फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Life imprisonment to the son who murdered his father, one acquitted, conspiracy was hatched to put pressure

यूपी: पिता की हत्या करने वाले बेटे को उम्रकैद..एक बरी, दबाव बनाने के लिए रची थी साजिश, बयान से पलट गए थे दोस्त

Wed, 27 Sep 2023 06:23 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 27 Sep 2023 06:23 PM IST
सार

Kanpur News: एडीजीसी इंद्रलता शुक्ला ने बताया कि विवेचना के दौरान पुलिस ने पाया कि शशि के मायके वाले मुकदमे में समझौते के लिए रुपयों की मांग कर रहे थे और राजकुमार जमींन बेचकर रुपये देना चाहता था, जबकि अवधेश और गजराज इसका विरोध कर रहे थे।

विज्ञापन
Life imprisonment to the son who murdered his father, one acquitted, conspiracy was hatched to put pressure
जेल में महिला - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में  पिता के हत्यारे बेटे को अपर जिला जज 12 परमेश्वर प्रसाद ने उम्रकैद और दस हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। वहीं षड्यंत्र में शामिल रहने के आरोपी दूसरे बेटे को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है। सचेंडी निवासी राजकुमार कोरी की 11 जुलाई 2016 को गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।

विज्ञापन

राजकुमार के बेटे अवधेश ने सचेंडी थाने में तहरीर दी। इसमें कहा था कि सुबह 10 बजे वह अपने पुराने मकान के दरवाजे पर बैठा था तभी उसके छोटे भाई इंद्रकुमार का साला शिवली निवासी नेकचंद अपने तीन साथियों के साथ दो मोटर साइकिलों से उसके नए घर की ओर जाते दिखा।
विज्ञापन

इंद्रकुमार की पत्नी शशि ने नवंबर 2015 में आत्महत्या कर ली थी। शशि के पिता सूबेदार ने उसके व उसके भाई इंद्र कुमार, सर्वेश, गजराज के खिलाफ सचेंडी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। मुकदमे में इंद्रकुमार व सर्वेश जेल में बंद हैं। वह व छोटा भाई गजराज जमानत पर बाहर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

मृत अवस्था में पड़े थे पिता
इसी रंजिश को लेकर नेकचंद व उसका पिता सूबेदार रंजिश मानते हैं। शक होने पर वह पैदल-पैदल पीछे गया, तो देखा कि नेकचंद और उसके साथी उसके नए घर से बाहर निकले और भाग गए। अंदर जाकर देखा तो उसके पिता मृत अवस्था में पड़े थे। उसके पिता की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी।

जमींन बेचकर देना चाहता था रुपये
एडीजीसी इंद्रलता शुक्ला ने बताया कि विवेचना के दौरान पुलिस ने पाया कि शशि के मायके वाले मुकदमे में समझौते के लिए रुपयों की मांग कर रहे थे और राजकुमार जमींन बेचकर रुपये देना चाहता था, जबकि अवधेश और गजराज इसका विरोध कर रहे थे।

पेट दर्द का बहाना बनाकर रुक गया था घर
इसके तहत 11 जुलाई को शशि के मुकदमे की तारीख पर गजराज कचहरी चला गया और अवधेश पेट दर्द का बहाना बनाकर घर पर ही रुक गया।  इसके बाद में पिता की हत्या कर दी और नेकचंद के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज करा दी। जिससे दबाव में आकर शशि के घरवाले मुकदमे में समझौता कर लें, रुपये भी न देने पड़े और जमींन भी बिकने से बच जाए।

अवधेश को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई
विवेचक ने अवधेश व गजराज के खिलाफ हत्या व षड्यंत्र के आरोप में चार्जशीट कोर्ट भेजी थी। अभियोजन की ओर से दस गवाह कोर्ट में पेश किए गए। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने घटनास्थल पर मौजूद रहे अवधेश को हत्या का दोषी मानकर सजा सुनाई, जबकि गजराज के खिलाफ हत्या के षड्यंत्र में शामिल होने का कोई सबूत न होने पर उसे दोषमुक्त करार दे दिया।

कोर्ट में बयान से पलट गए थे दोस्त
एडीजीसी इंद्रलता शुक्ला ने बताया कि अवधेश के दोस्त विजय बहादुर व लाला उर्फ रमेश कुमार ने विवेचक को दिए बयान में कहा था कि घटना के दो दिन बाद अवधेश और उन लोगों ने मिलकर शराब पी थी तब अवधेश ने पिता की हत्या की बात बताई थी। कोर्ट में विजय ने बयान में कहा कि उसे अवधेश ने नहीं बल्कि लाला ने यह बात बताई थी जबकि लाला ने बयान में ऐसे कोई बात पुलिस को बताने से इनकार किया। लेकिन दोनों के बयान से पलटने का लाभ भी अवधेश को नहीं मिल सका।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed