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Kanpur: बीआईसी की 51 संपत्तियों हुआ सर्वे, नजूल रिकॉर्ड में होंगी दर्ज…शहर में कुल 58 संपत्तियां, पढ़ें डिटेल

Sat, 23 Aug 2025 10:38 AM IST
हिमांशु अवस्थी रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर
रजत यादव, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sat, 23 Aug 2025 10:38 AM IST
सार

Kanpur News: वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने बीआईसी की खाली हुईं अरबों की सात संपत्तियों पर आईटी पार्क और फ्लैटेड फैक्टरियां बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लीज पर दी गई इन नजूल संपत्तियों के पट्टे तत्कालीन डीएम ने 2011 को निरस्त कर दिए थे।

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Kanpur Survey of 51 properties of BIC done will be recorded in Nazul records total 58 properties in the city
ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी) - फोटो : amar ujala

विस्तार

कानपुर में लंबे अरसे से खाली पड़ी ब्रिटिश इंडिया कारपोरेशन (बीआईसी) की जमीनों के इस्तेमाल की कवायद तेज हो गई है। शासन के निर्देश पर एसडीएम (सदर) अनुभव की टीम ने 51 संपत्तियों का सर्वे किया है। यह संपत्तियां सिविल लाइंस, चुन्नीगंज आदि स्थानों पर हैं। इन जमीनों पर मिलें और बड़े-बड़े बंगले बने हैं। इन जमीनों को वापस नजूल रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। दो वर्ष पहले बीआईसी की सात संपत्तियों पर जिला प्रशासन कब्जा लेकर नजूल के रिकॉर्ड में दर्ज करा चुका है।

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वर्षों पहले किसी कंपनी या संस्था को किराये पर दी गई जमीनों को वापस लेने के निर्देश शासन ने दिए हैं। इसके लिए शासन स्तर से जमीनों का सर्वे शुरू कराया गया है। शहर में बीआईसी की कुल 58 संपत्तियां हैं। इनमें से सात संपत्तियों का सर्वे वर्ष 2023 में हुआ था। उन सभी पर जिला प्रशासन ने अपना कब्जा ले लिया है। बाकी 51 संपत्तियों का सर्वे करने के लिए एक माह पहले शासन ने निर्देश दिए थे। जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर एसडीएम सदर की टीम ने दो सप्ताह में सर्वे पूरा किया।

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केंद्र सरकार को भेजी जाएगी रिपोर्ट
नजूल रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि ज्यादातर जमीनें 1862 से 1865 के बीच बीआईसी को सरकार ने दी थीं। इसमें से कई संपत्तियों की पट्टा अवधि वर्ष 1985 में तो कई की 1992 में समाप्त हो चुकी है। इसके बाद इन संपत्तियों का लीज रेंट बीआईसी की तरफ से नहीं जमा किया गया। वर्तमान समय में बीआईसी ने करीब सात संपत्तियों पर अपने गार्ड तैनात कर रखे हैं। ज्यादातर पर ताला लगा मिला। ये जमीनें अरबों रुपये की हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कई जमीनों को बीआईसी ने दूसरी कंपनियों को लीज पर दे दिया। एसडीएम ने अपनी रिपोर्ट एडीएम वित्त विवेक चतुर्वेदी को सौंपी थी, जो शासन भेज दी गई है। शासन से यह रिपोर्ट केंद्र सरकार को भेजी जाएगी।

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32 एकड़ में एल्गिन मिल की जमीन
सिविल लाइंस स्थित एल्गिन मिल एंड पावर हाउस की जमीन का क्षेत्रफल 32 एकड़ है। इस जमीन का लीज रेंट 1992 के बाद नहीं जमा किया। इसी तरह कानपुर कॉटन मिल की जमीन दो एकड़ है। इस जमीन की पट्टा अवधि 1982 में ही समाप्त हो चुकी थी। मकराबटगंज समेत सात संपत्तियों पर प्रशासन का कब्जा बीआईसी की खाली हुई संपत्तियों में सबसे ज्यादा जगह मकराबटगंज शनिदेव मंदिर के सामने वाली है। इसमें करीब 1.06 लाख वर्गमीटर की जगह है। परमट मंदिर पेट्रोल पंप के पीछे 22 हजार वर्गमीटर जगह है। रेव थ्री के बगल में करीब 10 हजार वर्गमीटर की जगह है। इसके साथ यूपीएफसी के सामने, एनटीसी हेड क्वार्टर के सामने, ब्लाक संख्या 14 और परमट पेट्रोल पंप के सामने गली के अंदर वाली संपत्तियों पर प्रशासन ने कब्जा कर वापस नजूल के रिकॉर्ड में दर्ज कर दिया है।

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आईटी पार्क और फ्लैटेड फैक्टरियां बनाने का भेजा था प्रस्ताव
वर्ष 2023 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने बीआईसी की खाली हुईं अरबों की सात संपत्तियों पर आईटी पार्क और फ्लैटेड फैक्टरियां बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। लीज पर दी गई इन नजूल संपत्तियों के पट्टे तत्कालीन डीएम ने 2011 को निरस्त कर दिए थे। इसके बावजूद प्रशासन ने उस पर कब्जा नहीं लिया था। शासन की मंजूरी पर जिला प्रशासन ने तहसील सदर स्थित सभी संपत्तियों को कब्जे में लेकर जिला प्रशासन का बोर्ड लगा दिया है।

बीआईसी की 51 संपत्तियों का सत्यापन कराया गया है। रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। इन संपत्तियों को अभी नजूल के रिकॉर्ड में दर्ज कराने का प्रस्ताव भेजा गया है। सहमति मिलने के बाद इस जमीन के उपयोग की कवायद शुरू होगी।  -विवेक चतुर्वेदी, एडीएम वित्त

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