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Kanpur: सिम स्वैपिंग के जरिये एसजीएसटी के डिप्टी कमिश्नर से 7.37 लाख रुपये की ठगी
Sat, 01 Feb 2025 11:47 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 01 Feb 2025 11:47 PM IST
सार
Kanpur News: एसजीएसटी के डिप्टी कमिश्नर से 7.37 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। कानपुर में अपनी तरह का पहला मामला है। रिपार्ट दर्ज कर साइबर पुलिस मामले की जांच में जुट गई।
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सांकेतिक तस्वीर
विस्तार
ई-सिम कार्ड एक्टिवेट कराने का झांसा देकर साइबर ठगों ने राज्य वस्तु एवं सेवा कर एसजीएसटी के डिप्टी कमिश्नर का सिम स्वैप कर .37 लाख रुपये ठग लिए। पीड़ित ने जब बैंक खाता चेक किया तो ठगी का पता चला। अपनी तरह के पहले मामले के सामने आने के बाद साइबर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
एसजीएसटी में डिप्टी कमिश्नर राजकुमार ने बताया कि उन्होंने जियो कंपनी के ई-सिम के लिए आवेदन किया था। 14 नवंबर को गाजियाबाद जाने के दौरान उन्हें एयरटेल के नंबर से जियो कस्टमर केयर कर्मी बन ठग ने रात करीब आठ बजे फोन किया। ठग ने ई-सिम के लिए आवेदन करने का जिक्र करते हुए एक्टिवेशन प्रक्रिया शुरू करने को कहा। एक्टिव न कराने पर सिम 24 घंटे के भीतर बंद होने का झांसा दिया। फिर उन्हें व्हॉट्सएप पर एक लिंक भेजा। लिंक पर राकुमार के क्लिक करते ही सिम डिएक्टिवेट हो गया। उन्हें लगा कि सिम थोड़ी देर में एक्टिव हो जाएगा इसलिए वह दूसरा नंबर इस्तेमाल करने लगे। उधर, उनका सिम क्लोन हो गया और उसका एक्सेस लेकर ठगों ने सिम से जुड़े तीन बैंक खातों से कई बार में 7.37 लाख रुपये पार कर दिए। सिम न शुरू होने पर उन्होंने जब दूसरे जिओ कस्टर केयर में सपर्क किया तो नया सिम जारी कराने की बात कही गई। इस बीच उन्हें ठगी का अंदेश हुआ। बैंक जाकर पता किया तो खाते से रुपये निकलने की बात पता चली। साइबर थाना प्रभारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि जिन खातों में पैसा दिया गया, उन्हें सीज कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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एसजीएसटी में डिप्टी कमिश्नर राजकुमार ने बताया कि उन्होंने जियो कंपनी के ई-सिम के लिए आवेदन किया था। 14 नवंबर को गाजियाबाद जाने के दौरान उन्हें एयरटेल के नंबर से जियो कस्टमर केयर कर्मी बन ठग ने रात करीब आठ बजे फोन किया। ठग ने ई-सिम के लिए आवेदन करने का जिक्र करते हुए एक्टिवेशन प्रक्रिया शुरू करने को कहा। एक्टिव न कराने पर सिम 24 घंटे के भीतर बंद होने का झांसा दिया। फिर उन्हें व्हॉट्सएप पर एक लिंक भेजा। लिंक पर राकुमार के क्लिक करते ही सिम डिएक्टिवेट हो गया। उन्हें लगा कि सिम थोड़ी देर में एक्टिव हो जाएगा इसलिए वह दूसरा नंबर इस्तेमाल करने लगे। उधर, उनका सिम क्लोन हो गया और उसका एक्सेस लेकर ठगों ने सिम से जुड़े तीन बैंक खातों से कई बार में 7.37 लाख रुपये पार कर दिए। सिम न शुरू होने पर उन्होंने जब दूसरे जिओ कस्टर केयर में सपर्क किया तो नया सिम जारी कराने की बात कही गई। इस बीच उन्हें ठगी का अंदेश हुआ। बैंक जाकर पता किया तो खाते से रुपये निकलने की बात पता चली। साइबर थाना प्रभारी सुनील कुमार वर्मा ने बताया कि जिन खातों में पैसा दिया गया, उन्हें सीज कराने का प्रयास किया जा रहा है।
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साइबर ठगों से ऐसे बचें
- किसी संस्था के कस्टमर केयर से कॉल आए तो नंबर को जरूर चेक करें।
- कोशिश करें कि अपनी शिकायत या समस्या को कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर खुद कॉल कर दर्ज कराएं।
- किसी कंपनी या क्षेत्र से कॉल आए तो किसी ट्रूकॉलर जैसे एप के जरिये एक बार जांच लें।
- फोन पर आने वाली कॉल या लिंक को लेकर सतर्क रहें और अज्ञात व्यक्ति के कहने या भेजने पर लिंक पर क्लिक न करें।
- किसी भी चीज के आवेदन के समय यह जरूर जान लें कि आखिर वह कैसे प्राप्त होगी और कैसे उसका उपयोग कर सकते हैं।
- किसी संस्था के कस्टमर केयर से कॉल आए तो नंबर को जरूर चेक करें।
- कोशिश करें कि अपनी शिकायत या समस्या को कंपनी के आधिकारिक कस्टमर केयर नंबर पर खुद कॉल कर दर्ज कराएं।
- किसी कंपनी या क्षेत्र से कॉल आए तो किसी ट्रूकॉलर जैसे एप के जरिये एक बार जांच लें।
- फोन पर आने वाली कॉल या लिंक को लेकर सतर्क रहें और अज्ञात व्यक्ति के कहने या भेजने पर लिंक पर क्लिक न करें।
- किसी भी चीज के आवेदन के समय यह जरूर जान लें कि आखिर वह कैसे प्राप्त होगी और कैसे उसका उपयोग कर सकते हैं।
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यहां करें शिकायत
किसी भी साइबर अपराध की शिकायत सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें। साथ ही स्थानीय थाने या स्थानीय साइबर थाने में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जल्दी शिकायत दर्ज कराने पर उतनी ही जल्दी बैंक खाता फ्रीज कर पैसे वापस कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। साथ ही रुपये वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।
किसी भी साइबर अपराध की शिकायत सबसे पहले हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें। साथ ही स्थानीय थाने या स्थानीय साइबर थाने में भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। जल्दी शिकायत दर्ज कराने पर उतनी ही जल्दी बैंक खाता फ्रीज कर पैसे वापस कराने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। साथ ही रुपये वापस मिलने की संभावना भी बढ़ जाती है।