फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Lockdown: Workers brought the family home by pulling a 500 km rickshaw

लॉकडाउन: 500 किमी रिक्शा खींचकर परिवार को घर लाया मजदूर, रोजी-रोटी के पड़े लाले

Fri, 15 May 2020 07:06 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, महोबा Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Fri, 15 May 2020 07:06 PM IST
विज्ञापन
Lockdown: Workers brought the family home by pulling a 500 km rickshaw
परिवार के साथ घर जाता रामचरण और रिक्शे पर बैठा परिवार - फोटो : amar ujala
उत्तर प्रदेश के महोबा में लॉकडाउन के चलते श्रमिकों का रोजगार छिन जाने से अब श्रमिकों की घर वापसी के लिए होड़ मची है। कोई पैदल, कोई ट्रकों पर, कोई नई साइकिल खरीदकर घर के लिए निकल पड़ा है। ऐसे में एक श्रमिक का पूरे परिवार और गृहस्थी के साथ रिक्शे से घर के लिए निकल पड़ा।
विज्ञापन


एक हफ्ते में परिवार के साथ महोबा के बरा गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने श्रमिक का हौंसला बढ़ाया। थाना श्रीनगर के ग्राम बरा निवासी रामचरण सात माह पहले परिवार के साथ दिल्ली में मजदूूूूरी करता था। मार्च माह में अचानक लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया। एक माह तक काम शुरू होने की उम्मीद में वह लोग दिल्ली में रहे लेकिन एक के बाद एक लॉकडाउन बढ़ता गया।
विज्ञापन


इससे उसके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। उसके साथी पैदल और ट्रकों से निकल चुके थे। बढ़ने पर श्रमिक रामचरण ने अपने घर आने का मन बनाया। दिल्ली से महोबा आने के लिए कोई साधन न मिलने से बीस दिन तक श्रमिक परेशान रहा। बाद में श्रमिक रामचरण ने वहीं एक पुराना रिक्शा खरीदा और परिवार के सभी नौ लोगों को रिक्शे में बैठाकर गांव के लिए निकल पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

Lockdown: Workers brought the family home by pulling a 500 km rickshaw
रिक्शे पर बैठा परिवार - फोटो : amar ujala
कुछ दूर रामचरण रिक्शा चलाता था तो उसका छोटा भाई रिक्शे मेें आराम करता था और छोटे भाई के रिक्शा चलाने पर बड़ा भाई आराम करता था। दिनरात एक सप्ताह तक रिक्शा घसीटने के बाद रामचरण के परिवार को मंजिल मिल गई। घर आने के बाद परिवार के लोगों से मिलकर खुश हैं।

भूखे बच्चों को बिस्किट देकर बहलाया
श्रीनगर के ग्राम बरा निवासी रामचरण अहिरवार का कहना है कि वह दिल्ली मजदूरी करने गया था लेकिन लॉकडाउन के चलते रोजी-रोटी के भी लाले पड़ गए। एक माह बाद रिक्शा खरीद लेने से खाने तक के लिए पैसा नहीं बचा। रास्ते में तीन दिन भूखे रहकर रिक्शा चलाया। बच्चों को पानी में बिस्किट देकर बहलाया।

अब परदेस नहीं जाऊंगी
श्रीनगर के बरा निवासी मुन्नी का कहना है कि दिल्ली अब कभी नहीं जाऊंगी। घर में रूखी-सूखी खाकर रहूंगी लेकिन बाहर की तरफ अब रूख नहीं करना है। 35 साल की उम्र में ऐसा समय पहले कभी नहीं देखा है। लॉकडाउन के बाद मानो दुखों का पहाड़ टूट गया हो। आटा, सब्जी, दवा सब बंद हो गया था। कभी सूखी रोटी तो कभी भूखे पेट बच्चों को सुलाया। कुछ दिन बाद आटा और सब्जी मिली।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed