकोल को पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर विचार किया। चैतन्य कहते हैं कि आइडिया था लेकिन इसे आगे बढ़ाना नहीं पता था। ऐसे में 2021 में अपनी कंपनी किनोको बॉयोटेक बनाकर आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन सेंटर से इंक्यूबेट कराया। आईआईटी की मदद से ही थर्माकोल बनाने में सफलता मिली।

विज्ञापन

कृषि अपशिष्ट और मशरूम दोनों ही जरूरी
चैतन्य कहते हैं कि कृषि अपशिष्ट की मदद से थर्माकोल तैयार होता है। थर्माकोल को बांधने का काम मशरूम की जड़ों से निकलने वाले प्राकृतिक चिपचिपा पदार्थ से किया जाता है। कृषि अपशिष्ट और प्राकृतिक रेशों के संयोजन का उपयोग करते हैं, इससे थर्माकोल लंबे समय तक चलता है। मजबूती के मामले में इसकी तुलना उच्च-घनत्व वाले थर्माकोल से की जाती है।

विज्ञापन

बॉयोडिग्रेडेबल थर्माकोल 90 दिनों में हो जाता है विघटित
चैतन्य कहते हैं कि यह बॉयोडिग्रेडेबल थर्माकोल उर्वरक के रूप में भी काम करता है। यह 60 से 90 दिनों में विघटित हो जाता है। एक बार जब इसका उद्देश्य पूरा हो जाए, तो बस इसे तोड़ कर गमलों में डाल दें तो यह प्राकृतिक उर्वरक के रूप में कार्य करेगा। पॉलीस्टाइरीन से बनने वाले थर्माकोल और मशरूम, पराली से बनने वाले थर्माकोल के रेट में अधिक अंतर नहीं है। हालांकि पराली से बनने वाला थर्माकोल 10 से 15 फीसदी भारी होता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed