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Lockdown in kanpur: कोरोना से होटल, रेस्टोरेंट का कारोबार संकट में, साल भर तक नहीं सुधरेंगे हालात

Mon, 27 Apr 2020 11:07 AM IST
शिखा पांडेय प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 27 Apr 2020 11:07 AM IST
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Lockdown in kanpur: hotel, restaurant business in crisis from coronavirus
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : गूगल
कोरोना संक्रमण का सबसे बुरा असर होटल, क्लब और रेस्टारेंट कारोबार पर पड़ेगा। महीना, 15 दिन में लॉकडाउन खत्म भी हो जाएगा तो भी इनके हालात सुधरने में महीनों लग जाएंगे। दरअसल कोरोना संक्रमण के भय की वजह से कुछ महीने तो यहां आने जाने की घोषित पाबंदी रहेगी, जबकि इसके बाद कई महीने तक लोग अघोषित तौर पर दूरी बनाकर रखेंगे। सामने दिख रहे हालात से इन व्यवसाय से जुड़े कारोबारी चिंतित हैं। कारोबारी खुद मानते हैं कि तीन मई के बाद लॉकडाउन खुलता भी है तो कोविड-19 के प्रभाव से बाहर आने में कम से कम एक वर्ष का समय लग सकता है।
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कारोबार में 40 फीसदी तक आएगी गिरावट
कारोबारियों का मानना है कि होटल, क्लब और रेस्टारेंट कारोबार में अगले एक वर्ष तक कम से कम 40 फीसदी तक गिरावट रहेगी। हाल फिलहाल कारोबार का पुराने स्वरूप में आना मुश्किल होगा। इसके दो कारण हैं। एक तो लोग खुद ही बाहर जाकर खाने से परहेज करेंगे। बहुत ही जरूरी मौकों पर वे निकलना चाहेंगे। इस वजह से भी लोगों की आवक कम रहेगी। इसके अलावा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन बहुत अनिवार्य होगा। ऐसे में रेस्टोरेंट में जितने लोगों के बैठने की क्षमता है, उसमें कम से कम एक बार में 50 फीसदी की कटौती स्वत: हो जाएगी। जब एक बार में निर्धारित क्षमता से कम लोग बैठेंगे तो कारोबार पर असर पड़ेगा ही।
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50 हजार से अधिक लोगों को मिलता है रोजगार
शहर में करीब 300 होटल, एक दर्जन स्तरीय क्लब और तीन हजार से अधिक रेस्टोरेंट व ढाबे हैं। इनमें 50 हजार से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिलता है। 30-35 हजार लोग तो सीधे जुड़े हैं। बाकी लोग इन प्रतिष्ठानों की आवश्यकताओं की आपूर्ति से जुड़े हैं। जिस तरह से कारोबारियों ने आशंकाएं जताई हैं, ठीक वैसा ही हुआ तो इस इंडस्ट्री में रोजगार पाने वालों को बड़ा झटका लगेेगा। बताते हैं कि कारोबार में जितने फीसद की गिरावट आएगी, उतनी ही लोगों से रोजगार छिन सकता है। सरकार मात्र तीन से चार महीने तक मदद दे सकती है, लेकिन इसका असर नौ से 12 महीने तक रहेगा।

महामारी ने रेस्टारेंट के कारोबार को बिल्कुल शून्य पर लाकर छोड़ दिया है। इससे उबरने में करीब एक से दो साल और उससे ज्यादा का समय भी लग जाएगा। एक तो यह आवश्यक उद्योग में नहीं रहा। इसे विलासिता वाला कारोबार माना गया है। लॉकडाउन खुलने के बाद लोग फूंक फूंककर कदम उठाएंगे। होटलों में रुकना कम हो जाएगा। बाहर जाकर खाने पीने में कमी आएगी। इससे उबर पाना इस इंडस्ट्री के लिए बहुत मुश्किल है। सरकार को ऐसी योजना बनानी चाहिए ताकि यह उद्योग भी जिंदा रह सके। - विजय पांडेय, चेयरमैन, कानपुर होटल, रेस्टोरेंट एसोसिएशन


 

कारोबार चलेंगे, लोगों की कमाई होगी, तब वे रेस्टोरेंट, होटल आएंगे। अभी हालात ऐसे नहीं लग रहे कि इन सब चीजों पर शौकिया खर्च करेंगे। हालात बहुत खराब हैं। समझ में नहीं आ रहा कारोबारी इस हालात से कैसे उबरेंगे। होटलों के मेंटीनेंस का खर्च निकालना तक मुश्किल पड़ेगा। कर्मचारियों को वेतन देने का संकट अभी से है। भविष्य में स्थितियां और खराब हो सकती हैं। - देशदीप बाधवा, होटल सेलिब्रेशन, 80 फीट रोड

मौजूदा वक्त में यह सेक्टर गंभीर संकट से गुजर रहा है। रेस्टारेंट इंडस्ट्री का राजस्व शून्य हो गया है। इस क्षेत्र में डिमांड लंबे समय तक के लिए खत्म हो गई है। लॉकडाउन के बाद सोशल डिस्टेंसिंग के चलते कई माह तक लोग बाहर निकलने और रेस्टारेंट में जाकर खाने से बचेंगे। लॉकडाउन खुलने के बाद हमारी प्राथमिकता ग्राहकों में हाइजीन, सुरक्षा को लेकर भरोसा कायम करना होगा, इसमें हम एक्स्ट्रा खर्च भी उठाने को तैयार हैं। - हरदीप सिंह, होटल रॉयल क्लिफ, स्वरूप नगर

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