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Kanpur: प्रदेश में भूमि खरीदेगा यूपीसीडा, 51वीं बोर्ड बैठक में 19 रखे गए थे प्रस्ताव, 6 पर लग सकी मुहर
Mon, 03 Aug 2026 10:55 PM IST
Shikha Pandey
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: Shikha Pandey
Updated Mon, 03 Aug 2026 10:55 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और नई इंडस्ट्रियल टाउनशिप विकसित करने को लेकर उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में भूमि खरीदने और अधिग्रहित करने का निर्णय लिया है। अपर मुख्य सचिव, अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग आलोक कुमार की अध्यक्षता में सोमवार को लोकभवन में आयोजित यूपीसीडा की 51वीं बोर्ड बैठक में कुल 19 प्रस्ताव रखे गए, जिनमें छह प्रमुख प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। जिसमें भूमि खरीदने का सबसे बड़ा निर्णय है। इससे प्रदेश में औद्योगिक क्षेत्र को बढ़ावा के साथ रोजगार मिलेगा।
बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये अधिक बजट की स्वीकृति दी गई। बीते वर्ष यूपीसीडा का बजट 6 हजार 53 करोड़ रुपये था जिसे इस वर्ष बढ़ाकर स्वीकृति दी गई है। यह बजट मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, वर्तमान औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में भूमि के अधिग्रहण एवं खरीदने का रहा।
यूपीसीडा इस भूमि पर नई औद्योगिक टाउनशिप और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करेगा। इससे बड़े निवेशकों को एकमुश्त विकसित भूमि उपलब्ध होगी, उद्योगों की स्थापना में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होने की संभावना है। इसके साथ औद्योगिक क्षेत्रों में छोटी-छोटी मरम्मत और रखरखाव के कार्य वित्तीय स्वीकृति के अभाव में लंबित न रहें, इसके लिए बोर्ड ने यूपीसीडा के क्षेत्रीय कार्यालयों तथा निर्माण एवं विद्युत खंडों को 10 लाख तक की आकस्मिक निधि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इससे सड़क, विद्युत, जलापूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाओं की आपातकालीन मरम्मत तत्काल कराई जा सकेगी। वहीं बैठक में लंबे समय से बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों के पुनर्जीवन के लिए भी नई रिजम्पशन नीति तैयार करने को मंजूरी दी गई। नई नीति के तहत प्राधिकरण की देनदारियां चुकाकर नो-ड्यूज लेने वाली इकाइयों के साथ-साथ उत्पादन शुरू होने के बाद बंद हो चुकी इकाइयों को भी राहत मिलेगी। इससे बंद पड़ी औद्योगिक परिसंपत्तियों का दोबारा उपयोग होगा, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और विकसित हो रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से नई गति मिल रही है। यूपीसीडा का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंड विकसित करना नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर तैयार करना है। दोगुने बजट और बड़े पैमाने पर भूमि बैंक तैयार करने से प्रदेश ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा।
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7 नवंबर तक लीज डीड कराने का मौका
यूपीसीडा की आवासीय योजनाओं में वर्षों से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए बोर्ड ने पात्र आवंटियों को 7 नवंबर 2026 तक विलंब शुल्क के साथ लीज डीड निष्पादित कराने का अंतिम अवसर देने का फैसला किया। तय समय सीमा के बाद लीज डीड नहीं कराने वाले आवंटियों का आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा।
फतेहपुर की कताई मिल और त्रिशुंडी औद्योगिक क्षेत्र का नक्शा स्वीकृत
