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किडनी कांड: फोर्टिस हॉस्पिटल की लैब में बदले गए थे डीएनए सैंपल, डॉक्टर-कर्मचारी भी जांच के दायरे में
Fri, 14 Jun 2019 03:07 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 14 Jun 2019 03:07 AM IST
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किडनी कांड में फोर्टिस हॉस्पिटल की महिला कोऑर्डिनेटर उगले कई राज
- फोटो : अमर उजाला
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फरीदाबाद के फोर्टिस हॉस्पिटल की लैब में ही डोनर का डीएनए सैंपल बदलकर रिसीवर से मैच कराया गया। यह खेल कोऑर्डिनेटर सोनिका डबास ने लैब के इंचार्ज सहित डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ मिलकर किया था। सोनिका ने यह बात पूछताछ में एसआईटी को बताई थी।
किडनी कांड में डोनर (किडनी देने वाला) का डीएनए सैंपल रिसीवर (किडनी लेने वाला) के डीएनए सैंपल से मैच कराया जाता था। इसके लिए डोनर के डीएनए सैंपल को बदला जाता था। यहां पर रिसीवर के किसी रिश्तेदार का डीएनए सैंपल दिखाया जाता था।
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किडनी कांड में डोनर (किडनी देने वाला) का डीएनए सैंपल रिसीवर (किडनी लेने वाला) के डीएनए सैंपल से मैच कराया जाता था। इसके लिए डोनर के डीएनए सैंपल को बदला जाता था। यहां पर रिसीवर के किसी रिश्तेदार का डीएनए सैंपल दिखाया जाता था।
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डीएनए सैंपल बदलकर डोनर व रिसीवर बनाए जाते थे रिश्तेदार
किडनी कांड में पकड़े गए डॉक्टर दीपक शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
एसआईटी के मुताबिक ये पूरा खेल फोर्टिस हॉस्पिटल की लैब में होता था। इसलिए लैब के अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछताछ के बाद उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।पुलिस सूत्रों के मुताबिक फोर्टिस हॉस्पिटल की लैब के तीन लोगों के नाम सामने आए हैं। एसआईटी पूछताछ के लिए तीनों को नोटिस देने की तैयारी में हैं।
कई डोनरों की जांचें दिल्ली की अलग-अलग पैथालॉजी में कराई गईं थीं। सवाल है कि क्या एसआईटी इन पर कार्रवाई करेगी या नहीं। हालांकि एसआईटी के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी पैथालॉजी में कोई भी शख्स जाकर जांचें करवा सकता है। इसके लिए पैथालॉजी के डॉक्टरों को मरीज के परिचय पत्र समेत अन्य दस्तावेजों की जरूरत नहीं होती है। शायद इसलिए ये कार्रवाई से बच जाएं।
कई डोनरों की जांचें दिल्ली की अलग-अलग पैथालॉजी में कराई गईं थीं। सवाल है कि क्या एसआईटी इन पर कार्रवाई करेगी या नहीं। हालांकि एसआईटी के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी पैथालॉजी में कोई भी शख्स जाकर जांचें करवा सकता है। इसके लिए पैथालॉजी के डॉक्टरों को मरीज के परिचय पत्र समेत अन्य दस्तावेजों की जरूरत नहीं होती है। शायद इसलिए ये कार्रवाई से बच जाएं।