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खेल-खेल में सीखने से बच्चों के मन से पढ़ाई का डर होता कम : एआरपी
Fri, 11 Sep 2026 01:13 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Fri, 11 Sep 2026 01:13 AM IST
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रसूलाबाद। समग्र शिक्षा व निपुण भारत मिशन के तहत चंद्रप्रभा शर्मा डिग्री कॉलेज में चल रहे छठवें बैच के तीसरे दिन बृहस्पतिवार को शिक्षकों रोचक व नवाचारी शिक्षण पद्धति की जानकारी दी गई। एआरपी ने कहा कि खेल-खेल में जोड़, घटाव व शब्दों को जोड़ना सिखाने से बच्चों के मन से पढ़ाई का डर दूर होता है।
एआरपी सोनू सिंह ने कहा कि बच्चों की सीखने की कमियों व कठिनाइयों को पहचानकर्ता उन्हें दूर करना चाहिए। साथ ही रंग-बिरंगे खिलौने, कंचे, फ्लैश कार्ड और ब्लॉक का उपयोग करके गिनती व वर्णमाला सिखाना चाहिए। कहा कि हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है, इसे धैर्य और सहानुभूति से समझना जरूरी है। एआरपी पारुल निरंजन ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों में सीखने के प्रति जिज्ञासा जगानी चाहिए और उन्हें चुनौतियों का सामना करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए। कक्षा में ऐसा सकारात्मक माहौल बनाएं, जिससे बच्चे बिना झिझक प्रश्न पूछ सकें।
संदर्भदाता हिमांशु गुप्ता व शैलेश पाल ने बताया कि कक्षा एक और दो के स्तर पर कमजोर बच्चों के साथ अलग से बैठकर उनकी बुनियादी समझ मजबूत करें। संदर्भदाता दिनेश कुमार ने पढ़ाने के तरीकों में नवीनता और रचनात्मकता लाने का सुझाव दिया। यहां शिक्षक अनुराग, अनूप अवस्थी, शिवानी, नेहा देवी, रीतु, विजेता गुप्ता, आलोक कुमार, सुरेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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एआरपी सोनू सिंह ने कहा कि बच्चों की सीखने की कमियों व कठिनाइयों को पहचानकर्ता उन्हें दूर करना चाहिए। साथ ही रंग-बिरंगे खिलौने, कंचे, फ्लैश कार्ड और ब्लॉक का उपयोग करके गिनती व वर्णमाला सिखाना चाहिए। कहा कि हर बच्चे की सीखने की गति अलग होती है, इसे धैर्य और सहानुभूति से समझना जरूरी है। एआरपी पारुल निरंजन ने कहा कि शिक्षकों को बच्चों में सीखने के प्रति जिज्ञासा जगानी चाहिए और उन्हें चुनौतियों का सामना करने के लिए सशक्त बनाना चाहिए। कक्षा में ऐसा सकारात्मक माहौल बनाएं, जिससे बच्चे बिना झिझक प्रश्न पूछ सकें।
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संदर्भदाता हिमांशु गुप्ता व शैलेश पाल ने बताया कि कक्षा एक और दो के स्तर पर कमजोर बच्चों के साथ अलग से बैठकर उनकी बुनियादी समझ मजबूत करें। संदर्भदाता दिनेश कुमार ने पढ़ाने के तरीकों में नवीनता और रचनात्मकता लाने का सुझाव दिया। यहां शिक्षक अनुराग, अनूप अवस्थी, शिवानी, नेहा देवी, रीतु, विजेता गुप्ता, आलोक कुमार, सुरेश सिंह आदि मौजूद रहे।
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