पहले बेचते थे खुली चाय, अब 11 राज्यों में छाए, इनसे जानिए 'कैसे बनें सफल व्यापारी'
- 28 साल पहले खोली थी दुकान, 1992 में मोहनी नाम से बाजार में उतारी ब्रांडेड चाय
- एक लाख रुपये और उधारी के माल से की शुरुआत, आज सालाना टर्नओवर 350 करोड़ का
- 2018 में रनियां में छह लाख किलो क्षमता वाला फुली ऑटोमैटिक वेयरहाउस बनवाया
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करीब 28 साल पहले कैनाल पटरी स्थित दुकान से खुली चाय बेचनी शुरू की थी। अब दादा नगर स्थित फैक्ट्री से रोजाना करीब 60 टन चाय सप्लाई करते हैं। मोहनी चाय की सप्लाई 11 राज्यों में है।
मूल रूप से हरियाणा के निवासी स्व. किशोरी लाल अग्रवाल करीब 100 पहले कानपुर आए थे। उनके बेटे केशव प्रसाद अग्रवाल विभिन्न कारोबार से जुड़े रहे। 1980 में केशव प्रसाद ने कैनाल रोड पर खुली चाय का कारोबार शुरू किया। इस काम में उनके बेटे रमेश, दिनेश, सुरेश और मनोज भी जुड़ गए। 80 के दशक में ही खाद्य पदार्थों में मिलावट की बढ़ती घटनाओं के कारण खुली वस्तुओं की मांग घटने लगी। इनकी जगह बड़ी कंपनियों की पैकेट बंद वस्तुओं ने लेनी शुरू कर दी। ग्राहकों का रुझान पैकेट बंद चाय की ओर होने के कारण खुली चाय की मांग में भी दिनोंदिन कमी आने लगी। इसके चलते अग्रवाल बंधुओं ने व्यापार का बदलने की सोची। रमेश चंद्र अग्रवाल ने पिता और भाइयों से विचार-विमर्श कर पैकेट बंद चाय का उत्पादन करने का फैसला किया।
सीमित संसाधनों से साधा बड़ा लक्ष्य
तीन-चार साल की कड़ी मेहनत के बाद शहर के आसपास के क्षेत्रों में मोहनी चाय की मांग बढ़ी। फिर एक के बाद एक नए प्लांट लगने लगे। पनकी में उत्पादन इकाई लगाई। 2015 में दादा नगर में फैक्ट्री स्थापित हुई। इस साल रनियां में चाय उद्योग के सबसे आधुनिक जर्मन तकनीक वाले भंडारगृह (वेयरहाउस) की स्थापना की गई है। इसमें छह हजार टन चाय का भंडारण किया जा सकता है। एक लाख रुपये से शुरू हुआ कारोबार आज 350 करोड़ के टर्नओवर तक पहुंच गया है। वर्तमान में मोहनी चाय की सप्लाई उप्र, उत्तराखंड, उड़ीसा, झारखंड, बिहार, मध्य प्रदेश आदि राज्यों में हो रही है। अग्रवाल बंधु संयुक्त परिवार को सफलता की बड़ी पूंजी मानते हैं। चार भाइयों में सबसे बड़े रमेश कंपनी के प्रबंध निदेशक हैं। सभी भाई स्वरूप नगर में संयुक्त रूप से रहते हैं।
युवाओं को संदेश
दिनेश ने कहा कि आज युवा तुरंत सफलता चाहते हैं। इसके लिए वे वर्तमान जरूरत के लिहाज से कॅरियल का जो भी विकल्प मिलता है, उसे अपना लेते हैं। ऐसे युवा जिस कंपनी या व्यवसाय से जुड़ते हैं, उसमें मन नहीं लगाते। ऐसा करने से वह खुद के साथ दूसरों का भी नुकसान करते हैं। इसलिए अपना लक्ष्य स्पष्ट रखें। साथ ही आजकल के युवा सोशल मीडिया पर बहुत ज्यादा समय दे रहे हैं। उन्हें यह समझना चाहिए कि यह उनके कॅरियर या वर्तमान संपर्कों के लिए सहायक हैं। इनका गुलाम नहीं बनना चाहिए।