Kanpur Weather Update: तेज धूप...तेज हवा के बाद हल्की बारिश, पारा चार डिग्री लुढ़का, मौसम में रहेगा उतार-चढ़ाव
Weather News: कानपुर समेत आसपास के जिलों का मौसम लगातार करवट बदल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को कानपुर में तेज हवाओं के साथ हल्की बारिश हो सकती है। साथ ही, नौ जून तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
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कानपुर में बादल और हल्की बारिश के बीच सोमवार को दिन में तीन बजे के बाद मौसम अच्छा हो गया। इससे पहले झुलसाने वाली धूप रही। सीएसए की ओर से जारी पूर्वानुमान के अनुसार नौ जून तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। इस बीच अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम 24.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
अधिकतम तापमान में चार डिग्री की कमी आई। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं हल्की बारिश हुई। गोविंदनगर में करीब तीन मिमी बारिश हुई। इसी तरह हवा की रफ्तार भी 15 किलोमीटर प्रति घंटा रही। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर तेज रहा।
इस बीच हवा में दिन के समय नमी 51 और न्यूनतम 35 प्रतिशत रही। डॉ. पांडेय के अनुसार चक्रवाती हवाओं का एक क्षेत्र दक्षिण-पश्चिमी राजस्थान के पास बना हुआ है। इसकी वजह से मंगलवार को भी तेज हवा के साथ कहीं बूंदाबांदी संभव है। हालांकि नौ जून तक मौसम में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।
एक सप्ताह में सामान्य से दो गुना हो गया प्रदूषण
तेज हवाओं से उड़ रही धूल की वजह से शहरी क्षेत्र के प्रदूषण में भी इजाफा हो रहा है। एक सप्ताह के अंतराल में 124 एक्यूआई पर पहुंच गया। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से जारी सप्ताह के प्रदूषण की स्थिति इस तरह रही। 31 को 102, एक जून को 77, दो को 87, तीन को 99, चार को 96 व पांच को 124 एक्यूआई रिकार्ड किया गया।
किसानों को उठाना पड़ा था नुकसान
पिछले वर्ष 2022 में कम बारिश के चलते किसानों को काफी नुकसान हुआ था। समय पर बारिश नहीं होने की वजह से किसानों ने धान की बुवाई में देरी की थी। जिन किसानों ने समय से बुवाई कर भी दी थी, उन्हें सिंचाई की संकट के चलते खासा नुकसान उठाना पड़ा था। धान के उत्पादन में भी भारी कमी दर्ज की गई थी।
किसानों को इंतजार करना पड़ेगा
इस साल भी मॉनसून की देरी की मार किसानों पर पड़ सकती है। मानसून में देरी के चलते किसानों को अपनी फसलों की बुवाई के लिए इंतजार करना पड़ेगा। ऐसे में किसानों की फसल समय से तैयार नहीं हो पाएगी। इस असर फसल उत्पादन पर भी पड़ेगा।