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आंखों से रोशनी जाने का मामला: आराध्या हॉस्पिटल का लाइसेंस होगा कैंसिल, ओटी कमेटी भी कराएगी जांच

Fri, 25 Nov 2022 01:27 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Fri, 25 Nov 2022 01:27 PM IST
सार

मोतियाबिंद के ऑपरेशन के बाद मरीजों की आंखों की रोशनी जाने के मामले में आराध्या आई हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द होगा। वहीं, हॉस्पिटल की ओटी कमेटी रोगियों को संक्रमण कैसे हुआ, इसकी कराई जांच कराएगी।
 

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License of Aaradhya Hospital will be cancelled, OT committee of the hospital will investigate
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

कानपुर में आराध्या आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले रोगियों को संक्रमण कैसे हुआ? यह पता करने के लिए ऑपरेशन थिएटर के सैंपल की जांच कराई जाएगी। इस संबंध में गुरुवार को एसीएमओ डॉ. एसके सिंह ने सीएमओ डॉ. आलोक रंजन और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला को पत्र लिखा है।

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एसीएमओ डॉ. सिंह ने बताया कि सैंपल की जांच से स्पष्ट हो जाएगा कि रोगियों को ऑपरेशन थिएटर में संक्रमण हुआ है कि नहीं। इसके साथ ही यह भी पता चल जाएगा कि नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता मानकों के अनुसार ऑपरेशन थिएटर के संक्रमण की जांच करवाते थे या नहीं।
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ओटी के सैंपल की जांच मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की लैब में की जाएगी। बुधवार को ओटी की जांच सीएमओ की टीम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग की विशेषज्ञ डॉ. शालिनी मोहन के साथ कर चुकी हैं। प्रथम दृष्टया स्थिति मानक के अनुरूप पाई गई थी। टीम को यह भी बताया गया कि ओटी के सैंपल की जांच सात नवंबर को हुई थी।

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दो रोगियों को रोशनी में हल्का दिख रहा
आराध्या आई हॉस्पिटल में मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले पांच रोगियों का गंभीर हालत में हैलट के नेत्र रोग वार्ड में इलाज चल रहा है। इनमें तीन रोगियों की हालत अधिक गंभीर है। इनकी आंख पूरी तरह खराब हो गई है। संक्रमण कम करने के लिए हाई एंटीबायोटिक दवाएं दी जा रही हैं।

संक्रमण खत्म हो गया,तो इनकी आंख का गोला नहीं निकालना पड़ेगा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान का कहना है कि रोगियों को एंटीबायोटिक दी जा रही है। संक्रमण कम हुआ है। आंखों का दर्द भी कम है। इसके अलावा दो रोगी शेर सिंह और राजाराम की आंखों को बचाने की कोशिश की जा रही है। रोशनी में उन्हें हल्का दिखाई देता है।

बोले मरीज, पांच-छह दिन बाद अस्पताल आकर दिखाया था
प्रकरण की जांच कर रही टीम का कहना है कि रोगियों ने बयान दिए हैं कि ऑपरेशन के पांच-छह दिन के बाद उन्होंने अस्पताल आकर जांच कराई थी। लेकिन वे यह नहीं बता पा रहे हैं कि उनकी जांच किसने की थी? नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज गुप्ता ने जांच की या उनके किसी असिस्टेंट ने रोगियों को देखा?

यह स्पष्ट नहीं हो रहा है। अगर रोगियों ने आंखों की जांच कराई थी, तो उनका ढंग से इलाज क्यों नहीं किया गया। इलाज में लापरवाही बरती गई। एसीएमओ डॉ. एसके सिंह का कहना है कि कमेटी अपनी रिपोर्ट दो-तीन दिन में सौंप देगी।

यह था मामला
बर्रा स्थित आराध्या आई सेंटर की टीम ने शिवराजपुर के वीरामऊ गांव में दो नवंबर को नेत्र रोग परीक्षण शिविर लगाया था। इसमें 18 रोगी मोतियाबिंद के ऑपरेशन के लिए चिह्नित किए गए। बाद में आराध्या नर्सिंगहोम में सभी का मोतियाबिंद का ऑपरेशन किया गया। उसी दिन डिस्चार्ज कर सभी को घर छोड़ दिया गया था। इसके बाद छह मरीजों की आंखों की रोशनी चली गई थी। मामले में अस्पताल का लाइसेंस निलंबित कर दिया गया है।

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