शनि-गुरु की वक्री स्थिति में 17 जुलाई से शुरू होगा सावन, जरूर करें ये खास उपाय
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इस बार श्रावण मास (सावन) का शुभारंभ 17 जुलाई को शनि-गुरु की वक्री स्थिति में होगा। ज्योतिषाचार्य पंडित केए दुबे पद्मेश ने बताया कि राहु और केतु सदैव व्रकी रहते हैं। सूर्य और चंद्र कभी वक्री नहीं रहते हैं।
इस समय गोचर में गुरु और शनि वक्री हैं। 8 जुलाई से मंगल अस्त और 10 से बुध अस्त हो जाएगा। ऐसी ग्रह स्थिति में श्रावण मास 17 जुलाई से शुरू होगा। जब कोई ग्रह वक्री होता है, तो और अधिक ऊर्जावान होता है।
गुरु और शनि वक्री हैं। दोनों ही साधना के कारक ग्रह हैं। शिव की साधना में शनि और गुरु का वक्री होना विशेष फलदायी होता है। भविष्य पुराण के अनुसार अगर इस मास में तेल का प्रयोग नहीं करते हैं, तो आयु में वृद्धि होती है।
संतान की वृद्धि होती है। धन वृद्धि और वंश वृद्धि के लिए दूध और दूध से बने पदार्थों का त्याग करना चाहिए। इन सभी पदार्थों को भगवान शिव को अर्पित करें।