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सेबी की चेतावनी: डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड में निवेश से रहें सावधान, कहा- फंस सकता है निवेशकों का पैसा

Sun, 09 Nov 2025 09:58 AM IST
हिमांशु अवस्थी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: हिमांशु अवस्थी Updated Sun, 09 Nov 2025 09:58 AM IST
सार

Kanpur News: डिजिटल गोल्ड उत्पाद फिलहाल न तो सेबी के अधीन आते हैं न ही आरबीआई के। इस वजह से यह पूरा क्षेत्र रेगुलेटरी ग्रे-जोन में है।

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Kanpur SEBI warns Be cautious while investing in digital gold or e gold saying investors money could be stuck
डिजिटल गोल्ड - फोटो : amar ujala

विस्तार

सोने-चांदी में तेजी के बीच अब डिजिटल गोल्ड नाम से चल रहे ऑनलाइन निवेश प्लेटफॉर्म सुर्खियों में हैं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने शुक्रवार को निवेशकों को चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि डिजिटल गोल्ड किसी भी रूप में सेबी के नियामकीय दायरे में नहीं आता। इसमें निवेश करने वाले निवेशकों को भारी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

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सेबी ने कहा है कि डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड वे ऑनलाइन उत्पाद हैं, जिन्हें कुछ एप और वेबसाइट फिजिकल गोल्ड के विकल्प के रूप में पेश कर रही हैं। निवेशक इन प्लेटफॉर्म पर रुपये डालकर उतने ग्राम सोने का दावा खरीद सकते हैं जो कथित तौर पर उनके लिए किसी वॉल्ट में रखा जाता है। सेबी ने स्पष्ट किया है कि ऐसे डिजिटल उत्पाद न तो सेबी द्वारा अधिसूचित प्रतिभूति हैं न ही कमोडिटी डेरिवेटिव के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। इन पर किसी भी तरह का निवेशक सुरक्षा तंत्र लागू नहीं होता।

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सोने के निवेश के नाम पर लुभा रहे हैं
डिजिटल गोल्ड या ई-गोल्ड उत्पाद सेबी के विनियमन से बाहर हैं। इनमें निवेश से निवेशकों को काउंटर पार्टी और ऑपरेशनल रिस्क का सामना करना पड़ सकता है। शहर में पिछले कई वर्षों में म्युच्युअल फंड्स द्वारा जारी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ईटीएफ), सोवरन गोल्ड बांड तथा स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेड होने वाले इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीट्स (ईजीआरएस) में निवेश करने वाले निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। कई मोबाइल एप छोटे निवेशकों को 100 से शुरू होने वाले सोने के निवेश के नाम पर लुभा रहे हैं।

फंस सकता है निवेशक का पैसा
केश्री ब्रोकिंग के को-फाउंडर राजीव सिंह ने बताया कि डिजिटल गोल्ड उत्पाद फिलहाल न तो सेबी के अधीन आते हैं न ही आरबीआई के। इस वजह से यह पूरा क्षेत्र रेगुलेटरी ग्रे-जोन में है। कई कंपनियां सोने की 99.9 प्रतिशत शुद्धता, सेफ वॉल्ट स्टोरेज जैसे दावे करती हैं ,लेकिन इन दावों की न तो कोई स्वतंत्र ऑडिट होता है और न ही निवेशक को यह साबित करने का कोई दस्तावेज मिलता है कि सोना वास्तव में उसके नाम पर खरीदा गया है। अगर प्लेटफॉर्म बंद हो गया या दिवालिया हो गया, तो निवेशक का पैसा फंस सकता है।

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केवल इन पर करें भरोसा
राजीव सिंह ने बताया कि म्युच्युअल फंड की ओर से जारी गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (गोल्ड ईटीएफ) ही स्टॉक एक्सचेंज पर ट्रेडेबल हैं। इसके अलावा एक्सचेंज ट्रेडेड गोल्ड डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स कमोडिटी एक्सचेंजों पर सेबी नियामन के तहत चलते हैं। इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड रिसीप्ट्स जो सोने को एक्सचेंज पर डिपॉजिटरी रूप में रखने की मान्यता प्राप्त प्रणाली है। केवल ये तीन विकल्पों में निवेशक को निवेशक सुरक्षा तंत्र उपलब्ध रहता है, जो किसी विवाद या धोखाधड़ी की स्थिति में कानूनी राहत देता है। रेगुलेटेड गोल्ड उत्पादों में शहर के निवेशकों का 100 करोड़ से अधिक के निवेश का अनुमान है।

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