UP: दो लाख ब्राह्मण व 20% पिछड़ों पर सबकी निगाहें, अकबरपुर सीट पर वोटर्स के लिए भी प्रत्याशी चुनना आसान नहीं
Kanpur News: अकबरपुर लोकसभा सीट पर तीसरी बार प्रत्याशी के रूप में देवेंद्र सिंह भोले और राजाराम पाल चुनाव मैदान में हैं। हालांकि, दलों के सियासी समीकरणों की वजह से मतदाताओं के लिए भी प्रत्याशी चुनना आसान नहीं है।
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कानपुर में अकबरपुर लोकसभा सीट पर जीत के लिए जीतोड़ कोशिश में जुटे भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले से लेकर इंडी गठबंधन के राजाराम पाल का फोकस क्षेत्र के करीब दो लाख ब्राह्मण ओर बीस फीसदी पिछड़े वोटरों पर है। दोनों ही प्रत्याशी और उनकी पार्टियां अपने-अपने तरीके से इस वोटबैंक को साधने के लिए कोशिश में जुटी है। हालांकि, गुपचुप तरीके से काम करने के लिए जानी जाने वाली बसपा के राजेश द्विवेदी दोनों की राह में रोड़ा अटका सकते हैं।
पिछले दो चुनाव में लगातार जीत हासिल करने वाले भोले के पास सजातीय क्षत्रियों के अलावा ब्राह्मण और केंद्रीय योजनाओं की बदौलत लाभार्थियों के वोटबैंक का समर्थन मिलने आस है जिसमें लगभग हर जाति व धर्म के लोग शामिल हैं। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनाव में भाजपा को इसका खासा लाभ मिला था। हालांकि इस बार कांग्रेस और सपा के गठबंधन के बाद स्थितियां पहले से अलग हैं। सपा और कांग्रेस दोनों ही पिछड़ों व दलितों पर फोकस कर रही है।
एक मई को होने वाली है मायावती की रैली
सपा जहां पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक पीडीए का नारा देकर वोट जुटाने के लिए प्रयासरत है। वहीं, कांग्रेस दलितों के बीच अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष के नाम पर पैठ बनाने की कोशिश कर रही है। हालांकि अबतक साइलेंस चल रही बसपा ने ब्राह्मण चेहरे पर दांव लगाकर अपनी सोशल इंजीनियरिंग के फार्मूले से चुनाव को त्रिकोणीय बना दिया है। बसपा प्रमुख मायावती की इस लोकसभा क्षेत्र में आगामी एक मई को होने वाली रैली के बाद बसपा की सक्रियता और तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है। ऐसे में पार्टियों के अपने-अपने सियासी गणित की वजह से मतदाताओं के लिए चुनाव में अपना प्रत्याशी तय करना आसान नहीं है।
पिछड़े, ब्राह्मण कहां जाएंगे
चुनाव में सपा के राजाराम पाल पिछड़ा वर्ग से आते हैं। कांग्रेस, बसपा में रहने से उनकी घुसपैठ अन्य वर्ग के वोटरों में भी है। वहीं, बसपा के राजेश द्विवेदी ब्राह्मण है। ब्राह्मण वोटों के अलावा बसपा के कोर वोटर माने जाते रहे दलित वोटबैंक से भी उनके लिए वोटों का पिटारा खुल सकता है। वहीं, भाजपा अब ब्राह्मणों को अपना कोर वोटबैंक मानती है जबकि पीएम मोदी समेत तमाम नेताओं के नाम पर पिछड़े वोटबैंक को भी साधने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में सजातीय वोटों के समीकरण में तीनों का ही पलड़ा भारी दिखता है।
हर दल की अपनी-अपनी तैयारी
भाजपा पूरी तरह से आश्वस्त है कि मोदी और योगी सरकार की ओर से गरीबों के लिए शुरू की गई राशन से लेकर अन्य योजनाओं से दलित मतदाता भाजपा से जुड़ चुके हैं। गठबंधन और उसके प्रत्याशी इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि सपा की ओर से चलाए गए पीडीए अभियान और प्रत्याशी के पूर्व में बसपाई होने का भी फायदा मिलेगा। इससे अलग बसपा ब्राह्मण चेहरे के साथ साथ दलित मतदाताओं को अपनी ओर जोड़ने के लिए बसपा प्रमुख मायावती की एक मई को रैली कराने जा रही है।
2014 के लोकसभा चुनाव पर एक नजर
- 4,81,584 वोट मिले थे भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले को।
- 2,02,587 वोट मिले थे बसपा के अनिल शुक्ला वारसी को, अनिल अब भाजपा में हैं।
- 1,47,002 वोट मिले थे सपा के लाल सिंह तोमर को, वह भी अब भाजपा में हैं।
- 96,827 वोट मिले थे कांग्रेस के राजाराम पाल को, राजाराम अब सपा नेता और गठबंधन के प्रत्याशी हैं।
2019 के लोकसभा चुनाव पर एक नजर
- 5,81,282 वोट मिले थे भाजपा के देवेंद्र सिंह भोले को, पिछले चुनाव से 7.12 प्रतिशत अधिक।
- 3,06,140 वोट मिले थे बसपा की निशा सचान को, पिछले चुनाव से बसपा को 9.01 प्रतिशत अधिक वोट मिले थे।
- 1,08,341 वोट मिले थे कांग्रेस के राजाराम पाल को, 0.06 प्रतिशत वोट पिछले चुनाव से अधिक मिले थे।
अकबरपुर लोकसभा क्षेत्र
- कुल मतदान केंद्र 740।
- कुल मतदाता 15,19,383।
- कुल महिला मतदाता 7,04,025।
- कुल पुरुष मतदाता 8,15,290।