Kanpur Weather Update: आज दिन में चलेंगी तेज हवाएं...बढ़ेगी ठंड, पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने बदलेगा मौसम
Weather News: मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि इस पूरे महीने तक आसमान साफ रहने के साथ रात के समय शीत अधिक पड़ेगी। धूप में देर तक रहने पर हल्की गर्मी लग सकती है, लेकिन धूप से हटते ही ठंडक भी लगने लगेगी।
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कानपुर में सोमवार से धूप के साथ ठंडी हवाओं की रफ्तार बढ़ सकती है। इससे दिन में ठंड तेज होने की संभावना है। सीएसए के मौसम विभाग की ओर से जारी सूचना के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ के कमजोर होने की वजह से मौसम में परिवर्तन नजर आएगा।
ऐसे में कोहरा कम होगा और दिन में 10 बजे के बाद हवाएं चलने का सिलसिला बढ़ जाएगा। इस बीच रविवार को सुबह से लेकर शाम तक बादल और बीच-बीच में धूप बनी रही। दिन और रात के तापमान में एक-एक डिग्री वृद्धि दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 24 डिग्री और न्यूनतम आठ डिग्री सेल्सियस रहा।
बताया कि अगले पांच दिनों में आसमान साफ रहने के आसार हैं। बारिश की कोई संभावना नहीं है। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि इस पूरे महीने तक आसमान साफ रहने के साथ रात के समय शीत अधिक पड़ेगी। धूप में देर तक रहने पर हल्की गर्मी लग सकती है, लेकिन धूप से हटते ही ठंडक भी लगने लगेगी।
रेड जोन में शहर, प्रदूषण की मात्रा 310 एक्यूआई
कोहरे और धुंध के बीच महानगर में प्रदूषण की मात्रा भी रेड जोन में पहुंच गई है। शनिवार को शहर के बीचोंबीच स्थित नेहरूनगर में स्थापित केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के प्रदूषण मापक मीटर में प्रदूषण की मात्रा 310 एक्यूआई रिकॉर्ड की गई। सीपीसीबी के अनुसार ऐसी स्थिति को बहुत खराब श्रेणी यानी रेड जोन में रखा जाता है।
प्रदूषित कण आंखों के लिए भी हानिकारक हैं
इसके अलावा किदवईनगर और कल्याणपुर के प्रदूषण मापक मीटर में प्रदूषण की मात्रा 200 एक्यूआई के करीब है। इसमें धुआं और धूल के 2.5 पीएम मात्रा वाले कण शामिल हैं, जो सांस के जरिये सीधे फेफड़ों में पहुंचकर नुकसान पहुंचाते हैं। साथ ही ये प्रदूषित कण आंखों के लिए भी हानिकारक हैं।
199 एक्यूआई तक सामान्य श्रेणी में आता है
बोर्ड की ओर से प्रदूषण का जो मानक रखा गया है, उसके अनुसार 50 एक्यूआई से ऊपर मात्रा बढ़ना नुकसानदेय माना जाता है। 199 एक्यूआई तक सामान्य श्रेणी में आता है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार नमी होने की वजह से प्रदूषित कण आपस में चिपककर एक परत के रूप में जमीन से करीब तीन किमी ऊपर जमा हो जाते हैं। बारिश और तेज धूप या फिर हवा चलने पर ये बिखर जाते हैं।