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Kanpur: हीटर से जलाई गई मासूम के पास 48 घंटे बाद पहुंचे अफसर, लकड़ी बीनकर पेट भर रहे चार अनाथ भाई-बहन

Sun, 17 May 2026 06:28 PM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रसून शुक्ला Updated Sun, 17 May 2026 06:28 PM IST
सार

Kanpur News: कानपुर के महाराजपुर थाना क्षेत्र स्थित पुरवामीर गांव में उस समय मासूमों की पीड़ा सामने आई, जब 14 वर्षीय बड़े भाई ने डायल 112 पर फोन कर पुलिस को सूचना दी कि उसकी चाची उसकी छोटी बहन को हीटर से जला रही है। रविवार को जिलाधिकारी के निर्देश पर महिला एवं बाल कल्याण मिशन तथा चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम गांव पहुंची।

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Kanpur Purvameer Orphan Children Abuse Case Administration Relief Delayed
गांव पहुंची अफसरों की टीम - फोटो : amar ujala

विस्तार

न सिर पर मां का ममतामयी आंचल है, न पिता का मजबूत साया। महाराजपुर के पुरवामीर गांव के उन चार मासूमों की दुनिया किसी डरावनी फिल्म जैसी है, जहां अपनों ने जख्म दिए और प्रशासन ने मरहम लगाने में 'दो दिन' की देरी कर दी। कहने को तो महिला एवं बाल कल्याण विभाग ने जिम्मेदारी संभाल ली है, लेकिन हकीकत यह है कि दो दिन बीतने के बाद भी इन अनाथों की रसोई ठंडी है।

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अधिकारियों के आने से पहले जली 'लकड़ियों की आग

जिलाधिकारी के आदेश पर जब रविवार को महिला एवं बाल कल्याण मिशन और चाइल्ड हेल्प लाइन की टीम गांव पहुंची, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 14 साल का बड़ा भाई सुबह 5 बजे उठकर लकड़ियां बीन चुका था और अपनी छोटी बहन व भाइयों के लिए चूल्हे पर खाना बना चुका था। सरकारी फाइलों में योजनाओं का अंबार है, लेकिन इन बच्चों के घर में न गैस सिलेंडर है और न चूल्हा।

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एक चादर और टूटी खाट: यही है अनाथों की गृहस्थी

प्रशासनिक अमला जब सांत्वना देने पहुंचा, तो घर के हालात देखकर कलेजा मुंह को आ गया। गृहस्थी के नाम पर दो-चार पुराने बर्तन, एक टूटी हुई खाट और बिस्तर के नाम पर महज एक चादर। इसी एक चादर में चारों भाई-बहन सिमटकर रात काटते हैं। दो दिनों तक ये बच्चे भूख और अभाव से लड़ते रहे, तब जाकर अफसरों को इनकी सुध आई।

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Kanpur Purvameer Orphan Children Abuse Case Administration Relief Delayed
बच्चों से जानकारी जुटाते अफसर - फोटो : amar ujala
भैया नहीं मारते, बाकी सब मारते हैं

जब चाइल्ड हेल्प लाइन के कर्मचारियों ने छोटे बच्चों से पूछा कि सबसे ज्यादा प्यार कौन करता है? तो मासूमों की आंखों में आंसू छलक आए। उन्होंने बिलखते हुए कहा, "भैया के अलावा हमारा कोई नहीं है, सब मारते हैं, सिर्फ भैया नहीं मारते।" 14 साल का वह किशोर अब अपने भाई-बहनों के लिए बाप की जिम्मेदारी और मां का प्यार, दोनों निभाने की कोशिश कर रहा है।

घटना का फ्लैशबैक: जब 112 पर गूंजी थी मासूम की पुकार

यह पूरा मामला दो दिन पहले तब शुरू हुआ था, जब बड़े भाई ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को बताया था कि उसकी चाची उसकी छोटी बहन को हीटर से जला रही है। पुलिस मौके पर पहुंची, बच्चों को क्रूर चाचा-चाची से मुक्त कराया गया, लेकिन उसके बाद दो दिनों तक ये बच्चे प्रशासनिक मदद के लिए तरसते रहे।

अब कागजी कार्रवाई का दौर शुरू

रविवार को पहुंची टीम ने बच्चों का डेटा एकत्रित किया और उनके दस्तावेज सुरक्षित किए। अधिकारियों का दावा है कि बच्चों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलेगा और समय-समय पर निगरानी की जाएगी। चाइल्ड हेल्प लाइन के कर्मियों ने फल बांटकर बच्चों का मनोबल बढ़ाने की कोशिश जरूर की, लेकिन सवाल वही है कि राशन के पैकेट के अलावा उन मूलभूत सुविधाओं का क्या, जिनके अभाव में ये बच्चे असुरक्षित हैं

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