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UP: दस साल बाद धुला सामूहिक दुष्कर्म का कलंक, मां-बेटे समेत चार बरी, एक आरोपी की हो चुकी मौत; जानें पूरा मामला
Sat, 30 Nov 2024 01:17 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 30 Nov 2024 01:17 PM IST
सार
Kanpur News: तीन रंजिशों का बदला लेने के लिए पिता ने झूठा मुकदमा लिखाया था। दस साल बाद सामूहिक दुष्कर्म का कलंक धुला। कोर्ट ने मां-बेटे समेत चार लोगों को बरी किया है। जबकि एक आरोपी की मौत हो चुकी है।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विस्तार
तीन अलग-अलग लोगों से रंजिश का बदला लेने के लिए एक पिता ने अपनी बेटी को मोहरा बनाया और तीन लोगों पर सामूहिक दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर रिपोर्ट दर्ज करा दी। एक महिला समेत दो लोगों पर धमकाने का भी आरोप लगाया था। आखिरकार कोर्ट ने चारों आरोपियों को दोषमुक्त करार दिया। एक आरोपी की मुकदमे की सुनवाई के दौरान मौत हो चुकी है।
बिठूर निवासी पिता ने कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि 18 मार्च 2013 को जब वह और उसकी पत्नी काम पर गए थे तभी उसकी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी को घर पर अकेला पाकर क्षेत्र के सूबेदार नगर निवासी अरुण गोस्वामी, ब्रह्मनगर निवासी दीपू गुप्ता व रमेल नगर निवासी अनिल कुमार गौड़ ने दबोच लिया और तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। शाम को मां-बाप के लौटने पर बेटी ने सारी बात बताई तो बेटी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने ले जा रहे थे तभी रास्ते में अरुण, उसकी मां तपेश्वरी व पिता शंकरदयाल मिले और रुपये लेकर मामला खत्म करने को कहा। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। डरकर पिता उस समय तो घर लौट गया लेकिन बाद में कोर्ट में अर्जी देकर पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्र्ट में अरुण, दीपू व अनिल के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और शंकरदयाल व तपेश्वरी के खिलाफ धमकाने के मामले में आरोप तय हुए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शंकरदयाल की मौत हो गई जबकि सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने बाकी चारों को दोषमुक्त करार दे दिया।
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बिठूर निवासी पिता ने कोर्ट में एक प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि 18 मार्च 2013 को जब वह और उसकी पत्नी काम पर गए थे तभी उसकी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी को घर पर अकेला पाकर क्षेत्र के सूबेदार नगर निवासी अरुण गोस्वामी, ब्रह्मनगर निवासी दीपू गुप्ता व रमेल नगर निवासी अनिल कुमार गौड़ ने दबोच लिया और तीनों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। शाम को मां-बाप के लौटने पर बेटी ने सारी बात बताई तो बेटी को रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए थाने ले जा रहे थे तभी रास्ते में अरुण, उसकी मां तपेश्वरी व पिता शंकरदयाल मिले और रुपये लेकर मामला खत्म करने को कहा। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी। डरकर पिता उस समय तो घर लौट गया लेकिन बाद में कोर्ट में अर्जी देकर पांच लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कोर्र्ट में अरुण, दीपू व अनिल के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म और शंकरदयाल व तपेश्वरी के खिलाफ धमकाने के मामले में आरोप तय हुए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शंकरदयाल की मौत हो गई जबकि सबूतों और गवाहों के आधार पर कोर्ट ने बाकी चारों को दोषमुक्त करार दे दिया।
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पिता को बचाने के लिए बेटा-बेटी ने पढ़ी वकालत
पिता पर लगे झूठे आरोप से उन्हें बरी कराने के लिए अनिल कुमार गौड़ के बेटे ऋषभ व उपासना ने वकालत की पढ़ाई पढ़ी। दोनों ने एलएलबी की परीक्षा भी पास कर ली। यूपी बार कौंसिल में उपासना का पंजीकरण अभी नहीं हो सका है जबकि ऋषभ का पंजीकरण हो गया था। उपासना ने मुकदमे की तैयारी की। ऋषभ ने खुद अपने पिता का मुकदमा लड़ा। कोर्ट के सामने बहस कर पिता का पक्ष रखा और पिता को झूठे आरोप से मुक्त कराने में सफलता हासिल की। मुकदमे से बरी होने पर पिता ने दोनों की शिक्षा पर गर्व जताया।
एकतरफा प्यार में साली ने जीजा पर लगाया था आरोप
