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Kanpur News: केस्को का बिल उद्यमियों को दे रहा झटका
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कानपुर। केस्को की कार्यप्रणाली से उद्यमियों में रोष है। उनका आरोप है कि विभाग की मनमानी का खामियाजा उन्हें आर्थिक नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। सोमवार को वह केस्को एमडी के सामने अपनी पीड़ा भी सुना चुके हैं। उद्यमियों के अनुसार एक मामले में 100 किलोवॉट के स्वीकृत लोड पर तीन किलोवॉट की अतिरिक्त सिक्योरिटी मनी के बजाय 103 किलोवॉट की जमा कराई गई है। दूसरे मामले में मीटर की नियमित जांच के बावजूद आठ साल बाद उसके सुस्त चलने का पता चला और 58 लाख जुर्माने का नोटिस दे दिया।
लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव अमन घई ने बताया कि इस्पातनगर स्थित उनकी नट-बोल्ट फैक्टरी का स्वीकृत लोड 100 किलोवॉट है। मई-जून में इससे अधिक लोड दर्ज होने पर इसे 103 किलोवॉट माना गया। उनके मुताबिक पहले से जमा 100 किलोवॉट की सिक्योरिटी मनी के अलावा केवल तीन किलोवॉट की अतिरिक्त राशि जमा होनी चाहिए थी। 1500 रुपये प्रति किलोवॉट के हिसाब से यह 4500 रुपये होती है। आरोप है कि केस्को ने इसके बजाय पूरी 103 किलोवॉट की सिक्योरिटी मनी जमा करा ली।
आठ साल बाद पता चला मीटर सुस्त
कोऑपरेटिव इस्टेट के अध्यक्ष विजय कपूर ने बताया कि दादानगर स्थित वीरेंद्र मिश्रा की फैक्टरी के मीटर की हर माह एमआरआई जांच होती है। इसके बावजूद 2025 में केस्को ने नोटिस जारी कर मीटर को वर्ष 2017 से सुस्त बताते हुए 58 लाख रुपये जुर्माना मांगा। वीरेंद्र के मुताबिक अचानक इतनी बड़ी देनदारी सामने आने से उन्हें दिल का दौरा आ गया। उन्होंने मीटर की जांच करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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बिल स्पष्ट न होने और न आने की भी शिकायतें
उद्योग व्यापार संघ (फीटा) के महासचिव उमंग अग्रवाल ने बताया कि बिजली के बिलों में पावर फैक्टर, एफपीपीए प्रतिशत समेत कई जरूरी जानकारियां दर्ज नहीं होतीं। संशोधित बिल में भी बिल बदलने का आधार स्पष्ट नहीं किया जाता। इससे उपभोक्ता को बिल समझने में परेशानी होती है। वहीं फीटा के मयंक फेरवानी ने बताया कि चकेरी स्थित उनकी फैक्टरी में अप्रैल में 55 केवी का मीटर लगाया गया था। केस्को ने 60 से 90 दिन में पहला बिल आने की बात कही थी लेकिन चार माह बीतने के बाद भी बिल नहीं आया है।
वर्जन
उद्यमियों की शिकायतों का जल्द निस्तारण किया जाएगा। जिन मामलों में विद्युत नियामक आयोग के स्तर से निर्णय होना है संबंधित पीड़ितों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। - नेहा जैन, प्रबंध निदेशक, केस्को
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लघु उद्योग भारती के प्रदेश सचिव अमन घई ने बताया कि इस्पातनगर स्थित उनकी नट-बोल्ट फैक्टरी का स्वीकृत लोड 100 किलोवॉट है। मई-जून में इससे अधिक लोड दर्ज होने पर इसे 103 किलोवॉट माना गया। उनके मुताबिक पहले से जमा 100 किलोवॉट की सिक्योरिटी मनी के अलावा केवल तीन किलोवॉट की अतिरिक्त राशि जमा होनी चाहिए थी। 1500 रुपये प्रति किलोवॉट के हिसाब से यह 4500 रुपये होती है। आरोप है कि केस्को ने इसके बजाय पूरी 103 किलोवॉट की सिक्योरिटी मनी जमा करा ली।
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आठ साल बाद पता चला मीटर सुस्त
कोऑपरेटिव इस्टेट के अध्यक्ष विजय कपूर ने बताया कि दादानगर स्थित वीरेंद्र मिश्रा की फैक्टरी के मीटर की हर माह एमआरआई जांच होती है। इसके बावजूद 2025 में केस्को ने नोटिस जारी कर मीटर को वर्ष 2017 से सुस्त बताते हुए 58 लाख रुपये जुर्माना मांगा। वीरेंद्र के मुताबिक अचानक इतनी बड़ी देनदारी सामने आने से उन्हें दिल का दौरा आ गया। उन्होंने मीटर की जांच करने वाले कर्मचारियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
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बिल स्पष्ट न होने और न आने की भी शिकायतें
उद्योग व्यापार संघ (फीटा) के महासचिव उमंग अग्रवाल ने बताया कि बिजली के बिलों में पावर फैक्टर, एफपीपीए प्रतिशत समेत कई जरूरी जानकारियां दर्ज नहीं होतीं। संशोधित बिल में भी बिल बदलने का आधार स्पष्ट नहीं किया जाता। इससे उपभोक्ता को बिल समझने में परेशानी होती है। वहीं फीटा के मयंक फेरवानी ने बताया कि चकेरी स्थित उनकी फैक्टरी में अप्रैल में 55 केवी का मीटर लगाया गया था। केस्को ने 60 से 90 दिन में पहला बिल आने की बात कही थी लेकिन चार माह बीतने के बाद भी बिल नहीं आया है।
वर्जन
उद्यमियों की शिकायतों का जल्द निस्तारण किया जाएगा। जिन मामलों में विद्युत नियामक आयोग के स्तर से निर्णय होना है संबंधित पीड़ितों को अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है। - नेहा जैन, प्रबंध निदेशक, केस्को