Kanpur: दवा के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन मार्किंग अनिवार्य, विशेषज्ञ बोले- उल्लंघन पर जुर्माना का प्रावधान
Kanpur News: आयकर और जीएसटी विषय पर सेमिनार में विशेषज्ञों ने कहा कि संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा 24 महीने से बढ़ाकर 48 महीने कर दी गई है। धारा 206 एबी-206 सीसीए को समाप्त कर दिया गया है। एक अप्रैल 2025 से रिटर्न जांच की आवश्यकता नहीं होगी।
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कानपुर में केसीएएस सीपीई स्टडी सर्किल ऑफ कानपुर की ओर से सिविल लाइंस स्थित रेस्टोरेंट में आयकर और जीएसटी विषय पर सेमिनार का आयोजन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि ट्रैक एंड ट्रेस मैकेनिज्म (धारा 122बी) के तहत दवा, शराब जैसी विशिष्ट वस्तुओं के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन मार्किंग अनिवार्य की गई है।
उल्लंघन पर जुर्माना का प्रावधान किया गया है। एक अप्रैल 2025 से एक ही पैन के तहत एकाधिक जीएसटीएन वाले कारोबारियों के लिए इनपुट सर्विस डिस्ट्रीब्यूटर (आईएसडी) अनिवार्य कर दी गई है। संयोजक सीए प्रशांत रस्तोगी ने बताया कि आयकर जीएसटी के नियमों में कई बदलाव किए गए हैं। सीए गोविंद माहेश्वरी ने बताया कि यदि भुगतान 20 हजार रुपये से अधिक है तो, फर्म द्वारा साझेदार को वेतन, पारिश्रमिक, आयोग, बोनस या ब्याज पर 10 प्रतिशत टीडीएस जमा करना होगा।
रिटर्न जांच की आवश्यकता नहीं होगी
संशोधित रिटर्न दाखिल करने की समय सीमा 24 महीने से बढ़ाकर 48 महीने कर दी गई है। धारा 206 एबी-206 सीसीए को समाप्त कर दिया गया है। एक अप्रैल 2025 से रिटर्न जांच की आवश्यकता नहीं होगी। सीए छवि जैन ने बताया कि सेज में स्टोर माल की आपूर्ति को न तो माल और न ही सेवा माना जाएगा, जब तक कि निर्यात या डीटीए के लिए क्लियर न हो।
अपील के लिए 10 प्रतिशत पेनाल्टी जमा करनी होगी
अपील में प्री-डिपॉजिट केवल पेनाल्टी वाले मामलों में अपील के लिए 10 प्रतिशत पेनाल्टी जमा करनी होगी। पहले 25 प्रतिशत जमा करना होता था। वाउचर पर जीएसटी खत्म कर दिया गया है। इस मौके पर उप-संयोजक सीए नितिन सिंह, सीए पीयूष अग्रवाल, दीप कुमार मिश्रा, राजीव गुप्ता , अंकुर गोयल, शरद श्रीवास्तव, विष्णु माहेश्वरी, गुरमीत सिंह, अनिल साहू, शाजिया, नेहा अग्रवाल आदि मौजूद रहे।