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Kanpur: कैंसर से बंद अमाशय का रास्ता 10 मिनट में स्टेंट से खोला, रोगी को कोई चीरा नहीं लगा
Wed, 02 Apr 2025 09:52 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 02 Apr 2025 09:52 PM IST
सार
कैंसर से बंद अमाशय का रास्ता 10 मिनट में स्टेंट से खोला गया। डॉक्टरों की टीम ने इंडोस्कोपिक विधि अपनाई। गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में इस तरह का यह पहला मामला है।
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रोगी को स्टेंट लगाते डॉ विनय कुमार और टीम
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
अमाशय और आंत के बीच कैंसर से बंद रास्ता स्टेंट लगाकर खोल दिया गया। हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग में इस तरह का यह पहला मामला है। रोगी का इलाज इंडोस्कोपिक विधि से किया गया। इसमें चीरा लगाने की नौबत नहीं आई। इस प्रक्रिया में सिर्फ 10 मिनट का समय लगा है। इलाज गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार की अगुवाई में किया गया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभाग की टीम को बधाई दी।
गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार ने बताया कि बिधनू की रहने वाली 83 वर्षीय महिला को अमाशय का कैंसर है। इसकी वजह से आंत से जुड़ा रास्ता बंद हो गया। महिला को खाना खाने के बाद उलटी हो जाती। एक महीने से परेशान चल रही महिला का 10 किलो वजन भी कम हो गया था। उम्र अधिक होने के कारण चीरा लगाकर ऑपरेशन करना संभव नहीं था। इस पर इंडोस्कोपिक विधि से महिला के अमाशय और आंत के बीच बंद रास्ते में मेटेलिक स्टेंट डाला गया। इससे रास्ता खुल गया। इसके बाद महिला ने खाना खाया। कुछ देर निगरानी करने के बाद रोगी को डिस्चार्ज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इससे कैंसर रोगी के जीवन की गुणवत्ता बनी रहती है।
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गैस्ट्रोइंटोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. कुमार ने बताया कि बिधनू की रहने वाली 83 वर्षीय महिला को अमाशय का कैंसर है। इसकी वजह से आंत से जुड़ा रास्ता बंद हो गया। महिला को खाना खाने के बाद उलटी हो जाती। एक महीने से परेशान चल रही महिला का 10 किलो वजन भी कम हो गया था। उम्र अधिक होने के कारण चीरा लगाकर ऑपरेशन करना संभव नहीं था। इस पर इंडोस्कोपिक विधि से महिला के अमाशय और आंत के बीच बंद रास्ते में मेटेलिक स्टेंट डाला गया। इससे रास्ता खुल गया। इसके बाद महिला ने खाना खाया। कुछ देर निगरानी करने के बाद रोगी को डिस्चार्ज कर दिया गया। उन्होंने बताया कि इससे कैंसर रोगी के जीवन की गुणवत्ता बनी रहती है।
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