Ganga Dussehra: बन रहा तीन महाशक्तियों का संयोग, ये पूजन विधि 10 प्रकार के पापों को करेगी नष्ट
12 जून को पड़ने वाले गंगा दशहरा पर तीन महाशक्तियों संयोग बन रहा है। ये गंगा दशहरा, गायत्री जयंती और रामेश्वर प्रतिष्ठा दिवस हैं। पं. आचार्य अमरेश मिश्र ने कहा कि गंगा, नदी, कूप, तालाब में स्नान करने से 10 प्रकार के पाप नष्ट होते हैं।
जो लोग गंगा स्नान नहीं कर सकते वह जल में गंगा जल मिलाकर तुलसी, शमी पत्र, बेल पत्र, दूरबा डालकर स्नान करें। इससे रोग, दोष, संताप और घर की बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही इस दिन भोले बाबा पर एक लोटा जल चढ़ाने से लक्ष्मी का वास होता है।
13 जून को निर्जला एकादशी है। यह 24 एकादशियों में महाएकादशी मानी जाती है। इस दिन व्रत करने से 100 यज्ञों का लाभ होता है। जल से भरा घड़ा दान करने से घर में सुख, समृद्धि और शांति आएगी।
10 पापों से मुक्ति दिलाता है गंगा स्नान
गंगा ध्यान एवं स्नान से प्राणी दस प्रकार के दोषों- काम, क्रोध, लोभ, मोह, मत्सर, ईर्ष्या, ब्रह्महत्या, छल, कपट, परनिंदा जैसे पापों से मुक्त हो जाता है। इतना ही नहीं अवैध संबंध, अकारण जीवों को कष्ट पहुंचाने, असत्य बोलने व धोखा देने से जो पाप लगता है, वह पाप भी गंगा 'दसहरा' के दिन गंगा स्नान से धुल जाता है।
गंगा दशहरा के महापर्व पर भक्तों को स्नान करते समय मां गंगा का इस मंत्र के द्वारा ध्यान करना चाहिए —
'विष्णु पादार्घ्य सम्भूते गंगे त्रिपथगामिनी! धर्मद्रवीति विख्याते पापं मे हर जाह्नवी।'
गंगा में डुबकी लगाने का मंत्र
गंगा में डुबकी लगाते समय श्रीहरि द्वारा बताए गए इस सर्व पापहारी मंत्र को जपने से व्यक्ति को तत्क्षण लाभ मिलता है —
'ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिण्यै नारायण्यै नमो नमः। '