बोर्ड ने फतेहपुर की कताई मिल, संधिनावा औद्योगिक क्षेत्र तथा अयोध्या के त्रिशुंडी औद्योगिक क्षेत्र के ले-आउट (तलपट) मानचित्रों को भी मंजूरी दे दी। इसके बाद इन क्षेत्रों में भूखंडों का नियोजित विकास, सड़क, बिजली, जलापूर्ति, ड्रेनेज और अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण तेजी से किया जाएगा। साथ ही निवेशकों को भूखंड आवंटन की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
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बोर्ड बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपये अधिक बजट की स्वीकृति दी गई। बीते वर्ष यूपीसीडा का बजट 6 हजार 53 करोड़ रुपये था जिसे इस वर्ष बढ़ाकर स्वीकृति दी गई है। यह बजट मुख्य रूप से भूमि अधिग्रहण, नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास, वर्तमान औद्योगिक क्षेत्रों के विस्तार और आधारभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। इसके साथ सबसे महत्वपूर्ण निर्णय प्रदेश के अलग-अलग जनपदों में भूमि के अधिग्रहण एवं खरीदने का रहा।
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यूपीसीडा इस भूमि पर नई औद्योगिक टाउनशिप और औद्योगिक क्लस्टर विकसित करेगा। इससे बड़े निवेशकों को एकमुश्त विकसित भूमि उपलब्ध होगी, उद्योगों की स्थापना में तेजी आएगी और स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होने की संभावना है। इसके साथ औद्योगिक क्षेत्रों में छोटी-छोटी मरम्मत और रखरखाव के कार्य वित्तीय स्वीकृति के अभाव में लंबित न रहें, इसके लिए बोर्ड ने यूपीसीडा के क्षेत्रीय कार्यालयों तथा निर्माण एवं विद्युत खंडों को 10 लाख तक की आकस्मिक निधि उपलब्ध कराने का निर्णय लिया। इससे सड़क, विद्युत, जलापूर्ति और अन्य आवश्यक सेवाओं की आपातकालीन मरम्मत तत्काल कराई जा सकेगी। वहीं बैठक में लंबे समय से बंद पड़ी औद्योगिक इकाइयों के पुनर्जीवन के लिए भी नई रिजम्पशन नीति तैयार करने को मंजूरी दी गई। नई नीति के तहत प्राधिकरण की देनदारियां चुकाकर नो-ड्यूज लेने वाली इकाइयों के साथ-साथ उत्पादन शुरू होने के बाद बंद हो चुकी इकाइयों को भी राहत मिलेगी। इससे बंद पड़ी औद्योगिक परिसंपत्तियों का दोबारा उपयोग होगा, नए निवेश आकर्षित होंगे और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक प्रगति को पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और विकसित हो रहे मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स नेटवर्क से नई गति मिल रही है। यूपीसीडा का लक्ष्य केवल औद्योगिक भूखंड विकसित करना नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय सुविधाओं से युक्त आधुनिक औद्योगिक क्लस्टर तैयार करना है। दोगुने बजट और बड़े पैमाने पर भूमि बैंक तैयार करने से प्रदेश ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेगा।
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7 नवंबर तक लीज डीड कराने का मौका
यूपीसीडा की आवासीय योजनाओं में वर्षों से लंबित मामलों के निस्तारण के लिए बोर्ड ने पात्र आवंटियों को 7 नवंबर 2026 तक विलंब शुल्क के साथ लीज डीड निष्पादित कराने का अंतिम अवसर देने का फैसला किया। तय समय सीमा के बाद लीज डीड नहीं कराने वाले आवंटियों का आवंटन स्वतः निरस्त कर दिया जाएगा।
फतेहपुर की कताई मिल और त्रिशुंडी औद्योगिक क्षेत्र का नक्शा स्वीकृत
बोर्ड ने फतेहपुर की कताई मिल, संधिनावा औद्योगिक क्षेत्र तथा अयोध्या के त्रिशुंडी औद्योगिक क्षेत्र के ले-आउट (तलपट) मानचित्रों को भी मंजूरी दे दी। इसके बाद इन क्षेत्रों में भूखंडों का नियोजित विकास, सड़क, बिजली, जलापूर्ति, ड्रेनेज और अन्य आधारभूत सुविधाओं का निर्माण तेजी से किया जाएगा। साथ ही निवेशकों को भूखंड आवंटन की प्रक्रिया भी अधिक पारदर्शी और समयबद्ध होगी।