चिंताजनक: लाइफ स्टाइल बिगड़ी...बड़ों वाली डायबिटीज बच्चों में हो रही आक्रामक, टाइप टू के शिकार हो रहे किशोर
Kanpur News: डॉक्टर्स का कहना है कि डायबिटीज की सबसे अधिक दिक्कत मोटापा ग्रस्त बच्चों में हो रही है। मोटापा के कारण इनमें इंसुलिन रिसेस्टेंट पैदा हो रहा है। बच्चों ने बाहर मैदान में जाकर खेलना-कूदना बंद कर दिया है। बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इससे शरीर में वसा का जमाव बढ़ता है।
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40 साल की उम्र के बाद होने वाली टाइप-2 डायबिटीज अब 10 साल के बच्चों को हो रही है। डायबिटिक बालरोगियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रोगियों की हिस्ट्री के अध्ययन से पता चला है कि इसका कारण फास्ट फूड का अधिक सेवन और शारीरिक व्यायाम की कमी है। चिंता की बात यह है कि टाइप-2 डायबिटीज बच्चों में बहुत तेजी से बढ़ती है। कम समय में ही इसे नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन की जरूरत पड़ती है।
शहर में सौ बच्चे विशेषज्ञों के यहां पंजीकृत हैं। टाइप-टू डायबिटीज का सबसे कम उम्र का रोगी साढ़े नौ साल का है। इन रोगियों का इलाज कर रहे पीडियाट्रिक इंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ. अनुराग वाजपेयी का कहना है कि डायबिटीज की सबसे अधिक दिक्कत मोटापा ग्रस्त बच्चों में हो रही है। मोटापा के कारण इनमें इंसुलिन रिसेस्टेंट पैदा हो रहा है। बच्चों ने बाहर मैदान में जाकर खेलना-कूदना बंद कर दिया है। बच्चों का स्क्रीन टाइम बढ़ गया है। इससे शरीर में वसा का जमाव बढ़ता है।
इंसुलिन रिसेंस्टेंस से और दिक्कत बढ़ जाती है
उन्होंने बताया कि डायबिटिक बालरोगियों के केस के अध्ययन से पता चला कि इनकी दवाओं की डोज जल्दी-जल्दी बढ़ती है। दो साल में इन्हें दो से तीन टेबलेट पर रखना पड़ता है। तीन साल में इंसुलिन पर रखने की नौबत आ जाती है। बच्चों की डायबिटीज के आक्रामक होने के कारण के संबंध में उन्होंने बताया कि रोगियों का आयु वर्ग 10 से 17 वर्ष के बीच का है। इसी उम्र में बच्चों में हारमोनल बदलाव होते हैं। इससे पैंक्रियाज को अधिक काम करना पड़ता है। इंसुलिन रिसेंस्टेंस से और दिक्कत बढ़ जाती है।
डायबिटिक बच्चों में बीपी, कोलेस्ट्राल भी बढ़ा
टाइप टू डायबिटीज के रोगियों का जांच में कोलेस्ट्राल और ट्राइग्लीसिराइड भी बढ़ी मिली है। इससे धमनियों के ब्लॉकेज होने का अंदेशा रहता है। ब्लॉकेज की वजह से कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है। डॉ. अनुराग वाजपेयी ने बताया कि इन रोगियों का लिवर फैटी पाया गया। डायबिटिक किशोरों को बड़ी उम्र के रोगियों की जैसी दवाएं चलानी पड़ती हैं।
बचाव
- पिज्जा, बर्गर, नूडल्स आदि फास्ट फूड का सेवन न करें।
- लैपटॉप, मोबाइल फोन, टीवी एक घंटे से ज्यादा इस्तेमाल न करें।
- मोटा अनाज, हरी सब्जियां, मौसमी फल और रोटी खाएं।
- खेलने के लिए मैदान में जाएं, शारीरिक व्यायाम जरूरी है।
- घी, तेल का नियंत्रित सेवन करें।
- नींद पूरी करें, लेकिन जगने के बाद बिस्तर छोड़ दें।