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Kanpur News: पुलिस के खिलाफ वकीलों ने निकाला पैदल मार्च
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कानपुर। पुलिस कमिश्नरेट पर अधिवक्ताओं के खिलाफ कार्रवाई के विरोध में लॉयर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में सोमवार को वकीलों ने पैदल मार्च निकाला। शताब्दी गेट से होते हुए वकील पैदल फूलबाग तक पहुंचे। वहां गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन कर सीएम को संबोधित ज्ञापन डीएम के प्रतिनिधि को सौंपा। वहीं, बार एसोसिएशन ने इसका समर्थन नहीं किया। कचहरी में अधिवक्ताओं में फूट का बीज बो दिए जाने की चर्चा रही।
लॉयर्स एसोसिएशन परिसर में सुबह लगभग 12 बजे से वकील जमा होने लगे। इसके बाद जुलूस के रूप में पूरी कचहरी में घूमते और नारेबाजी करते हुए अधिवक्ता शताब्दी गेट पर पहुंचे। यहां से फूलबाग पहुंचे। हाथों में तिरंगा लिए वकीलों ने पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, अधिवक्ता एकता जिंदाबाद जैसे नारे लगाए। वकीलों के मार्च के चलते बड़ा चौराहा पर कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बन गई। सीएम को संबोधित ज्ञापन में पुलिस कमिश्ररेट से मजिस्ट्रेटी शक्तियां वापस लेने, अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने आदि की मांग की गई। पैदल मार्च में दिनेश चंद्र वर्मा, राजीव यादव, रमाकांत मिश्रा, पुष्करधर द्विवेदी, बुद्ध प्रकाश, अभय गौड़, सुरेंद्र वाजपेई, नरेश चंद्र त्रिपाठी, दिनेश शुक्ला, अनूप द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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पत्नी की हत्या के दोषी को उम्रकैद
कानपुर। पत्नी के हत्यारे पति को अपर जिला जज प्रथम सुदामा प्रसाद ने उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। स्वरूपनगर निवासी मनीषा निषाद सहालग में काम किया करती थीं। एक महिला ने एक नर्सिंग होम में उसकी नौकरी लगवा दी। वहीं उसकी मुलाकात लक्ष्मण बाग नवाबगंज निवासी आशीष कश्यप से हुई। वर्ष 2019 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था। शादी के बाद आशीष शराब के नशे में उसे पीटने लगा। 11 जनवरी 2020 को आशीष ने मनीषा की पीटकर हत्या कर दी थी। मृतका के भाई निखिल ने स्वरूपनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आशीष को हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। (संवाद)
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हत्या के प्रयास में सात साल कैद
कानपुर। जान से मारने की नीयत से पड़ोसी पर फायर झोंकने वाले प्रदीप सैनी को अपर जिला जज नवम शेष बहादुर निषाद ने सात साल कैद और नौ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 16 साल पुराने मुकदमे में अभियुक्त लगभग चार साल जेल में भी रह चुका था। सरोजनीनगर निवासी रामसेवक उर्फ मुन्ना सिंह 16 मई 2009 की शाम मकान की छत पर टहल रहा था। पड़ोसी प्रदीप सैनी ने गाली-गलौज की। विरोध करने पर हत्या के इरादे से फायर झोंक दिया। रामसेवक ने नजीराबाद थाने में प्रदीप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने प्रदीप को जेल भेजा था। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने प्रदीप को दोषी करार दिया। (संवाद)
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लॉयर्स एसोसिएशन परिसर में सुबह लगभग 12 बजे से वकील जमा होने लगे। इसके बाद जुलूस के रूप में पूरी कचहरी में घूमते और नारेबाजी करते हुए अधिवक्ता शताब्दी गेट पर पहुंचे। यहां से फूलबाग पहुंचे। हाथों में तिरंगा लिए वकीलों ने पुलिस प्रशासन मुर्दाबाद, अधिवक्ता एकता जिंदाबाद जैसे नारे लगाए। वकीलों के मार्च के चलते बड़ा चौराहा पर कुछ देर के लिए जाम की स्थिति बन गई। सीएम को संबोधित ज्ञापन में पुलिस कमिश्ररेट से मजिस्ट्रेटी शक्तियां वापस लेने, अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम लागू करने आदि की मांग की गई। पैदल मार्च में दिनेश चंद्र वर्मा, राजीव यादव, रमाकांत मिश्रा, पुष्करधर द्विवेदी, बुद्ध प्रकाश, अभय गौड़, सुरेंद्र वाजपेई, नरेश चंद्र त्रिपाठी, दिनेश शुक्ला, अनूप द्विवेदी आदि मौजूद रहे।
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पत्नी की हत्या के दोषी को उम्रकैद
कानपुर। पत्नी के हत्यारे पति को अपर जिला जज प्रथम सुदामा प्रसाद ने उम्रकैद और 25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। स्वरूपनगर निवासी मनीषा निषाद सहालग में काम किया करती थीं। एक महिला ने एक नर्सिंग होम में उसकी नौकरी लगवा दी। वहीं उसकी मुलाकात लक्ष्मण बाग नवाबगंज निवासी आशीष कश्यप से हुई। वर्ष 2019 में दोनों ने प्रेम विवाह कर लिया था। शादी के बाद आशीष शराब के नशे में उसे पीटने लगा। 11 जनवरी 2020 को आशीष ने मनीषा की पीटकर हत्या कर दी थी। मृतका के भाई निखिल ने स्वरूपनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने आशीष को हत्या का दोषी करार देते हुए सजा सुनाई। (संवाद)
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हत्या के प्रयास में सात साल कैद
कानपुर। जान से मारने की नीयत से पड़ोसी पर फायर झोंकने वाले प्रदीप सैनी को अपर जिला जज नवम शेष बहादुर निषाद ने सात साल कैद और नौ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। 16 साल पुराने मुकदमे में अभियुक्त लगभग चार साल जेल में भी रह चुका था। सरोजनीनगर निवासी रामसेवक उर्फ मुन्ना सिंह 16 मई 2009 की शाम मकान की छत पर टहल रहा था। पड़ोसी प्रदीप सैनी ने गाली-गलौज की। विरोध करने पर हत्या के इरादे से फायर झोंक दिया। रामसेवक ने नजीराबाद थाने में प्रदीप के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने प्रदीप को जेल भेजा था। सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने प्रदीप को दोषी करार दिया। (संवाद)