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अंतिम दिन भी नहीं खुला पोर्टल, नहीं हुई धान खरीद
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अकबरपुर क्रय केंद्र में बंद काउंटर। (संवाद)
- फोटो : AKBARPUR
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कानपुर देहात। धान की सरकारी खरीद के लिए सोमवार तक की दी गई मोहलत भी बेकार साबित हो गई। अंतिम दिन भी खाद्य विभाग का पोर्टल नहीं खुला, इसकी वजह से धान की खरीद नहीं हो सकी। कई किसान क्रय केंद्रों पर पहुंचे लेकिन पोर्टल बंद होने की जानकारी देकर लौटा दिया गया। अब तक 14076 किसानों से 84458 मीट्रिक टन धान खरीदा जा सका है।
खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में धान की सरकारी खरीद के लिए अंतिम तिथि 28 फरवरी तय की गई थी। इधर, तय तिथि तक खरीद के लिए किसानों के क्रय केंद्र पर पहुंचने का फीड बैक मिलने पर शासन की ओर से इसे बढ़ाकर 7 मार्च तक कर दिया गया था। शनिवार को पूरे दिन पोर्टल बंद होने से किसी क्रय केंद्र पर धान की खरीद नहीं हो सकी थी। अंतिम दिन सोमवार को अधिकारी व किसान पोर्टल खुलने की आस लगाए थे। सुबह कुछ किसान क्रय केंद्रों पर पहुंचे लेकिन पोर्टल बंद होने की जानकारी मिलने पर घरों को लौट गए। इधर, पूरे दिन खाद्य विभाग का पोर्टल नहीं खुला। इसकी वजह से धान खरीद की मोहलत का किसानों को कोई फायदा नहीं मिला।
जानकारों के अनुसार, मंडी परिसर स्थित खाद्य विभाग के तीन क्रय केंद्रों पर पहले से धान डंप था। खरीदे गए धान को मिलों को दस दिन में भेजना अनिवार्य है। इसकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग होती है। क्रय केंद्रों पर इस अवधि से पहले का धान एकत्र होने को लेकर पोर्टल बंद रहा।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पोर्टल बंद होने की वजह से धान खरीद नहीं हुई।
डेढ़ सौ किसानों का भुगतान अटका
कानपुर देहात। धान बेचने के बाद डेढ़ सौ किसानों का भुगतान अटका है। यह धनराशि करीब दो करोड़ रुपये है। हालांकि क्रय एजेंसियों की ओर से भुगतान की प्रक्रिया की गई है। किसानों का भुगतान बैंक खाता एनपीसीआई के मैपर पर अपडेट नहीं होने की वजह से अटका है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मैपर पर बैंक खाता अपडेट नहीं होने की वजह से रुके भुगतान वाले केसों का ब्योरा लीड बैंक मैनेजर को दिया गया है। उनके स्तर पर बैंक मैनेजरों से वार्ता कर किसानों के बैंक खातों को मैपर पर अपडेट कराया जा रहा है। इसी सप्ताह सभी भुगतान होने की उम्मीद है।
सत्यापन के बाद भी करीब आठ हजार किसान नहीं बेच सके धान
कानपुर देहात। धान की खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीयन और इसके बाद सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई थी। जनपद में 23470 किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया था। इसमें से करीब 22 हजार किसानों का सत्यापन पूरा हो गया, जबकि 1470 किसानों का सत्यापन नहीं हो सका। इधर अंतिम तिथि तक 14076 किसानों से धान खरीदा गया। जबकि 7924 किसान सत्यापन के बाद भी धान नहीं बेच सके। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि कई किसानों का धान रिजेक्ट हो गया। वहीं, अन्य खामियों की वजह से भी यह अंतर है। कई किसान सत्यापन के बाद केंद्र पर धान लेकर ही नहीं पहुंचे।
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खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में धान की सरकारी खरीद के लिए अंतिम तिथि 28 फरवरी तय की गई थी। इधर, तय तिथि तक खरीद के लिए किसानों के क्रय केंद्र पर पहुंचने का फीड बैक मिलने पर शासन की ओर से इसे बढ़ाकर 7 मार्च तक कर दिया गया था। शनिवार को पूरे दिन पोर्टल बंद होने से किसी क्रय केंद्र पर धान की खरीद नहीं हो सकी थी। अंतिम दिन सोमवार को अधिकारी व किसान पोर्टल खुलने की आस लगाए थे। सुबह कुछ किसान क्रय केंद्रों पर पहुंचे लेकिन पोर्टल बंद होने की जानकारी मिलने पर घरों को लौट गए। इधर, पूरे दिन खाद्य विभाग का पोर्टल नहीं खुला। इसकी वजह से धान खरीद की मोहलत का किसानों को कोई फायदा नहीं मिला।
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जानकारों के अनुसार, मंडी परिसर स्थित खाद्य विभाग के तीन क्रय केंद्रों पर पहले से धान डंप था। खरीदे गए धान को मिलों को दस दिन में भेजना अनिवार्य है। इसकी ऑनलाइन मॉनीटरिंग होती है। क्रय केंद्रों पर इस अवधि से पहले का धान एकत्र होने को लेकर पोर्टल बंद रहा।
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जिला खाद्य विपणन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि पोर्टल बंद होने की वजह से धान खरीद नहीं हुई।
डेढ़ सौ किसानों का भुगतान अटका
कानपुर देहात। धान बेचने के बाद डेढ़ सौ किसानों का भुगतान अटका है। यह धनराशि करीब दो करोड़ रुपये है। हालांकि क्रय एजेंसियों की ओर से भुगतान की प्रक्रिया की गई है। किसानों का भुगतान बैंक खाता एनपीसीआई के मैपर पर अपडेट नहीं होने की वजह से अटका है। जिला खाद्य विपणन अधिकारी राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि मैपर पर बैंक खाता अपडेट नहीं होने की वजह से रुके भुगतान वाले केसों का ब्योरा लीड बैंक मैनेजर को दिया गया है। उनके स्तर पर बैंक मैनेजरों से वार्ता कर किसानों के बैंक खातों को मैपर पर अपडेट कराया जा रहा है। इसी सप्ताह सभी भुगतान होने की उम्मीद है।
सत्यापन के बाद भी करीब आठ हजार किसान नहीं बेच सके धान
कानपुर देहात। धान की खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीयन और इसके बाद सत्यापन की व्यवस्था लागू की गई थी। जनपद में 23470 किसानों ने ऑनलाइन पंजीयन कराया था। इसमें से करीब 22 हजार किसानों का सत्यापन पूरा हो गया, जबकि 1470 किसानों का सत्यापन नहीं हो सका। इधर अंतिम तिथि तक 14076 किसानों से धान खरीदा गया। जबकि 7924 किसान सत्यापन के बाद भी धान नहीं बेच सके। जिला खाद्य विपणन अधिकारी ने बताया कि कई किसानों का धान रिजेक्ट हो गया। वहीं, अन्य खामियों की वजह से भी यह अंतर है। कई किसान सत्यापन के बाद केंद्र पर धान लेकर ही नहीं पहुंचे।