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हाय, मेरे लाल ये क्या हो गया: शव से लिपट कर बोले परिजन- हमने तो कभी पढ़ाई का कभी दबाव भी नहीं बनाया, ये भी कहा

Wed, 02 Apr 2025 12:52 PM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 02 Apr 2025 12:52 PM IST
सार

Kanpur News: उज्जवल की मां बार-बार हाय मेरे लाल को उठाओ कहकर चीखती रहीं। बड़े भाई का शव देखकर बिलख रहे छोटे भाई उत्तकल को बुआ और रिश्ते की बहनें चुप कराती रहीं। हालांकि उसकी सिसकियां कम नहीं हो रहीं थीं।

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Kota Suicide family members hugged the body and said we never forced him to study
मृतक की फाइल फोटो और रोते-बिलखते परिजन - फोटो : amar ujala

विस्तार

क्या बताऊं क्या हो गया, मैंने तो बेटों पर कभी पढ़ाई का दबाव ही नहीं डाला। इसने इंजीनियर बनना चाहा तो बस तैयारी के लिए कोटा भेज दिया। मुझे क्या मालूम था कि ऐसा दिन भी देखना पड़ेगा। ये पीड़ा हैं कोटा के राजीवगांधीनगर में ट्रेन से कटकर जान देने वाले छात्र उज्ज्वल (18) के पनकी ई-ब्लॉक निवासी कृषि वैज्ञानिक पिता दीपक मिश्रा की।

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परिजनों और रिश्तेदारों की भीड़ के बीच बेटे के शव के पास बैठे उनके आंसू थम नहीं रहे थे। कोई दिलासा देने उनके पास आता, तो आसुओं के साथ उनका दर्द भी झलक पड़ता। मूलरूप से मऊ के ताजोपुर गांव के रहने वाले दीपक मिश्रा वर्तमान में रायबरेली के कृषि विज्ञान केंद्र में कार्यरत हैं। रविवार को बेटे उज्ज्वल (18) ने कोटा में मुंबई-दिल्ली ट्रैक पर ट्रेन से कटकर जान दे दी।

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Kota Suicide family members hugged the body and said we never forced him to study
रोते बिलखते परिजन - फोटो : amar ujala

लखनऊ में जेईई मेंस की परीक्षा देनी थी
वह पिछले दो साल से वहां रहकर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा था। दो अप्रैल को उसे लखनऊ में जेईई मेंस की परीक्षा देनी थी। सोमवार को उन्हें बेटे को लेने जाना था, लेकिन इससे पहले उसकी आत्महत्या की सूचना मिल गई। सोमवार को वह कोटा गए और शव को लेकर मंगलवार रात घर पनकी लौटे। बेटे के शव को देखकर मां की मनोदशा तो और खराब थी।

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Kota Suicide family members hugged the body and said we never forced him to study
कोटा में छात्र ने की आत्महत्या - फोटो : अमर उजाला

हाय, मेरे लाल ये क्या हो गया
उज्जवल की मां बार-बार हाय मेरे लाल को उठाओ कहकर चीखती रहीं। बड़े भाई का शव देखकर बिलख रहे छोटे भाई उत्तकल को बुआ और रिश्ते की बहनें चुप कराती रहीं। हालांकि उसकी सिसकियां कम नहीं हो रहीं थीं। पड़ोस में घरों के दरवाजे पर खड़ीं महिलाएं भी सिसकियां भरती रहीं। वहीं, पुरुषों की आंखें भी नम दिखाई दी।

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