हाय, मेरे लाल ये क्या हो गया: शव से लिपट कर बोले परिजन- हमने तो कभी पढ़ाई का कभी दबाव भी नहीं बनाया, ये भी कहा
Kanpur News: उज्जवल की मां बार-बार हाय मेरे लाल को उठाओ कहकर चीखती रहीं। बड़े भाई का शव देखकर बिलख रहे छोटे भाई उत्तकल को बुआ और रिश्ते की बहनें चुप कराती रहीं। हालांकि उसकी सिसकियां कम नहीं हो रहीं थीं।
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क्या बताऊं क्या हो गया, मैंने तो बेटों पर कभी पढ़ाई का दबाव ही नहीं डाला। इसने इंजीनियर बनना चाहा तो बस तैयारी के लिए कोटा भेज दिया। मुझे क्या मालूम था कि ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा। ये पीड़ा हैं कोटा के राजीवगांधीनगर में ट्रेन से कटकर जान देने वाले छात्र उज्ज्वल (18) के पनकी ई-ब्लॉक निवासी कृषि वैज्ञानिक पिता दीपक मिश्रा की।
परिजनों और रिश्तेदारों की भीड़ के बीच बेटे के शव के पास बैठे उनके आंसू थम नहीं रहे थे। कोई दिलासा देने उनके पास आता, तो आसुओं के साथ उनका दर्द भी झलक पड़ता। मूलरूप से मऊ के ताजोपुर गांव के रहने वाले दीपक मिश्रा वर्तमान में रायबरेली के कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत हैं। रविवार को बेटे उज्ज्वल (18) ने कोटा में मुंबई-दिल्ली ट्रैक पर ट्रेन से कटकर जान दे दी।
लखनऊ में जेईई मेंस की परीक्षा देनी थी
वह पिछले दो साल से वहां रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। दो अप्रैल को उसे लखनऊ में जेईई मेंस की परीक्षा देनी थी। सोमवार को उन्हें बेटे को लेने जाना था, लेकिन इससे पहले उसकी आत्महत्या की सूचना मिल गई। सोमवार को वह कोटा गए और शव को लेकर मंगलवार रात घर पनकी लौटे। बेटे के शव को देखकर मां की मनोदशा तो और खराब थी।
हाय, मेरे लाल ये क्या हो गया
उज्जवल की मां बार-बार हाय मेरे लाल को उठाओ कहकर चीखती रहीं। बड़े भाई का शव देखकर बिलख रहे छोटे भाई उत्तकल को बुआ और रिश्ते की बहनें चुप कराती रहीं। हालांकि उसकी सिसकियां कम नहीं हो रहीं थीं। पड़ोस में घरों के दरवाजे पर खड़ीं महिलाएं भी सिसकियां भरती रहीं। वहीं, पुरुषों की आंखें भी नम दिखाई दी।