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कारगिल विजय दिवस: पाकिस्तान से 1971 में हुई लड़ाई में शामिल रहे रामसेवक सिंह को आज भी मलाल, कही ये बात
Mon, 26 Jul 2021 10:24 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
सुरजीत तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
सुरजीत तिवारी, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 26 Jul 2021 10:24 AM IST
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कारगिल विजय दिवस
- फोटो : अमर उजाला
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पाकिस्तान से 1971 में हुए युद्ध मेें जीती गई जमीन लौटाने का मलाल रामसेवक सिंह तोमर को आज भी है। कहते हैं वो जमीन पाकिस्तान को लौटाई न गई होती तो कारगिल युद्ध जैसी नौबत न आती। भारत-पाक युद्ध में शामिल रहे रामसेवक बताते हैं कि तीन दिसंबर 1971 को पाकिस्तान ने देश पर हमला बोल दिया था, जिसका हमारी सेना ने मुंहतोड़ जवाब दिया और उसकी सीमा में घुसकर कब्जा कर लिया था।
एक साल तक हम लोगों ने उस जमीन की रखवाली की। कई शहादत देने के बाद जीती गई जमीन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को लौटा दी। चकेरी के गांधीग्राम निवासी रामसेवक सिंह तोमर (75) मूलरूप से भिंड मुरैना के निवासी हैं। वे 1965 में सेना में भर्ती हुए। ट्रेनिंग राजस्थान के नसीराबाद में हुई। इसके बाद 1971 में फिरोजपुर पंजाब में ट्रेनिंग पर थे।
बताते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान ही पाकिस्तान की ओर से भारत पर हमले की सूचना आई। रात को ही किनारे के गांव खाली कराए गए। फिर गाड़ियों से और पैदल रास्ता तय कर जम्मू तवी नदी पार कर पाक की सीमा में जा घुसे। भारतीय सेनाओं के हमले इतने तेज थे कि पाक सेना कुछ सोच समझ ही नहीं पा रही थी।
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युद्ध में मेरे सामने भिंड निवासी कुमार सिंह, राजस्थान निवासी चतुर सिंह, भिंड निवासी जबर सिंह घायल हो गए लेकिन उनके मुंह से भारत माता के जयकारे लगने बंद नहीं हुए। भारतीय सेना के मनोबल और पराक्रम के आगे पाकिस्तान सेना ने 13 दिन में ही घुटने टेक दिए। इसके बाद जीती हुई जमीन पर हमारा एक साल कब्जा रहा।
इसके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सेना के जनरल मानिक शाह की पाक से हुई बातचीत के बाद उन लोगों को वापस बुला लिया गया। जीती जमीन पाक को लौटा दी गई। कहते हैं उस समय जमीन लौटाकर पाकिस्तान का दुस्साहस बढ़ाने का काम किया गया। कारगिल युद्ध इसी का नतीजा है। हालांकि इसमें भी पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी लेकिन हमारे भी कई सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए।
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एक साल तक हम लोगों ने उस जमीन की रखवाली की। कई शहादत देने के बाद जीती गई जमीन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पाकिस्तान को लौटा दी। चकेरी के गांधीग्राम निवासी रामसेवक सिंह तोमर (75) मूलरूप से भिंड मुरैना के निवासी हैं। वे 1965 में सेना में भर्ती हुए। ट्रेनिंग राजस्थान के नसीराबाद में हुई। इसके बाद 1971 में फिरोजपुर पंजाब में ट्रेनिंग पर थे।
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बताते हैं कि ट्रेनिंग के दौरान ही पाकिस्तान की ओर से भारत पर हमले की सूचना आई। रात को ही किनारे के गांव खाली कराए गए। फिर गाड़ियों से और पैदल रास्ता तय कर जम्मू तवी नदी पार कर पाक की सीमा में जा घुसे। भारतीय सेनाओं के हमले इतने तेज थे कि पाक सेना कुछ सोच समझ ही नहीं पा रही थी।
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युद्ध में मेरे सामने भिंड निवासी कुमार सिंह, राजस्थान निवासी चतुर सिंह, भिंड निवासी जबर सिंह घायल हो गए लेकिन उनके मुंह से भारत माता के जयकारे लगने बंद नहीं हुए। भारतीय सेना के मनोबल और पराक्रम के आगे पाकिस्तान सेना ने 13 दिन में ही घुटने टेक दिए। इसके बाद जीती हुई जमीन पर हमारा एक साल कब्जा रहा।
इसके बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और सेना के जनरल मानिक शाह की पाक से हुई बातचीत के बाद उन लोगों को वापस बुला लिया गया। जीती जमीन पाक को लौटा दी गई। कहते हैं उस समय जमीन लौटाकर पाकिस्तान का दुस्साहस बढ़ाने का काम किया गया। कारगिल युद्ध इसी का नतीजा है। हालांकि इसमें भी पाकिस्तान को मुंह की खानी पड़ी लेकिन हमारे भी कई सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए।