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मोबाइल फोन के चक्कर में परिवार में रहकर भी हर शख्स अकेलेपन में जी रहा, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

Sun, 15 Sep 2019 01:35 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 15 Sep 2019 01:35 PM IST
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loneliness suffocation reason for depression
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : गूगल
कानपुर में एसोसिएशन ऑफ साइकेट्रिस्ट्स इन प्राइवेट प्रैक्टिस (एपीपीपी) की 17वीं वार्षिक कॉफ्रेंस में बताया गया कि एकाकी परिवारों में भी लोगों ने मोबाइल फोन के चक्कर में साथ बैठकर बतियाना कम कर दिया है। इससे परिवार में रह कर हर शख्स अकेलेपन के अहसास में जीता है जिससे स्ट्रेस बढ़ता है और डिप्रेशन आ जाता है।
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ब्रिज कैंडी हॉस्पिटल, मुंबई के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. वीएन वहिआ ने बॉलीवुड के सितारों का उदाहरण देकर बताया कि आर्थिक समृद्धि और ग्लैमर से भी डिप्रेशन रुकता नहीं है। सकरात्मक सोच रखें, घुटन में न रहें, अपने मसले शेयर करें।
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दो दिवसीय कॉफ्रेंस का आयोजन होटल लैंडमार्क में किया गया। पहले दिन अवसाद, सीजोफ्रेनिया, आत्महत्या और डीमेंशिया पर चर्चा हुई। डॉ. वहिआ ने बताया कि बॉलीवुड में सबसे अधिक डिप्रेशन है।

फिल्म स्टार को हर वक्त चौकन्ना रहना पड़ता है। हर वक्त जीत की मानसिकता बना लेने से हार स्वीकारने की क्षमता कम हो जाती है। इसके अलावा लोगों की लाइफ स्टाइल गड़बड़ हुई है। नींद की अवधि कम हो गई है।
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