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कानपुर: डीजीजीआई दिल्ली की कार्रवाई में खुलासा, ‘बनारसी आशिक’ को प्लास्टिक रैपर की आपूर्ति करता था कमीशन एजेंट
Tue, 11 Jan 2022 02:03 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 11 Jan 2022 02:03 PM IST
सार
डीजीजीआई दिल्ली की ओर से चार दिन पहले शहर में की गई कार्रवाई में बड़ा खुलासा। टीम ने करीब 20 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी है।
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टैक्स
- फोटो : i stock
विस्तार
डीजीजीआई दिल्ली की ओर से चार दिन पहले शहर में की गई कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। पता चला है कि कलक्टरगंज दालमंडी निवासी गौरव जायसवाल मोटा कमीशन लेकर वाराणसी के गुटका कारोबारी को प्लास्टिक रैपर और पैकेजिंग मैटेरियल की आपूर्ति करता था। टीम ने करीब 20 करोड़ रुपये की कर चोरी पकड़ी है।
शुक्रवार तड़के डीजीजीआई दिल्ली की टीम ने कलक्टरगंज के हाते में रहने वाले गौरव जायसवाल के घर छापा मारा था। पूछताछ के बाद टीम के अफसर उसे साथ ले गए थे। गौरव पहले मटर का कारोबार करता था। इसके बाद पॉलिथीन और पिछले कुछ समय से पैकेजिंग मैटेरियल की सप्लाई और कमीशन का काम कर रहा था।
सूत्रों के अनुसार कुछ दिनों पहले वाराणसी के पांडेयपुर स्थित गुटका कारोबारी की फैक्ट्री पर टीम ने छापा मारा था। वो ‘बनारसी आशिक’ के नाम देसी जर्दा गुटका बनाते हैं, जिसकी आसपास के क्षेत्रों में अच्छी खपत है। वहां मिले दस्तावेजों में कानपुर से आपूर्ति संबंधी जानकारी मिली, जो फर्जी इनवाइस के जरिये की जा रही थी।
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जांच में पता चला था कि आपूर्ति ज्यादा थी, लेकिन दस्तावेजों में कम दिखाया जा रहा था। इसके बाद टीम ने गौरव पर शिकंजा कसा तो पूरे मामले का खुलासा होता चला गया।
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शुक्रवार तड़के डीजीजीआई दिल्ली की टीम ने कलक्टरगंज के हाते में रहने वाले गौरव जायसवाल के घर छापा मारा था। पूछताछ के बाद टीम के अफसर उसे साथ ले गए थे। गौरव पहले मटर का कारोबार करता था। इसके बाद पॉलिथीन और पिछले कुछ समय से पैकेजिंग मैटेरियल की सप्लाई और कमीशन का काम कर रहा था।
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सूत्रों के अनुसार कुछ दिनों पहले वाराणसी के पांडेयपुर स्थित गुटका कारोबारी की फैक्ट्री पर टीम ने छापा मारा था। वो ‘बनारसी आशिक’ के नाम देसी जर्दा गुटका बनाते हैं, जिसकी आसपास के क्षेत्रों में अच्छी खपत है। वहां मिले दस्तावेजों में कानपुर से आपूर्ति संबंधी जानकारी मिली, जो फर्जी इनवाइस के जरिये की जा रही थी।
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जांच में पता चला था कि आपूर्ति ज्यादा थी, लेकिन दस्तावेजों में कम दिखाया जा रहा था। इसके बाद टीम ने गौरव पर शिकंजा कसा तो पूरे मामले का खुलासा होता चला गया।