Kanpur Weather Update: सूरज के तेवर तल्ख...44.6 डिग्री पहुंचा पारा, बिपरजॉय चक्रवात का भी पड़ सकता है असर
Weather News: पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार रात का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी तरह हवा में नमी अधिकतम 42 और न्यूनतम 33 डिग्री रिकॉर्ड की गई।
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कानपुर में पिछले तीन दिन से शहर का अधिकतम तापमान 44 डिग्री से ऊपर चल रहा है। मंगलवार को दिन का पारा 44.6 डिग्री और न्यूनतम 33 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के मौसम विभाग के अनुसार सुबह नौ बजे से ही तापमान में बढ़ोतरी शुरू हो जाती है।
10 बजे तापमान 30.8 डिग्री रहा, जो 11 बजे तक 34.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। मौसम विभाग प्रमुख डॉ. एसएन पांडेय के अनुसार इस बार मानसून में देरी की वजह से गर्मी का सिलसिला पूरे महीने इसी तरह रहने की संभावना है। बीच-बीच में कुछ समय के लिए मौसम में बदलाव हो सकता है।
इसका कारण है, पश्चिमी विक्षोभ और अरब सागर से उठने वाला चक्रवात। उन्होंने बताया कि पिछले वर्षों की अपेक्षा इस बार रात का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इसी तरह हवा में नमी अधिकतम 42 और न्यूनतम 33 डिग्री रिकॉर्ड की गई।
बिपरजॉय चक्रवात का भी पड़ सकता है असर
मौसम विशेषज्ञ डॉ. एसएन पांडेय ने बताया कि मुंबई के आसपास समुद्र में बिपरजॉय को लेकर जो अलर्ट जारी किया गया है, उसका असर महानगर व इसके आसपास भी संभावित है। बताया कि यदि यह चक्रवात मध्यप्रदेश तक आता है, तो कानपुर और बुंदेलखंड क्षेत्र में तेज हवा के साथ घने बादल और बारिश भी हो सकती है।
इस तरह से दिन में बढ़ा तापमान
- सुबह 9 बजे 25.5
- सुबह 10 बजे 30.8
- सुबह 11 बजे 34.4
- दोपहर 12 बजे 40.4
- दोपहर 1 से 2 बजे 44.6
13 जून को पिछले वर्षों में पारा
- 2020 में 38
- 2021 में 32.4
- 2022 में 43.8
- 2023 में 44.6
देर से दस्तक देगा मानसून, कम बारिश की संभावना
बदलते मानसून ने पुरानी सभी भविष्यवाणियों को नकारने के संकेत दिए हैं। मानसून भी देर से आने की संभावना है और सामान्य की तुलना में बारिश का प्रतिशत भी बहुत कम होने की आशंका जताई जा रही है। ये अलनीनो और विपरजॉय के प्रभाव का परिणाम है। पहले अनुमान लगाए जा रहे थे कि मानसून समय पर दस्तक देगा और भरपूर बारिश होगी।
बादल बनने में अलनीनो रुकावट
ग्लोबल वार्मिंग की वजह से ही अलनीनो का प्रकोप देखने को मिल रहा है। इस वजह से समुद्र के पानी का तापमान बढ़ने के साथ हवा में भी गर्मी पैदा हो रही है। इस वजह से बादल बनने की प्रक्रिया में रुकावट आएगी। जबकि बादल बनने के लिए ठंडी हवा की जरूरत होती है। इस वजह से बादल कम बनने के आसार बन रहे हैं।