UP: साढ़े सात घंटे आईसीयू में रखा, फिर भी एक बोतल खून न चढ़ाया, बांदा की दुष्कर्म पीड़िता बच्ची की मौत का मामला
Kanpur News: रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार कौशल ने कहा कि पीडियाट्रिक सर्जन न होने की वजह से हैलट रेफर किया। खून न चढ़ाने के संबंध में तर्क दिया कि बच्ची को होश नहीं रहा था। इसलिए खून नहीं चढ़ाया।
विस्तार
दरिंदगी का शिकार बांदा की तीन साल की बच्ची को अगर वक्त से खून मिल जाता, तो शायद उसकी जान बच सकती थी। लेकिन बांदा के ट्रॉमा सेंटर और रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के परिसर में खून की व्यवस्था रही है, फिर भी उसे खून नहीं चढ़ाया गया।
इसके अलावा मेडिकल कॉलेज में पीडियाट्रिक सर्जन होने के बाद भी बच्ची को साढ़े सात घंटे रखा गया। फिर पीडियाट्रिक सर्जन न होने के कारण बताकर उसे हैलट रेफर कर दिया गया। दरिंदे ने मासूम को अपनी हवस का शिकार बनाकर मौत के मुंह में झोंक दिया।
घायल जननांगों से बहता रहा खून
हालांकि, उसकी जान बचाने के लिए डॉक्टरों में संजीदगी नजर नहीं आई। बच्ची को पहले बांदा के ट्रामा सेंटर में ले जाया गया। यहां स्त्री रोग, बालरोग विशेषज्ञ और फिजीशियन ने देखा। ड्रिप लगाकर सामान्य सा इलाज किया। उसके घायल जननांगों से खून बहता रहा, लेकिन खून चढ़ाने की जरूरत नहीं समझी।
आईसीयू में रखा, लेकिन खून नहीं चढ़ाया
उसे रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया। यहां उसे साढ़े सात घंटे आईसीयू में रखा तो जरूर लेकिन खून नहीं चढ़ाया। ड्रिप लगाकर एंटी बायोटिक आदि दवाएं दी गईं। खून न चढ़ाने के संबंध में वहां के प्राचार्य डॉ. सुनील कुमार कौशल ने कहा कि पीडियाट्रिक सर्जन न होने की वजह से हैलट रेफर किया।
डॉक्टर के तर्क अलग-अलग
खून न चढ़ाने के संबंध में तर्क दिया कि बच्ची को होश नहीं रहा। इसी से खून नहीं चढ़ाया। वहीं पूर्व महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा डॉ. वीएन त्रिपाठी का कहना है कि अगर जरूरत थी, तो बेहोशी में भी बच्ची को खून चढ़ाया जा सकता था।
एक यूनिट खून रखा था
बच्ची को चार जून की शाम छह बजे हैलट में भर्ती किया गया। मौके पर पहुंचे जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला पहुंचे और कहा कि बच्ची के ब्लड लॉस हुआ है। इसके बाद तुरंत उसे ब्लड खून चढ़ाया गया।
परिजनों ने सर्जरी के लिए नहीं दी सहमति
कॉलेज के बालरोग विभागाध्यक्ष डॉ. शैलेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि बच्ची को एक यूनिट ब्लड दिया गया। इसके बाद पीडियाट्रिक सर्जन सर्जरी प्लान की। इसके लिए भी एक यूनिट खून रखा गया, लेकिन परिजनों ने सर्जरी के लिए कंसेंट नहीं दी थी।
ये हुई लापरवाही
- साढ़े सात घंटे आईसीयू में रखा, एक बोतल खून न चढ़ाया।
- बांदा के ट्रॉमा सेंटर, मेडिकल कॉलेज के परिसर में ब्लड बैंक भी है।
- पीडियाट्रिक सर्जन नहीं फिर भी रेफर करने में देर की।
- 16 घंटे के बाद हैलट में भर्ती होने के बाद चढ़ाया गया ब्लड।