कोर्ट में अरुण की ओर से तर्क रखा गया कि एकतरफा प्यार में पीडि़ता उससे शादी करना चाहती थी लेकिन उसकी शादी पीडि़ता की बड़ी बहन से तय थी। 25 मार्च 2013 को शादी होनी थी। दोनों प्रेम विवाह कर रहे थे। बड़ी बहन को पहले पति से तलाक पर 1.20 लाख रुपये मिले थे। यह रुपये मां-बाप लेना चाहते थे। न देने पर साजिश के तहत रंजिश मानकर झूठे मुकदमे में फंसा दिया। तपेश्वरी का भी कहना था कि घटना के समय पीडि़ता बालिग थी। उसे, पति व बेटे को झूठा फंसा दिया।
पिता पर लगे झूठे आरोप से उन्हें बरी कराने के लिए अनिल कुमार गौड़ के बेटे ऋषभ व उपासना ने वकालत की पढ़ाई पढ़ी। दोनों ने एलएलबी की परीक्षा भी पास कर ली। यूपी बार कौंसिल में उपासना का पंजीकरण अभी नहीं हो सका है जबकि ऋषभ का पंजीकरण हो गया था। उपासना ने मुकदमे की तैयारी की। ऋषभ ने खुद अपने पिता का मुकदमा लड़ा। कोर्ट के सामने बहस कर पिता का पक्ष रखा और पिता को झूठे आरोप से मुक्त कराने में सफलता हासिल की। मुकदमे से बरी होने पर पिता ने दोनों की शिक्षा पर गर्व जताया।
एकतरफा प्यार में साली ने जीजा पर लगाया था आरोप
कोर्ट में अरुण की ओर से तर्क रखा गया कि एकतरफा प्यार में पीडि़ता उससे शादी करना चाहती थी लेकिन उसकी शादी पीडि़ता की बड़ी बहन से तय थी। 25 मार्च 2013 को शादी होनी थी। दोनों प्रेम विवाह कर रहे थे। बड़ी बहन को पहले पति से तलाक पर 1.20 लाख रुपये मिले थे। यह रुपये मां-बाप लेना चाहते थे। न देने पर साजिश के तहत रंजिश मानकर झूठे मुकदमे में फंसा दिया। तपेश्वरी का भी कहना था कि घटना के समय पीडि़ता बालिग थी। उसे, पति व बेटे को झूठा फंसा दिया।
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बटाई पर खेत नहीं दिया तो रंजिश मानकर फंसा दिया
कोर्ट में अनिल गौड़ की ओर से तर्क रखा गया कि पीडि़ता के बाबा शमशान घाट पर ड्यूटी करते थे। शमशान घाट के रास्ते पर उसका खेत पड़ता था। आते-जाते उनसे राम-राम होती थी। एक दिन उन्होंने उसका खेत बटाई पर मांगा लेकिन वह पहले से दूसरे को दे चुका था। इस पर उन्होंने झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। वह पीडि़ता व उसके परिवार को जानता तक नहीं है।
दहेज हत्या के मुकदमे से छूटा तो दूसरे में फंसा दिया
कोर्ट में दीपू की ओर से तर्क रखा गया कि पीडि़ता का परिवार उसे पहले से जानता था। पीडि़ता की बड़ी बहन की मौत पर दहेज हत्या के मुकदमे में उसे नामजद आरोपी बनाया गया था। मुकदमे में वह बरी हो गया था। इसी रंजिश के कारण उसे दूसरे मुकदमे में झूठा फंसा दिया गया।
अदालत में नहीं साबित हो सकी घटना
कोर्ट ने आदेश में कहा कि तीन व्यक्ति जो अलग-अलग उम्र के हैं। अलग-अलग स्थान पर रहते हैं। अलग-अलग काम करते हैं। वह एक ही दिन, समय और स्थान पर एक ही बालिका के साथ दुष्कर्म करने के लिए क्यों और कैसे तैयार हो गए यह अभियोजन साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों से साफ है कि पीडि़ता के परिवार की अरुण, दीपू और अनिल से अलग-अलग कारणों से रंजिश थी। पीडि़ता के बयान भी अविश्वसनीय हैं। अभियोजन साक्ष्यों से घटना साबित नहीं होती इसलिए सभी दोषमुक्त किए जाने योग्य हैं।
कोर्ट में अनिल गौड़ की ओर से तर्क रखा गया कि पीडि़ता के बाबा शमशान घाट पर ड्यूटी करते थे। शमशान घाट के रास्ते पर उसका खेत पड़ता था। आते-जाते उनसे राम-राम होती थी। एक दिन उन्होंने उसका खेत बटाई पर मांगा लेकिन वह पहले से दूसरे को दे चुका था। इस पर उन्होंने झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी। वह पीडि़ता व उसके परिवार को जानता तक नहीं है।
दहेज हत्या के मुकदमे से छूटा तो दूसरे में फंसा दिया
कोर्ट में दीपू की ओर से तर्क रखा गया कि पीडि़ता का परिवार उसे पहले से जानता था। पीडि़ता की बड़ी बहन की मौत पर दहेज हत्या के मुकदमे में उसे नामजद आरोपी बनाया गया था। मुकदमे में वह बरी हो गया था। इसी रंजिश के कारण उसे दूसरे मुकदमे में झूठा फंसा दिया गया।
अदालत में नहीं साबित हो सकी घटना
कोर्ट ने आदेश में कहा कि तीन व्यक्ति जो अलग-अलग उम्र के हैं। अलग-अलग स्थान पर रहते हैं। अलग-अलग काम करते हैं। वह एक ही दिन, समय और स्थान पर एक ही बालिका के साथ दुष्कर्म करने के लिए क्यों और कैसे तैयार हो गए यह अभियोजन साबित नहीं कर सका। बचाव पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों से साफ है कि पीडि़ता के परिवार की अरुण, दीपू और अनिल से अलग-अलग कारणों से रंजिश थी। पीडि़ता के बयान भी अविश्वसनीय हैं। अभियोजन साक्ष्यों से घटना साबित नहीं होती इसलिए सभी दोषमुक्त किए जाने योग्य हैं।