फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kanpur News ›   Leaving engineering, she is growing crops using organic fertilizers.

Kanpur News: इंजीनियरिंग छोड़ जैविक खाद से उगा रहीं फसलें

Tue, 03 Mar 2026 02:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 03 Mar 2026 02:03 AM IST
विज्ञापन
Leaving engineering, she is growing crops using organic fertilizers.
कानपुर। अगर इरादा पक्का है तो मंजिल मिलना तय है। कुछ ऐसा ही इरादा बनाया था कल्याणपुर निवासी रश्मि सचान ने। वह इंजीनियरिंग का क्षेत्र छोड़कर खेती करने के लिए आगे आईं और आज उसमें न सिर्फ सफलता हासिल की है बल्कि लोगों के स्वास्थ्य का भी जैविक खेती के साथ ख्याल रख रही हैं। जब उन्होंने खेती करने के बारे में बात की तो परिवार के लोग नाराज हो गए लेकिन साथ उनके ससुर ने दिया और एक बीघा जमीन खेती करने के लिए दे दी। सफलता मिली तो आज वे साढ़े पांच एकड़ में खेती कर रही हैं। वर्तमान से सप्लाई से ज्यादा उनकी सब्जियों की डिमांड है।
विज्ञापन




कल्याणपुर निवासी रश्मि सचान ने गाजियाबाद से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की और 10 साल इसी क्षेत्र में दिल्ली और बंगलूरू में नौकरी की। उन्होंने बताया कि कोरोना के दौरान हम वापस कानपुर आ गए। सोचा क्या करें छुट्टियां हैं तो गांव ही घूम आएं। घाटमपुर के पास गांव चतरीपुर में जाना शुरू किया। वहां जाकर मेरी रुचि खेती की तरफ हुई जबकि मैं खुद मैकेनिकल इंजीनियर और पति सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। कभी गांव के परिवेश में भी नहीं रहे और न ही परिवार में किसी ने खेती की है।
विज्ञापन

जब खेती करने के लिए सोचा तो परिवार और दोस्त सभी ने मना किया कि इतना पढ़ने लिखने के बाद क्या तुम खेती करने के बारे में सोच रही हो। काफी मेहनत और सफलता की उम्मीद भी कम ही होगी। अच्छा खासा कॅरिअर है लेकिन उस समय मेरा साथ मेरे पति और ससुर ने दिया। उनके सहयोग से कोशिश की और धीरे-धीरे सफलता मिली। मैंने खेती के लिए प्रशिक्षण लिया। कई किसानों से मिली और उनसे जानकारी ली। इससे एक बात समझ आई कि फसलों में यूरिया बहुत प्रयोग हो रहा है जो सेहत के लिए हानिकारक है तो मैंने जैविक खेती करने की सोची।
विज्ञापन
विज्ञापन

जैविक खाद का प्रयोग कर सरसों, धनिया, चना, मटर, अरहर, हल्दी, पपीता, अमरूद, सागौन आदि फसलों को उगाया। देसी खादों से उत्पादन पर असर काफी आया क्योंकि हमने कोई भी केमिकल प्रयोग नहीं किया। सोसाइटी में भी जागरूकता फैलाई कि पेस्टिसाइड वाली फसलों के प्रयोग से बचें। हमारा माल कानपुर के अलावा दिल्ली और बंगलूरू भी जाता है। मांग अधिक है और सप्लाई उतनी नहीं होती है। इसलिए जल्द ही हम जमीन को खरीदकर ज्यादा जगह पर खेती करेंगे ताकि सप्लाई कर सकें। रश्मि ने खेती के जरिये 10 लोगों को रोजगार दे रखा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed