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Alert: खर्राटे बढ़ा रहे बीपी, सोते समय पड़ रहा ब्रेन अटैक, रोगियों की डायग्नोसिस से हुआ खुलासा

Sun, 15 Jan 2023 11:58 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sun, 15 Jan 2023 11:58 AM IST
सार

न्यूरो साइंसेज प्रमुख डॉ. मनीष सिंह और खर्राटा रोग व ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र लालचंदानी का कहना है कि खर्राटों से ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक दोनों का बराबर खतरा रहता है। रोगी सोता तो सामान्य स्थिति में है लेकिन रात को जब खर्राटे आने लगते हैं तो शरीर की स्थिति अचानक बदलती है और ऑक्सीजन लेवल एकदम से नीचे आ जाता है। इसी से उसका ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। खर्राटे से अगर अधिक देर तक सांस अटकी तो मौत हो जाती है।

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Kanpur: Snoring is increasing BP, brain attack while sleeping
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

सोते समय खर्राटा लेने में सांस अटकने से शरीर का ऑक्सीजन लेवल गिर जाता है। इसके साथ ही शरीर पर तनाव आने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। अचानक बढ़े इस ब्लड प्रेशर से नसों में खून का थक्का जमता है और ब्रेन अटैक पड़ जाता है। हैलट में आए ब्रेन अटैक के रोगियों के अध्ययन में यह खुलासा हुआ है।

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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के न्यूरो साइंसेज प्रमुख डॉ. मनीष सिंह ने बताया कि अस्पताल आने वाले रोगियों की जांच में पता चला कि दवाओं से ब्लड प्रेशर सामान्य रहता था, लेकिन सोते वक्त खर्राटे आने लगते थे। जाड़े में खून की नसें सिकुड़ने और खर्राटे आने से जटिलताएं बढ़ गईं और ब्रेन अटैक पड़ गया। ऐसे रोगियों की जांच नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञों से कराई गई है। इस रोग को स्लीप एप्निया सिंड्रोम कहते हैं। हैलट में पहली जनवरी से अब तक ढाई सौ से अधिक ब्रेन अटैक और हेमरेज के रोगी आ चुके हैं।

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इनमें 60 रोगी ऐसे हैं जिनका ब्लड प्रेशर दवाओं से सामान्य रहता था। उन्हें ब्रेन अटैक रात में पड़ा था। वे सुबह बेहोशी की हालत में पाए गए। इनमें कुछ रोगी ऐसे थे जिनकी आंखों में भी हल्का सा खून का थक्का आ गया था। इन रोगियों को सोते-सोते तेज खर्राटे आए थे। न्यूरो साइंसेज प्रमुख डॉ. मनीष सिंह और खर्राटा रोग व ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र लालचंदानी का कहना है कि खर्राटों से ब्रेन अटैक और हार्ट अटैक दोनों का बराबर खतरा रहता है। रोगी सोता तो सामान्य स्थिति में है लेकिन रात को जब खर्राटे आने लगते हैं तो शरीर की स्थिति अचानक बदलती है और ऑक्सीजन लेवल एकदम से नीचे आ जाता है। इसी से उसका ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। खर्राटे से अगर अधिक देर तक सांस अटकी तो मौत हो जाती है।

इसलिए आते हैं खर्राटे
तालू का मांस नीचे लटक आता है। इसके साथ गले का कौआ भी लटक आता है। इससे सांस रुकती है। टांसिल में सूजन होने पर भी सांस अटकती है। वसा अधिक होने, संक्रमण से भी सांस के रास्ते में अटकाव आता है। इसी से ध्वनि निकलती है। इसे खर्राटा कहते हैं।

खर्राटों से दिक्कत
- हार्ट अटैक पड़ सकता है।
- हृदय की धड़कन अनियमित रहती है।
- रोगी में दिन भर सुस्ती और थकान रहती है।
- डायबिटीज व ब्लड प्रेशर के नियंत्रण में दिक्कत आती है।
- शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- नसों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, नपुंसकता आती है।

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बचाव
- योगिक क्रियाएं और प्राणायाम करें।
- करवट लेकर सोएं, चित होकर न लेटें।
- रात के खाने और सोने में तीन घंटे का अंतर रखें।
- मोटापा कम करें, तोंदियल मोटापा अधिक खतरनाक।

केस-एक : आर्यनगर निवासी आशुतोष (50) को दिसंबर 2022 में ब्रेन अटैक पड़ा था। इलाज से ठीक हो गए। बाद में स्लीप टेस्ट कराने पर पता चला कि उन्हें तेज खर्राटे आते हैं। इससे सांस अटकती है। उसी से ब्रेन अटैक पड़ा था। ईएनटी विशेषज्ञ के यहां इलाज चल रहा है।

केस-दो : निजी कंपनी में सुपरवाइजर कल्याणपुर के रहने वाले ऋतुराज सिंह (48) को एक साल पहले ब्रेन अटैक पड़ा था। उनका इलाज निजी अस्पताल में हुआ। यहीं पर उनका स्लीप टेस्ट कराया गया। मोटापा अधिक होने के कारण उनका तालू लटक आया था। उनका इलाज चल रहा है।  

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