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कानपुर: इंटर पास शातिरों ने बैंकों को लगाई एक करोड़ की चपत, तीन ठग गिरफ्तार
Sat, 31 Jul 2021 08:55 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 31 Jul 2021 08:55 PM IST
सार
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। आरोपियों के पास 5 लाख 50 हजार नकद व चार लाख रुपये खाते में मिला।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
एटीएम में छेड़छाड़ कर छह महीने में बैंकों को करीब एक करोड़ रुपये की चपत लगाने वाले इंटर पास साइबर ठगों के गिरोह का क्राइम ब्रांच व नौबस्ता पुलिस ने शनिवार को भंडाफोड़ किया। गिरफ्तार किए गए तीनों ठगों ने तकनीकी खामियों और बेहतर रिटर्न पॉलिसी की वजह से सबसे अधिक बैंक ऑफ महाराष्ट्र को चपत लगाई है।
गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। आरोपियों के पास 5 लाख 50 हजार नकद व चार लाख रुपये खाते में मिला। खाते सीज कराए गए हैं। सभी इंटर पास हैं। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बताया कि जालौन के कालपी निवासी रवि कुमार, प्रमोद कुमार और नंद किशोर को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपी एटीएम से छेड़छाड़ कर रकम पार करते हैं। जिसका पेनाल्टी के तौर पर भुगतान बैंकों को करना होता है। आरोपी गरीब मजबूर लोगों को कुछ पैसों या लोन आदि दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज के आधार पर एकाउंट खुलवाते हैं और उसी के जरिये ठगी को अंजाम देते हैं। आरोपियों के पास से 206 एटीएम कार्ड व करीब 150 खातों का विवरण व दस्तावेज बरामद हुए हैं। कई राज्यों ठगी का जाल फैला हुआ है। दिल्ली, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और यूपी आदि राज्यों में आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया है।
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गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। आरोपियों के पास 5 लाख 50 हजार नकद व चार लाख रुपये खाते में मिला। खाते सीज कराए गए हैं। सभी इंटर पास हैं। पुलिस कमिश्नर असीम अरुण ने बताया कि जालौन के कालपी निवासी रवि कुमार, प्रमोद कुमार और नंद किशोर को गिरफ्तार किया गया है।
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आरोपी एटीएम से छेड़छाड़ कर रकम पार करते हैं। जिसका पेनाल्टी के तौर पर भुगतान बैंकों को करना होता है। आरोपी गरीब मजबूर लोगों को कुछ पैसों या लोन आदि दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज के आधार पर एकाउंट खुलवाते हैं और उसी के जरिये ठगी को अंजाम देते हैं। आरोपियों के पास से 206 एटीएम कार्ड व करीब 150 खातों का विवरण व दस्तावेज बरामद हुए हैं। कई राज्यों ठगी का जाल फैला हुआ है। दिल्ली, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और यूपी आदि राज्यों में आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया है।
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इस तरह ठगी को देते थे अंजाम
डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि आरोपी पहले फर्जी दस्तावेजों पर खाता खुलवाते थे। उसमें रकम जमा करते थे। एटीएम से रकम निकलाने के दौरान मशीन में चिमटी लगा देते थे। कभी कभी एक नोट छोड़कर बाकी पैसे निकाल लेते थे। उसके बाद शिकायत दर्ज कराते थे कि उनके खाते से पैसे निकल गए हैं। तकनीकी तौर पर ट्रांजेक्शन शो नहीं करता था। ऐसे में ये रकम बैंक उनके खाते में ट्रांसफर करती थी। इस तरह से आरोपी बैंक को चपत लगाते थे।
इसलिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र को चिन्हित किया
सबसे अधिक ठगी बैंक ऑफ महाराष्ट्र से की गई। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एटीएम अभी अपग्रेड नहीं हैं। लिहाजा ये बात ठगों को पता है। यही वजह है कि आसानी से ठगी करते थे। वहीं एक वजह ये भी है कि ग्राहकों को असुविधा न हो इसलिए बैंक खाते से पैसे निकलने संबंधी शिकायतों पर एक सप्ताह के भीतर रकम वापस कर देती है। इसलिए इस बैंक को आरोपियों ने निशाना बनाया।
डीसीपी क्राइम सलमान ताज पाटिल ने बताया कि आरोपी पहले फर्जी दस्तावेजों पर खाता खुलवाते थे। उसमें रकम जमा करते थे। एटीएम से रकम निकलाने के दौरान मशीन में चिमटी लगा देते थे। कभी कभी एक नोट छोड़कर बाकी पैसे निकाल लेते थे। उसके बाद शिकायत दर्ज कराते थे कि उनके खाते से पैसे निकल गए हैं। तकनीकी तौर पर ट्रांजेक्शन शो नहीं करता था। ऐसे में ये रकम बैंक उनके खाते में ट्रांसफर करती थी। इस तरह से आरोपी बैंक को चपत लगाते थे।
इसलिए बैंक ऑफ महाराष्ट्र को चिन्हित किया
सबसे अधिक ठगी बैंक ऑफ महाराष्ट्र से की गई। पुलिस कमिश्नर के मुताबिक बैंक ऑफ महाराष्ट्र के एटीएम अभी अपग्रेड नहीं हैं। लिहाजा ये बात ठगों को पता है। यही वजह है कि आसानी से ठगी करते थे। वहीं एक वजह ये भी है कि ग्राहकों को असुविधा न हो इसलिए बैंक खाते से पैसे निकलने संबंधी शिकायतों पर एक सप्ताह के भीतर रकम वापस कर देती है। इसलिए इस बैंक को आरोपियों ने निशाना बनाया।