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Kanpur: कार्डियोलॉजी में खुलेगा प्रदेश का पहला कार्डिएक ट्रांसप्लांट सेंटर, पांच चरणों में होगा भवन का निर्माण

Wed, 24 Sep 2025 10:02 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Wed, 24 Sep 2025 10:02 AM IST
सार

Kanpur News: निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर ब्रेन डेड रोगियों के अंगदान के लिए अभियान चलाएगा। ब्रेन डेड रोगियों का हृदय, लिवर, फेफड़े, गुर्दे आदि अंग दूसरे जरूरतमंदों को नया जीवन दे सकते हैं।

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Kanpur UPs first cardiac transplant center will open in Cardiology building will be constructed in five phases
एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर के एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में प्रदेश का पहला एपेक्स कार्डिएक ट्रांसप्लांट सेंटर खुलेगा। इसमें हृदय प्रत्यारोपण के साथ लिवर ट्रांसप्लांट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। इसमें अंगों के प्रत्यारोपण के लिए सारी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। 12 तल के ट्रांसप्लांट सेंटर में एयर एंबुलेंस के उतरने की भी सुविधा रहेगी। इससे गंभीर रोगियों को लाने-ले जाने में आसानी रहेगी। सेंटर के भवन का निर्माण पांच चरणों में किया जाएगा। इसका प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है।

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मेट्रो के पांच सौ मीटर के दायरे में होने की वजह से कार्डियोलॉजी टीओडी जोन में आ गया है। इस वजह से कार्डिएक ट्रांसप्लांट सेंटर के खाका में तब्दीली कर दी गई है। कार्डियोलॉजी प्रबंधन ने ट्रांसप्लांट सेंटर का रिवाइज्ड प्लान तैयार करके शासन को भेजा है। अब ट्रांसप्लांट सेंटर का भवन 12 तल का रहेगा। सेंटर के लिए पहले आठ तल का भवन प्रस्तावित किया गया था। इसके बजट का आकलन तीन सौ करोड़ रुपये था।

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अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था रहेगी
कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं प्रोफेसर डॉ. राकेश कुमार वर्मा का कहना है कि कार्डिएक ट्रांसप्लांट सेंटर विभिन्न अंगों के प्रत्यारोपण के लिए विशिष्ट सेंटर होगा। हृदय और लिवर के अलावा और भी प्रत्यारोपण हो सकेंगे। इसमें वर्ल्ड क्लास अत्याधुनिक उपकरणों की व्यवस्था रहेगी। विश्व के विभिन्न ट्रांसप्लांट सेंटरों में की गई व्यवस्था का भी अध्ययन किया जा रहा है, जिससे इसे सर्वश्रेष्ठ सेंटर बनाया जा सके। इंस्टीट्यूट में बाकी अन्य सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ और स्पेशलिटीज पहले से ही उपलब्ध हैं।

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ब्रेन डेड रोगियों के अंगदान के लिए विशेष अभियान चलाएंगे
निदेशक डॉ. राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट विभिन्न संस्थाओं के साथ मिलकर ब्रेन डेड रोगियों के अंगदान के लिए अभियान चलाएगा। ब्रेन डेड रोगियों का हृदय, लिवर, फेफड़े, गुर्दे आदि अंग दूसरे जरूरतमंदों को नया जीवन दे सकते हैं। इसके लिए जागरुकता शिविरों का भी आयोजन किया जाएगा।

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हैलट में प्रतिदिन आते औसत दो से तीन ब्रेन डेड रोगी
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेस प्रमुख एवं प्रोफेसर डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि हैलट में प्रतिदिन दो से तीन ब्रेन डेड रोगी रोज आते हैं। इनकी सीनियर ब्रेन इंजरी होती है। कुछ रोगियों के मस्तिष्क में हल्की क्रिया होती है, जो कुछ घंटों के बाद खत्म हो जाती है। ट्रॉमा के रोगियों की संख्या औसत डेढ़ सौ प्रतिदिन की है।

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